मानवाधिकारों के हनन से कश्मीर में अराजकता : प्रोफेसर हमीदा नईम

मानवाधिकारों के हनन से कश्मीर में अराजकता : प्रोफेसर हमीदा नईम
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हैदराबाद। कश्मीर सेंटर फॉर सोशल एंड डवलपमेंट स्टडीज की प्रोफेसर हमीदा नईम ने कहा है कि कश्मीरी युवक केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण विरोध करने के लिए विवश है। उनकी राय में भारत से कश्मीर की संबद्धता को यथावत बनाये रखा जाना चाहिए। शहर के गोल्डन जुबिली हॉल में ‘उर्दू रोज़नामा सियासत’ की ओर से आयोजित ‘कश्मीर की वर्तमान स्थिति और केन्द्र’ विषयक सेमीनार में उन्होंने यह विचार रखे।

 

इस मौके पर उन्होंने कहा कि कश्मीर की पीडीपी सरकार केंद्र के इशारे पर कार्य कर रही है जिससे युवाओं को उकसाया जा रहा है। उन्होंने महबूबा मुफ़्ती के उस नारे को उदृत किया जिसमें कहा था कि भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए पीडीपी को वोट दें। प्रो हमीदा नईम यह भी कहा कि भारत के साथ कश्मीर की संबद्धता के मद्देनज़र भारत की रक्षा, विदेश और संचार आदि सेवा का ख्याल रखना होगा लेकिन सरकार ने इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए यहां 9 लाख सैनिकों की तैनाती की हैं।

 

मानवाधिकारों के हनन से कश्मीर में अराजकता का माहौल है। कश्मीर के लोगों को न्याय मिलने पर ही यहां स्थिति नियंत्रण में आ सकती है। उन्होंने ऐतिहासिक संधि का ब्यौरा देते हुए अनुच्छेद 370 को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिकादायर की जा रही है जबकि इसको रद्द करना सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। साथ ही कहा कि कश्मीर के लोग 1975 के बाद से अपने अधिकारों को हासिल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

 

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि कश्मीर के लोग पाकिस्तान नहीं जाना चाहते हैं, वे तो न्याय चाहते हैं। सियासत उर्दू दैनिक के संपादक जाहिद अली खान ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। इस अवसर पर टीआरएस के विधान परिषद सदस्य फारूक हुसैन भी बैठक में उपस्थित थे।

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