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मिर्रीख़ मुहिम वाक़ियात का तारीख़ वार सिलसिला

हिन्दुस्तान ने स्यारा मिर्रीख़ के मदार में अपना ख़लाई जहाज़ नसब करने की कामयाब कोशिश की है। इस सिलसिले में वाक़ियात का तारीख़ वार सिलसिला हसब-ए-ज़ैल है। 7नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ सफ़र के पहले मरहले की तकमील 8नवंबर : कुर्राह-ए-अर्

हिन्दुस्तान ने स्यारा मिर्रीख़ के मदार में अपना ख़लाई जहाज़ नसब करने की कामयाब कोशिश की है। इस सिलसिले में वाक़ियात का तारीख़ वार सिलसिला हसब-ए-ज़ैल है। 7नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ सफ़र के पहले मरहले की तकमील 8नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ सफ़र के दूसरे मरहले की तकमील 9नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ तीसरी बार सफ़र 11नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ चौथा सफ़र 2नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ पांचवां सफ़र 16नवंबर : कुर्राह-ए-अर्ज़ के अतराफ़ छटा सफ़र यक्म दिसम्बर : ख़लाई जहाज़ कुर्राह-ए-अर्ज़ के मदार से मिर्रीख़ की मुहिम पर रवाना दिसम्बर :ख़लाई जहाज़ कुर्राह-ए-अर्ज़ के दायरा असर के बाहर पहुंच गया जिस केलिए उसे 9.25 लाख किलोमीटर निस्फ़ क़तर का फ़ासिला तए करना पड़ा 11दिसम्बर : सफ़र का रास्ता पहली बार दुरुस्त किया गया। 11जून 2014: दूसरी बार सफ़र का रास्ता दुरुस्त किया गया 22सितंम्बर :मिर्रीख़ की मुहिम स्यारा मिर्रीख़ के दायरा क़ुव्वत जाज़िबा में दाख़िल होगया जिसका असर 440 न्यूटन स्याल अप्पूजी मोटर को आज़माईश के तौर पर चलाकर किया गया।

ये मोटर गुज़िशता माह रास्ता दुरुस्त करने के बाद 300दिन तक ख़ाबीदा हालत में सफ़र कररही थी। 24सितंम्बर : मिर्रीख़ की मुहिम अपनी मंज़िल-ए-मक़्सूद यानी स्यारा मिर्रीख़ के अतराफ़ गर्दिश करने के मदार में नसब कर दिया गया। इस तरह हिन्दुस्तान दुनिया का पहला मुल्क बन गया जिस ने स्यारा मिर्रीख़ केलिए अपनी मुहिम का पहली ही कामयाब कोशिश के ज़रिए आग़ाज़ किया है।

सुर्ख़ स्यारा मिर्रीख़ तवील अर्से से साईंसदानों की दिलचस्प का मर्कज़ बना हुआ है क्योंकि उन्हें यक़ीन है कि स्यारा मिर्रीख़ में कुर्राह-ए-अर्ज़ से पहले से ज़िंदगी का वजूद है। स्यारा के अतराफ़ गर्दिश करने वाले मस्नूई सय्यारों से इस बारे में दुरुस्त मालूमात हासिल होसकेगी।

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