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माया की मूर्ति तोड़ने वालों से केस वापस लेने के इम्कान

लखनऊ, 29 मई: पत्थर की मूर्ति तोड़ना इतना बड़ा जुर्म नहीं है कि गद्दारी का मुकदमा चले। जी हां, कुछ ऐसी ही दलील देते हुए हुकूमत ने माया की मूर्ति तोड़ने वाले मुल्ज़िमों का मुकदमा वापस लेने का अमल शुरू कर दिया है। हुकूमत ने इस्तेगाशा से

लखनऊ, 29 मई: पत्थर की मूर्ति तोड़ना इतना बड़ा जुर्म नहीं है कि गद्दारी का मुकदमा चले। जी हां, कुछ ऐसी ही दलील देते हुए हुकूमत ने माया की मूर्ति तोड़ने वाले मुल्ज़िमों का मुकदमा वापस लेने का अमल शुरू कर दिया है। हुकूमत ने इस्तेगाशा से इस ताल्लुक में कानूनी राय मांगी है।

सरकारी ज़राए के मुताबिक, चीफ सेक्रेटरी इंसाफ को इस ताल्लुक में छह अप्रैल को खत लिखकर रिपोर्ट तलब की है।

हुकूमत की तरफ से महकमा इंसाफ को भेजे गए खत में लिखा है कि क्यों न सामाजी तब्दीली मुकाम में मूर्ति तोड़ने वाले मुल्ज़िमों से मुकदमा वापस ले लिया जाए।

एक पत्थर की मूर्ति तोड़ने पर किसी के खिलाफ गद्दार जैसा संगीन एक्ट में मुकदमा क्यों चलाया जाए। इस्तेगाशा की राय मिलने के बाद हुकूमत की तरफ से मुकदमा वापस लेने के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी।

याद रहे कि 12 जुलाई 2012 को गोमती नगर वाकेए सामाजी तब्दीली मुकाम (अंबेडकर पार्क) में साबिक वज़ीर ए आला मायावती की मूर्ति को तोड़ दिया गया था।

पुलिस ने इसमें यूपी नवनिर्माण सेना के कौमी सदर अमित अग्रवाल उर्फ अमित जानी, कासिम चौधरी और राजेंद्र प्रसाद चौधरी को मुल्ज़िम बनाया था। बाद में इसमें पवन शर्मा और शगुन त्यागी का नाम भी सामने आया था।

———–बशुक्रिया: अमर उजाला

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