मिस्री पारलीमानी इंतिख़ाब का निज़ाम ग़ैर दस्तूरी

मिस्री पारलीमानी इंतिख़ाब का निज़ाम ग़ैर दस्तूरी

मिस्र की एक अदालत ने अपने इस फ़ैसले से एक नया तनाज़ा पैदा कर दिया है कि नई पार्लिमेंट के इंतिख़ाब का तरीका-ए-कार गैरा आईनी रहा ।एक अलहदा इंतिज़ामी अदालत के जज मजदी इलाजती ने कहा कि इंतेख़ाब का तरीका-ए-कार जिस के ज़रीया अफ़राद और सि

मिस्र की एक अदालत ने अपने इस फ़ैसले से एक नया तनाज़ा पैदा कर दिया है कि नई पार्लिमेंट के इंतिख़ाब का तरीका-ए-कार गैरा आईनी रहा ।एक अलहदा इंतिज़ामी अदालत के जज मजदी इलाजती ने कहा कि इंतेख़ाब का तरीका-ए-कार जिस के ज़रीया अफ़राद और सियासी पार्टीयों के दरमयान नशिस्तें तक़सीम की गई थीं,आईन के ख़िलाफ़ है। उन्हों ने हतमी फ़ैसले के लिए आला आईनी अदालत की तवज्जा इंतेख़ाबी क़ानून के बाअज़ अजज़ा की तरफ़ दिलाई है।

फ़ौरी तौर पर वाज़ेह नहीं हो सका है कि आया इस फ़ैसले के बाद अदालतें इंतिख़ाब के नताइज को मंसूख़ करदेंगे जो नवंबर से जनवरी तक तीन मरहलों में मुनाक़िद हुए थे।मिस्री सियासतदानों का अंदाज़ा है कि इस फ़ैसला से पार्लीमेंट का काम काज ठप हो सकता है। वाज़ेह रहे कि पार्लीमेंट को एक नया आईन तैय्यार करने के लिए एक कौंसल तशकील देनी है।

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