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मालिगांव बम धमाका केस : जेल में महरूस 9 मुस्लिम नौजवान बेक़सूर

तहक़ीक़ात में ग़लती का एतराफ़ , हिंदूतवा ग्रुप केख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई, ऐस आई टी ने उजलत से काम लिया: एन आई ए

तहक़ीक़ात में ग़लती का एतराफ़ , हिंदूतवा ग्रुप केख़िलाफ़ कार्रवाई नहीं की गई,
ऐस आई टी ने उजलत से काम लिया: एन आई ए
मुंबई। 13 सितंबर (एजैंसीज़) मालिगांव बम धमाका के केस में जेल में महरूस 9 मुस्लमानों को बताया जाता है कि बेक़सूर क़रार दिया गया है। क़ौमी तहक़ीक़ाती एजैंसी ( एन आई ए) ने 2006-ए-में मालिगांव बम धमाका केस के सिलसिले में गिरफ़्तार और महरूस 9 मुस्लिम नौजवानों को बेगुनाह क़रार दिया है। पाँच साल पहले मुस्लिम नौजवानों पर ममनूआ तंज़ीम स्टूडैंटस इस्लामिक मूमैंट आफ़ इंडिया (सैमी) के मंसूबा के हिस्सा के तौर पर दो बम धमाका करने का इल्ज़ाम था, लेकिन ज़राए ने बताया कि तहक़ीक़ाती एजैंसी अब इन नौजवानों की दरख़ास्त ज़मानत की मुख़ालिफ़त नहीं करेगी। जब ये नौजवान अदालत में अपनी बेक़सूर होने की इल्तिजा करते हुए दरख़ास्त ज़मानत पेश करेंगे तो तहक़ीक़ाती एजैंसी इस दरख़ास्त की मुख़ालिफ़त नहीं करेगी। इन नौजवानों को महाराष्ट्रा ए टी एफ़ ने गिरफ़्तार किया है , इस हफ़्ता उन के केस की समाअत शुरू होने वाली है। 17 सितंबर को दरख़ास्त ज़मानत पर समाअत के बाद उन की रिहाई मुम्किन है। 2006ए- में गिरफ़्तारी के बाद से उन तमाम 9 मुस्लिम नौजवानों को मुंबई के आर्थर रोड जेल में रखा गया है। 2006ए- के बम धमाकों में 31 अफ़राद हलाक और 312 ज़ख़मी हुए थे। तहक़ीक़ाती एजैंसी के मौक़िफ़ में तबदीली से पता चलता है कि मालिगांव धमाके , हिंदूतवा ग्रुप की कारस्तानी थी, इस केस में गै़रज़रूरी मुस्लिम नौजवानों को फांसा गया। सी बी आई ने इन आई ए को पेश करदा अपनी रिपोर्ट में सिर्फ इतना कहा है कि गुज़श्ता साल हिंदूतवा ग्रुप के गिरफ़्तार शूदा कारकुनों से पूछगिछ की जानी चाहीए। 2009ए- में सी बी आई ने महाराष्ट्रा की ए टी इसके ख़ुतूत पर अमल करते हुए 9 मुस्लमानों के ख़िलाफ़ चार्ज शीट पेश की थी। इस एजैंसी ने 2010-ए-में अपने मौक़िफ़ को इस वक़्त तबदील करदिया जब स्वामी असीमानंद ने इक़बाल-ए-जुर्म करते हुए मालिगांव बम धमाकों में हिंदूतवा ग्रुप के मुलव्वस होने का एतराफ़ किया। ये बम धमाके ज़ाफ़रानी ब्रिगेड के कारकुनों की कारस्तानी थी। दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ तहक़ीक़ात में इस तरह की ग़लती के नतीजा में 9 बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को पाँच साल तक जेल की सज़ा काटनी पड़ी। दूसरी जानिब हिंदूतवा ग्रुप को इस केस में बहैसीयत मुल्ज़िम शामिल नहीं किया गया। ये इन्किशाफ़ात ग़ैरमामूली-ओ-सनसनीखेज़ हैं। ये पहली मर्तबा है कि तहक़ीक़ाती एजैंसी ने दाख़िली तौर पर तौसीक़ की है कि इबतदा-ए-में मालिगांव से मुस्लिम नौजवानों की गिरफ़्तारी ग़लती का नतीजा थी। तहक़ीक़ाती एजैंसी अब अपनी ग़लती को सुधारने केलिए राहें तलाश कररही हैं और उन बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों की रिहाई केलिए ज़मीनी तैय्यारी में मसरूफ़ है। इन आई ए की अब तक की तहक़ीक़ात से यही इशारे मिलते हैं कि महाराष्ट्रा पुलिस की इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी उसको एड और सी बी आई ने मुबय्यना तौर पर इन मुल्ज़िमीन के ख़िलाफ़ उजलत में चार्ज शीट दाख़िल की थी। इन आई ए ने मालिगांव बम धमाकों में हिन्दू दहश्तगर्द ग्रुप के इमकानी तौर पर मुलव्वस होने का जायज़ा लिया है। एजैंसी इन पुलिस ओहदेदारों के रोल की भी तहक़ीक़ात करेगी जिन्हों ने 9 मुस्लिम नौजवानों को झूटे इल्ज़ाम में फांसा था और उन पर धमाकों के इल्ज़ाम आइद किए थे। ज़राए ने कहा कि सी बी आई से भी पूछगिछ की जाएगी जिस ने ए टी इससे ये केस अपने ज़िम्मा लिया था। स्वामी असीमानंद की गिरफ़्तारी के बाद इन आई ए को इस केस की तहक़ीक़ात तफ़वीज़ की गई थी। मुहम्मद ज़ाहिद को असल मुल्ज़िम क़रार दिया गया जब वो मालिगांव धमाका मुक़ाम पर मौजूद थे। ए टी इसके मुताबिक़ ज़ाहिद ममनूआ तंज़ीम सैमी की सरगर्मीयों में मसरूफ़ है, ताहम इस केस की तहक़ीक़ात में कई खामियां पाई गईं। ज़ाहिद एक मौज़ा में नमाज़-ए-जुमा की इमामत कररहे थे, जो कि मालिगांव से 700 कीलोमीटर दूर वाक़्य था। उन्हें मालिगांव बम धमाकों के मुक़ाम पर पाए जाने के इल्ज़ाम में फांसा गया। सी बी आई ने तहक़ीक़ात के दौरान ये भी इशारा दिया कि ए टी ऐस ओहदेदार इस केस में दो मुल्ज़िमीन के नामों को भी हल करने में नाकाम रहे, क्योंकि इन ओहदेदारों ने जिस मुल्ज़िम का नाम पेश किया, वो पहले ही से जेल में महरूस है जबकि दूसरा मुल्ज़िम धमाके के वक़्त मालिगांव से 700 कीलोमीटर दौर था। सी बी आई ओहदेदारों ने दावा किया कि इस वक़्त के ए टी ऐस ओहदेदारों ने ऐनी शाहिदीन के ब्यानात को नजरअंदाज़ करदिया। बाअज़ सीनीयर ओहदेदारों की जानिब से घड़ी गई कहानी पर इकतिफ़ा पर करते हुए चंद बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को माख़ूज़ किया गया। इस से ज़ाहिर होता है कि ऐस आई टी उजलत में इस केस से निमटना चाहती थी। मजिस्ट्रेट के रूबरू स्वामी असीमानंद के आतुर एफ-ए-गुनाह के बाद ए टी उसकी तमाम तहक़ीक़ात का भांडा फूट गया और वो एक सैकूलर मुल्क में तास्सुब पसंद के तौर पर आशकार होगया। असीमानंद ने अपने इक़बाली ब्यान में कहा था कि मालिगांव 2006-ए-का हमला हिन्दू इंतिहापसंद ग्रुपों ने किया था।असीमानंद को सी बी आई ने गिरफ़्तार किया है। वो अभीनीव भारत के असल ज़हन साज़ हैं। एक मुस्लिम नौजवान कलीम ने उन्हें जेल में अपने बेहतर सुलूक के ज़रीया इतना मुतास्सिर किया कि असीमानंद का दिल नरम पड़ गया और उन्हों ने मजिस्ट्रेट के सामने मुस्लिम नौजवानों की बेगुनाही की गवाही देते हुए हिन्दू दहश्तगर्द ग्रुपों को क़सूरवार ठहराया।

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