Saturday , December 16 2017

मियांमार में धार्मिक दंगो के लिए मुस‌लमानों पर‌ इल्ज़ाम

यंगून । पश्वीमी मयांमार में धार्मिक दंगों के वाक़ियात दुबारा फूट पड़ने के बाद बुध मज़हब के माननेवालें अपने घरबार छोड़कर फ़रार होगए हैं,ये बात ओफिसरों ने बताई है।इस ओफिसर‌ ने धार्मिक‌ फ़सादात‌ का इल्ज़ाम एक पडोसि मुल्क‌ के मुस‌लमा

यंगून । पश्वीमी मयांमार में धार्मिक दंगों के वाक़ियात दुबारा फूट पड़ने के बाद बुध मज़हब के माननेवालें अपने घरबार छोड़कर फ़रार होगए हैं,ये बात ओफिसरों ने बताई है।इस ओफिसर‌ ने धार्मिक‌ फ़सादात‌ का इल्ज़ाम एक पडोसि मुल्क‌ के मुस‌लमान
रोहनगया लोगों पर लगाया है,हफ़्ते को देहातियों के मकान जलाये जाने के बाद दंगे खत्म‌ करने के लिए बंगला देश की सरहद से नज्दिक‌ राखाइन राज्य‌ में पुलीस और फ़ौज के दस्ते तैनात किए गए हैं, अफ़रातफ़री कल‌ उस वक़्त फैल गई जब राखाइन में बुध मज़हब के माननेवालें 4 लोग‌ फ़सादात‌ में हलाक होगए।

इस राजय में जयादा आबादी रोहनगया की है। रोहनगया एक मुस‌लमान ग्रुप है जिसे अक़वाम-ए-मुत्तहिदा ने दुनिया की इंतिहाई मज़लूम अक़ल्लीयतों(अल्पसंख्यकों) में से क़रार दिया है, ओफिसर‌ ने कहा कि हथियारों से लेस‌ रोहनगया सुबह सवेरे आए।

उन्हों ने देहात को तहस नहस कर दिया है,इस ओफिसर‌ ने नाम ज़ाहिर ना करने की शर्त पर बताया कि वो एक पडोसी मुल्क से कश्तियों में सवार होकर आए थे। मयांमार , बेवतन रोहनगया को मुलक के नसली ग्रुपों में से नहीं बल्कि दुसरे मुल्क का ख़्याल करता है।

सात लाख पच्चास हज़ार रोहनगया आबाद हैं,अक़वाम-ए-मुत्तहिदा के मुताबिक़ इन में से ज़्यादा तर राखाइन में आबाद हैं जबकि ओर‌ दस लाख या इस से जयादा दूसरे मुल्को में जिलावतनी की ज़िंदगी गुजार‌ रहे हैं। ओफिसर‌ ने कहा है कि हम अब तक इस बात‌ की तसदीक़ कर सकते हैं कि 386 मकान जलाये जा चुके हैं जबकि रोहनगया ने बाज़ दूसरी इमारतें भी तबाह करदी हैं।

एक और ओफिसर‌ ने तसदीक़ की कि सेक्युरिटी फ़ोर्स‌ की तादाद बढ़ा दी गई है।रियासती मीडिया का कहना है कि रियासत में दुसरी खबर आने तक‌ कर्फ्यू लगाया जाएगा।
बाज़ देहातों में पाँच या पाँच से जयादा लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगा दि गई है।दूसरे ओफिसर‌ ने भी जो अपना नाम ज़ाहिर नहीं करना चाहता बताया कि फ़ौज की तादाद में बढावा कर दिया गया है। मयांमार की आबादी में बुध मज़हब के माननेवालों की तादाद 89 फीसद है जबकि मुस‌लमान सरकारी तौर पर चार फीसद हैं।

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