Sunday , April 22 2018

मिडिल ईस्ट में यूरोपिए देशों से हथियार की आपूर्ति अंतर्राष्ट्रीय कानून का उलंघन : एमनेस्टी की रिपोर्ट

मानवाधिकार समूहों द्वारा नियुक्त एक रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्रांस ने यमन में अपने सैन्य अभियानों में सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को हथियार और तकनीकी सहायता प्रदान करके अंतर्राष्ट्रीय कानून को तोड़ा है। पेरिस की कानूनी कंपनी एन्सिल ने कहा कि फ्रांस, सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात के लिए हथियार निर्यात करने के लिए सभी संभावनाएं है, जिसमें कोई गारंटी नहीं है कि उनका उपयोग यमन में नहीं किया जाएगा।

एएमनेस्टी इंटरनेशनल और French anti-torture group Acat (फ्रेंच विरोधी अत्याचार समूह एकेट) द्वारा कमीशन की गई रिपोर्ट ने कहा है की हथियारों के निर्यात में संयुक्त राष्ट्र के हथियार व्यापार संधि में फ़्रांस द्वारा उल्लंघन किया गया है और आर्म एक्सपोर्ट पर यूरोपीय संघ की सामान्य स्थिति होने की संभावना है। किसी को कुछ भी मतलब नहीं बस आर्म्स एक्सपोर्ट करना है।

बचाव करते हुये एक विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने मंगलवार को जोर देकर कहा कि “युद्ध के हथियारों के निर्यात पर फ्रांस की एक मजबूत और पारदर्शी नियंत्रण है”। उन्होने कहा “फ्रांस के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के लिए प्रधानमंत्री द्वारा निर्यात निर्णय लिया जाता है”। सऊदी अरब पश्चिमी हथियारों का एक बड़ा खरीदार है और यूरोपीय सरकार एनजीओ के दबाव में आ गई है, क्योंकि यह आशंका है कि उनके हथियार यमन में युद्ध अपराधों में संभवतया यूज किया जा सकता है। नॉर्वे ने संयुक्त अरब अमीरात में हथियारों के निर्यात को निरस्त कर दिया जबकि जर्मनी ने कहा कि युद्ध में शामिल देशों को हथियारों की आपूर्ति नहीं की जाएगी। दूसरी तरफ कुछ अमीरीकी सिनेटरों ने यमन यूद्ध में सऊदी के साथ अमेरिका का सहयोग रहेगा या नहीं ये वोट से तय होगा सिनेटरों ने यमन में सऊदी के लिए अमेरिका का सहयोग को ही अनाधिकृत कहा जा रहा है। इंग्लंड में भी सऊदी को आर्म्स आपूर्ति करने पर विरोध हुआ है।

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