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मात्र 23 साल की शहनाज आर्मी के ज्यूडिशियल विभाग में बनी एडवोकेट जनरल, मेवात में खुशी का माहौल

मेवात(हरियाणा ) 19 अगस्त।शिक्षित और मध्यम वर्गीय मेवाती परिवार की मात्र 23 वर्षीय बेटी का आर्मी के ज्यूडिशियल विभाग में एडवोकेट जनरल के पर नियुक्ति होने से राजस्थान और मेवात के हरियाणा मेवात में खुशी कि लहर दौड गई है। इस पद तक पहुचे वाले शहनाज हरियाणा और राजस्थान के मेवात की पहली महिला ही नहीं बल्कि कोई पुरुष भी इस कारनामे तक नहीं पहुंच सका है। शहनाज के और उनके परिवार वालों को मुबारकबाद देने के लिये लोगों और नेताओं का तांता लगा हुआ है। जहां शहनाज का चयन हुआ है उसमें आर्मी के आंतरिक मामलों, कोर्ट मार्शल से लेकर अन्य कर्मचारियो के न्यायिक मामलो की सुनवाई होती है।
मात्र 23 वर्षीय शहनाज़ निवासी बख्¸तू का बास, बड़ौदा मेव जिला अलवर राजस्थान निवासी आसू खान (रिटायर्ड मेजर सूबेदार)की पुत्री है। बृहस्पतिवार को जिला मेव शिक्षा पंचायत द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शहनाज को प्रतिभा सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर काफी समाज और जानी पहचानी हस्तियों ने शिरकत की।
शहनाज ने बताया कि इस पद तक हर कोई ऐसे ही हीं पहुंच सकता बल्कि इसके लिये कडी महनत करनी पडती है। उन्होने अपने पिता रिटायर्ड मेजर सूबेदार आसू खान के सपनों को साकार करने के लिये कडी महनत की है। आज वह इस मुकाम पर अपने पिता और माता के सहयोग के बदौलत ही पहुचे सकी है। उन्होंने काफी विस्तार से बताया की किस तरह अपने दूसरे प्रयास में आर्मी सिलेक्शन बोर्ड द्वारा आयोजित लिखित परीक्षा में अपना स्थान बनाया यधपि इसके लिए उन्होंने इंडियन जुडिशल सर्विस की तैयारी को भी छोड़ दिया जिसके लिए लॉ स्टूडेंट बहुत मेहनत करते है। उन्होंने बताया की निचली कलासों में उसके मार्क्स ज्यादा बेहतर नही थे और उन्हें आर्ट्स से इंग्लिश मीडियम को छोड़कर हिंदी मीडियम में पढाई करनी पड़ी बजाए साइंस स्ट्रीम में जाने के। उसने अपने इंट्रव्यू से लेकर सलेक्शन तक के अपने अनुभवों का विस्तार से जिक्र किया। किस तरह वो लोग फेस रीडिंग से लेकर आपके ऐटीटयूड और पर्सनल्टी के साथ साथ आपके अनुभव को भी काफी बारीकी से रीड करते है। सबसे आखिर में इनका मेडिकल टेस्ट हुआ जो की आर्मी सेलेक्शन्स का मुख्य भाग होता है जिसमे इनके कोहनी के जोड़ का एंगल में मामूली सा फर्क और पैर के अंगूठे में हलकी सूजन की वजह से उसको रिजेक्ट कर दिया गया। फिर शुरू हुई इनकी आर्मी से लेकर एम्स के मेडिकल विभाग तक की भाग दौड़ जिसमे इनको अंतत: कामयाबी मिली।
गौरतलब है कि आर्मी के अपने कानून कायदे होते हैं जिनमे सिविल सर्विसेज और यहां तक की सिविल जूडिशल सिस्टम का भी दखल नही हो सकता। फिर भी इनके प्रयास रंग लाये और आर्मी द्वारा इनके मेडिकल रिव्यु को मंजूरी मिल गयी जिसमे कामयाबी मिली। कम आयुु होने के बावजूद भी शहनाज में किसी प्रकार की हिचक, झिझक, संकोच जैसा कुछ नही था यानि जो कुछ कहा बिलकुल बेबाक, स्पष्ट और लॉजिकल तरीके से। इस प्रकार खुलकर बोलना अपने पक्ष को बिलकुल सटीक ढंग से रखना वो भी काफी सारे अनजान लोगो के सामने, शायद ये ही वो खासियत थी इस मेवाती लड़की की जिसको आर्मी ऑफिशल्स ने सेलेक्ट किया अपने आंतरिक मामलो को सुलझाने के लिए। उन्होंने बताया की आज के स्टूडेंट्स पर पेरेंट्स का मार्क्स गैनिंग का काफी दबाव रहता है। जो की उनको अपनी समस्याओ को पेरेंट्स के साथ शेयर करने में सबसे ज्यादा बाधक है। जिसके कारण ही वो जिंदगी में आगे जाकर नाकामयाब हो जाते है।

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समारोह में शहनाज़ के अलावा दूसरे कई लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये इस मौके पर सभी वक्ताओं ने शिक्षा और अचानक से दहेज़ जैसे गंभीर सामाजिक बुराइयो पर विचार रखे गये।
कार्यक्रम मे भरतपुर जिला माइनॉरिटी ऑफिसर भाई मुंशी खान जी, चाइल्ड डेवलपमेंट ऑफिसर भाई नवल ख़ान जी, शहनाज़ के पिता एवं रिटायर्ड सूबेदार मेजर आशु खान मेवाति, प्रो. रसीद, प्रो. तय्यब हुसैन, एडवोकेट युसूफ बाघोडिया (फिरोजपुर झिरका), इंजीनियर साकिर, दीन मोहम्मद (साडोली), एग्रीकल्चर ऑफिसर शीश मोहम्मद, मास्टर इंसाफ ( पिपरौली), राहुल सरपंच (तिजारा), मास्टर जुबेर, यासीन पहलवान, अख्तर, रमज़ान सहित काफी युवा और मेवात शिक्षा पंचायत के सभी सदस्य मौज़ूद रहे।

युनुस अलवी जर्नलिस्ट

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