Thursday , April 26 2018

माल्या के प्रत्यर्पण मामले में बचाव की दलील : भारत की जेलों में गंदगी और क्षमता से अधिक कैदी

लंदन : भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मामले में बचाव पक्ष के वकील ने एक विशेषज्ञ के हवाले से कहा है कि भारत की जेलों में क्षमता से अधिक कैदी हैं। इसके अतिरिक्त यहां की जेलों में सफाई की हालत बेहद खराब है। माल्या के वकील क्लेयर मोंटोगोमेरी ने यूके के प्रिजन सर्विस एक्सपर्ट डॉ. एलन मिशेल को वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया।

मिशेल ने भारत की कोलकाता के अलीपुर और चेन्नई की जेल की स्थिति पर असंतोष जाहिर किया। बचाव पक्ष ने मुंबई स्थित आर्थर रोड जेल की बैरक 12 की स्थिति के संतोषजनक नहीं होना, साबित करने की कोशिश की। 61 वर्षीय माल्या को यहां ही रखा जाना है।

भारत सरकार की ओर से क्राउन प्रॉसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) के वकील मार्क समर्स ने कहा कि मिशेल ने एक अज्ञात कैदी का हवाला दिया है, जो भारत की दूसरी जेल में बंद था। वह इस मौके का मुआवजा पाने के लिए इस्तेमाल कर रहा हो। समर्स ने कहा कि आर्थर रोड जेल की तुलना अन्य से नहीं की जा सकती है। बैरक 12 में सभी सुविधाएं हैं और वहां केवल 6 लोग बंद हैं।

उन्होंने कहा कि भारत जनसंख्या और आकार के नजरिए से बड़ा देश है। ऐसे में हर राज्य की जेल के हालात एक दूसरे से काफी अलग हो सकते हैं। बचाव पक्ष ने शराब कारोबारी के स्वास्थ्य रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि वह मधुमेह, दिल की बीमारी समेत कई बीमारियों से पीड़ित हैं। वहां उनकी सही ढंग से देखभाल नहीं हो सकेगी।

इस पर भारत सरकार के वकील ने कहा कि आर्थर रोड जेल में 24 घंटे डॉक्टर ड्यूटी पर रहते हैं। दरअसल भारत ने धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में माल्या का ब्रिटेन से प्रत्यर्पण की मांग की है। भारत की तरफ से यह आश्वासन भी दिया गया है कि यहां माल्या पर निष्पक्ष तरीके से सुनवाई की जाएगी।

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