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मिल्लत की बेटीयों में बिगाड़ का ज़िम्मेदार कौन?

अब्बू ऐमल मुस्लिम लड़कीयों में बिगाड़ अपने उरूज पर है, लेकिन हमें इस का अंदाज़ा नहीं लेकिन याक़ूत पूरा की नौजवान नसरीन का वाक़िया हर ज़ी शऊर (अकल मनद)और मिल्लत का दर्द रखने वाले फ़र्द के लिए ख़ून के आँसू बहाने के लिए काफ़ी है। रात 7

अब्बू ऐमल मुस्लिम लड़कीयों में बिगाड़ अपने उरूज पर है, लेकिन हमें इस का अंदाज़ा नहीं लेकिन याक़ूत पूरा की नौजवान नसरीन का वाक़िया हर ज़ी शऊर (अकल मनद)और मिल्लत का दर्द रखने वाले फ़र्द के लिए ख़ून के आँसू बहाने के लिए काफ़ी है। रात 7.30 बजे इमली बन पार्क में एक 25 या 26 साल की नौजवान मुस्लमान औरत शराब के नशे में धुत पाई जाती है, जिस की इत्तिला अफ़ज़ल गंज पुलिस स्टेशन को मिलने के बाद यहां के कांस्टेबल उस औरत का इबतिदाई जायज़ा लेने के बाद मीडीया को इस की इत्तिला देते हैं और हम भी इस वाक़िया की तफ़सीलात हासिल करने के लिए मुक़ाम वाक़िया(जगह) पर पहुंच गए।

इमली बन पार्क में नशे में धुत मुस्लिम ख़ातून को देखने के फ़ौरन बाद ऐसा महसूस होने लगा कि ये लड़की एक ख़ुशहाल घराने से ताल्लुक़ रखती है, लेकिन हमारे ज़हन में कई सवाल उठ रहे थे, जिस के जवाबात सिर्फ यही ख़ातून दे सकती थी। इस ख़ातून को पुलिस वालों ने आटो के ज़रीया उस्मानिया दवाख़ाना मुंतक़िल करना शुरू किया तो वो बार बार मेरा सेल फ़ोन कहां है मेरा बुर्क़ा कहां है। इन जुमलों को दोहरा रही थी। उस्मानिया दवाख़ाना पहुंचने के बाद डाक्टरों ने ख़ातून की नाक में एक पाइप दाख़िल करना शुरू किया, जिस के साथ ही औरत ज़ोर ज़ोर से चीख़ने लगी और हमें भी पहली मर्तबा इस बात का इलम हुआ कि नाक के ज़रीया पाइप पेट में दाख़िल करते वक़्त काफ़ी तकलीफ़ होती है।

पाइप के ज़रीया पेट से शराब की कुछ मिक़दार निकालने के बाद जब ज़रा ख़ातून बात करने के मौक़िफ़ में आई तो उस ने सब से पहले अपना नाम नसरीन बताया और याक़ूत पूरा की मुक़ीम भी कहा। नसरीन के बताए हुए पते पर जब पहुंचे और दरवाज़े पर दस्तक दी तो एक ख़ातून ने दरवाज़ा खोला, जिस के बाद नसरीन का पूरा वाक़िया उन्हें सुनाया। जिस के बाद नसरीन के घर वालों ने कहा कि हमारे लिए वो मर चुकी है। इस का हम से कोई ताल्लुक़ नहीं। हम दवा ख़ाना भी नहीं आएंगे ये कह कर उन्होंने दरवाज़ा बंद करलिया। नसरीन ने नशे की हालत में अपने मुताल्लिक़ ये भी बताया कि चार साल क़ब्ल उस की शादी हामिद से हुई है जो सऊदी अरब में मुलाज़मत करते हैं।

नसरीन को कोई औलाद नहीं। नसरीन ने ये भी बताया कि वो ख़वातीन(स्त्री) के गोट बनाने के हुनर की माहिर है और इस के बनाए हुए गोट 4 ता 5 हज़ार में फ़रोख़त होते हैं। दौरान गुफ़्तगु इस ने अपने हाथों में मौजूद अँगूठीयों और जे़वरात के ग़ुम (गाइब)होने की भी शिकायत कर रही थी। नसरीन ने इस क़दर शराबनोशी की थी कि नशे की वो से इस पर ग़शी हर थोड़ी देर में तारी होरही थी। नसरीन की हालत और ये मुनाज़िर देखने वाले हर शख़्स पर सकता तारी था और ख़ुद पुलिस कांस्टेबल ने भी अपनी सरविस में इस तरह का वाक़िया पहली मर्तबा देखने की बात कही। उस्मानिया में अडमीट नसरीन ये पहली ख़ातून नहीं जिसे पुलिस ने नशे की हालत में दवाख़ाना मुंतक़िल किया बल्कि चंद रोज़ क़ब्ल बंजारा हिलज़ हदूद में पेश आए एक वाक़िया में भी एक मुस्लिम ख़ातून रात के 2 बजे नशे में धुत रोड डीवाईडर से टकरा कर ज़ख़मी हुई थी, जिसे पुलिस ने दवाख़ाना मुंतक़िल किया था।

क़ारईन मुस्लिम मुआशरे में और ख़ुसूसन ख़वातीन में शराबनोशी और बे राहरवी के सद्द-ए-बाब(रोकने) के लिए जंगी ख़ुतूत पर काम की ज़रूरत है क्योंकि शरीयत ने शराब को उम्मुल ख़्बाइस (बुराईयों की माँ) क़रार दिया है और इस से ही तमाम बुराईयां जन्म लेती हैं। उर्दू मीडीया अक्सर इस तरह के वाक़ियात की रिपोर्टिंग इस लिए नहीं करता कि इस तरह के वाक़ियात से मिल्लत की ही शर्मिंदगी होती है लेकिन इस्लाह मुआशरा के पेशे नज़र बुराई की निशानदेही इस के सद्द-ए-बाब (रोकने) के लिए ज़रूरी है।

अब जबकि मिल्लत जमातों में बट चुकी है और एक दूसरे पर तन्क़ीद करना हमारा मिज़ाज बन चुका है, लेकिन इस रविष को बदलने की ज़रूरत है। इस्लाह मुआशरा के लिए हर शख़्स को पहले ख़ुद अपना एहतिसाब करने के साथ इन्फ़िरादी तौर पर इस्लाह मुआशरा में सरगर्म होने के इलावा बिला तफ़रीक़(बगैर फरक)

हर उस जमात का साथ देना वक़्त की ज़रूरत है जो इस्लाह मुआशरे की सरगर्मीयों में अपनी तवानाईयां सिर्फ़ कर रहे हैं। नसरीन का मामला उन माँ बाप की आँखों पर पड़ी इतमीनान की पट्टी खोलने के लिए काफ़ी है जो कि अपनी बच्चीयों को ज़िंदगी का हर आराम देने के बाद अपनी मसरुफ़ियात की वजह से लापरवाही करते हुए ग़फ़लत में रहते हैं।

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