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मिल्लत की सही रहनुमाई तालीमी-ओ-मआशी मसाइल के हल में बेहतर् साबित होगी ज़ाहिद अली ख़ान का ख़िताब

हैदराबाद 05 सितंबर: एडीटर सियासत ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि इख़लास के साथ ग़रीब मुसलमानों की इमदाद के लिए शुरू किया जाने वाला काम दुनिया और आख़िरत में कामियाबी का ज़रीया है।

मस्जिद क़बा-ए-गड्स शैड नामपली में मुस्तफ़ा ट्रस्ट की तरफ से ग़रीब विनादार तलबा में तालीमी वज़ाइफ़ की तक़सीम के दौरान ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि मुस्लमान एक ज़हीन क़ौम है जिसकी सही सिम्त रहनुमाई मिल्लत के तालीमी और मआशी मसाइल को हल करने में बेहतर साबित होगी।

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि मुसलमानों का शुमार दुनिया की ज़हीन क़ौमों में होता है मगर मआशी वसाइल की कमी के सबब आज के दौर में मुस्लमान तालीम के मैदान से बिछड़ता जार हा है। उन्होंने कहा कि लड़कों के मुक़ाबले लड़कीयां तालीम के मैदान में कामयाब हो रही हैं जबकि लड़के ग़ैर ज़रूरी सरगर्मीयों में मुतास्सिर हो कर तालीम से महरूम होते जा रहे हैं।

ज़ाहिद अली ख़ान ने मुस्तफ़ा ट्रस्ट की सरगर्मीयों पर कहा कि आज भी दुनिया में मिल्लत इस्लामीया की तरक़्क़ी के लिए तड़पता दिल रखने वाले मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि इदारा सियासत की तरफ से मिल्लत फ़ंड के तहत 70 ता 80 लाख रुपये तालीमी वज़ाइफ़ की इजराई पर ख़र्च किया जाते हैं जबकि लाखों रुपये ज़हीन और होनहार तलबा पर ख़र्च करके उन्हें बिट्स पिलानी और आई आई आई टी जैसे इदारों में दाख़िला दिलाया जाता है जहां से वो महारत हासिल करके माहाना 7 ता 8 लाख रुपये की तनख़्वाह हासिल करते हैं।

ज़ाहिद अली ख़ान ने कहा कि इदारा सियासत ने मेट्रिक और इंटरमीडीएट में सर-ए-फ़हरिस्त आने वाले मुस्लिम तलबा के लिए एक तौला सोने के सिक्के का एलान किया था और मुझे हैरत हुई है जिस लड़की ने मेट्रिक में रियासत की टॉपर की हैसियत से गोल्ड का सिक्का हासिल किया इसी लड़की ने दो साल बाद इंटरमीडीएट के इमतेहानात में स्टेट टॉपर की हैसियत से सोने का सिक्का हासिल किया। ज़ाहिद अली ख़ान ने मज़कूरा लड़की की कामयाबी का राज़ बयान करते हुए कहा कि इस लड़की के घर में टेलीविज़न नहीं है और ना ही उसने या उस के घर वालों ने किसी थेटर की सूरत देखी है।

एडीटर सियासत ने कहा कि टीवी और ग़ैर ज़रूरी सरगर्मीयों से दूर रहने वाले नौजवान ही तालीम के मैदान में कामयाबी से हमकनार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम नौजवान में मुकम्मिल क़ुरआन शरीफ़ हिफ़्ज़ करने की सलाहीयत होती है तो अंदाज़ा लगाया जा सकता हैके मुस्लिम नौजवान किस क़दर ज़हीन होते हैं।

उन्होंने शहरे हैदराबाद के क़दीम तालीमी इदारों तारीख़ी इमारतों के साथ हुकूमतों के खिलवाड़ पर भी तशवीश ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि आलीया और मह्बूबिया स्कूल जहां पर ना सिर्फ बेहतर तालीमी निज़ाम क़ायम कियागया था और वहां के फ़ारिग़-उत-तहसील तलबा ने दुनिया में कामयाबी का झंडा लहराकर वतन-ए-अज़ीज़ का नाम रोशन किया है मगर आज ये तालीमी इदारे बुनियादी सहूलतों से महरूम हैं।

ज़ाहिद अली ख़ान ने क़ुतुब शाही और आसिफ़ जाहि दौर की तामीरात को दरपेश ख़दशात पर भी फ़िक्रमंदी ज़ाहिर की। उन्होंने कहा कि हुकमरान तबक़ा क़दीम दौर में तामीर-कर्दा आलीशान इमारतों को बिना किसी मशवेरे के मुनहदिम करने का फ़ैसला कर लेता है जो काबिल-ए-अफ़सोस और तहज़ीब के लिए नुक़्सानदेह है।

आख़िर में सदर कमेटी शाहिद अली ख़ान ने शुक्रिया अदा किया।सदर मस्जिद क़बा कमेटी मुहम्मद साजिद डाक्टर अनीस इक़बाल अहमद मुहीउद्दीन एम-ए बासित एम-ए रज़्ज़ाक़ और दुसरे मौजूद थे।

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