Friday , December 15 2017

मिस्री बोहरान में अमरीका किस हद तक क़सूरवार

अमरीका ने भी रवां हफ़्ते मिस्री फ़ौज की जानिब से शहरीयों के क़तल-ए-आम के ख़िलाफ़ उठने वाली आलमी आवाज़ों में अपनी आवाज़ शामिल कर दी है ताहम बैनुलअक़वामीउमूर के माहिरीन और तजज़िया कार अमरीका से इस से कुछ ज़्यादा की उम्मीद रखते थे।

अमरीका ने भी रवां हफ़्ते मिस्री फ़ौज की जानिब से शहरीयों के क़तल-ए-आम के ख़िलाफ़ उठने वाली आलमी आवाज़ों में अपनी आवाज़ शामिल कर दी है ताहम बैनुलअक़वामीउमूर के माहिरीन और तजज़िया कार अमरीका से इस से कुछ ज़्यादा की उम्मीद रखते थे।

वाशिंगटन हुकूमत ने रवां हफ़्ते चहारशंबे के रोज़ मिस्री फ़ौज की जानिब से मुज़ाहिरीन के ख़िलाफ़ किए जाने वाले होलनाक क्रैक डाउन की मुज़म्मत की है। इस हवाले से अमरीकी सदर बराक ओबामा का कहना था,जो इक़दामात मिस्र की उबूरी हुकूमत और वहां की स्कियूरिटी फ़ोर्सिज़ की जानिब से किए गए हैं, अमरीका उन की शदीद अलफ़ाज़ में मुज़म्मत करता है। हम नहत्ते शहरीयों पर तशद्दुद के ख़िलाफ़ हैं। हम इंसानी हुक़ूक़ की हिमायत करते हैं और पुर अमन मुज़ाहिरे करना वहां के अवाम का बुनियादी हक़ है।

मुख़्तलिफ़ आलमी अख़बारों और तजज़िया कारों के मुताबिक़ अमरीका की जानिब से सिर्फ़ मुज़म्मत कर देना काफ़ी नहीं है। न्यूयार्क टाईम्स ने मुतालिबा किया है कि अमरीका फ़ौरी तौर पर मिस्री फ़ौज की 1.3 बिलीयन डालर की इमदाद रोके। वाज़ेह रहे कि अमरीका ने अब तक माज़ूल सदर मर्सी की इक़तिदार से बेदख़ली को फ़ौजी बग़ावत नहीं कहा क्योंकि ऐसा कहने की सूरत में अमरीका को फ़ौरी तौर पर मिस्री फ़ौज की इमदाद रोकना होगी।

बर्तानवी थिंक टैंक ऑक्सफ़ोर्ड रिसर्च ग्रुप से वाबस्ता पाल रोजरज़ ने कहा कि अमरीका के लिए असल मसला ये तसादुम है। शायद मिस्र के लिए ये बेहतर होता कि अख़वानुल मुसलमून ने गुज़श्ता इंतिख़ाबात ना जीते होते। अमरीका एक मग़रिब नवाज़ हुकूमत चाहता है, ख़ाह इस के लिए मिस्री फ़ौज को ही ताक़तवर क्यों ना बनाना पड़े। रोजरज़ का मज़ीद कहना था, सिर्फ़ इस्लाम पसंदों का रास्ता रोकने के लिए मिस्री जरनैलों को तआवुन मुहय्या करना अमरीका के लिए मुसबत साबित नहीं हो सकता। अगर इस तरह के तशद्दुद में अमरीकी तआवुन सामने आता है तो इस से अमरीका का इमेज मुतास्सिर होगा।

टलानटिक कौंसल नामी एक अमरीकी थिंक टैंक से वाबस्ता टै्रक रीडोन भी अमरीका की मिस्र की जानिब पालिसी पर शदीद तन्क़ीद करते हैं। वो इस हवाले से कहते हैं कि कुछ ना करना और ख़ामोश रहना भी एक पालिसी है जिस का यक़ीनन असर भी होता है। इस हवाले से उन का कहना था, इस मौक़ा पर वो लोग जिन का ताल्लुक़ अमरीकी इंतिज़ामीया से है, ये बात मानते हैं कि उन की तमाम पालिसीयां बुरी तरह नाकाम हो चुकी हैं, चाहे वो इमदाद की पालिसी हो या कोई और पालिसी और इस का सबूत ये हालिया वाक़ियात हैं।

तजज़िया कारों का मानना है कि मिस्र में फ़ौजी मुदाख़िलत के मौक़ा पर अमरीका के ख़ामोश रहने से अब इस के असरो रसूख़ में कमी वाक़ै हो चुकी है। तजज़िया कारों का मानना है अमरीका ने गुज़श्ता महीने मिस्री फ़ौज की मुदाख़िलत पर मुज़म्मत ना कर के ख़ुद को मुश्किल में फंसा लिया है।
अमरीका की इस ख़ामोशी को मिस्री फ़ौज ने ग्रीन सिगनल समझते हुए मुज़ाहिरीन के ख़िलाफ़ इस तरह की कार्रवाई की है। इन का मज़ीद कहना था कि अमरीका का ये मौक़िफ़ ग़लत है कि वो मिस्र में कुछ कर नहीं सकता था।

मिस्र इस ख़ित्ते में इसराईल के बाद अमरीकी इमदाद लेने वाला दूसरा बड़ा मुल्क है, लिहाज़ा मिस्री फ़ौज के लिए ख़ित्ते में तन्हा होना और अमरीकी इमदाद में कमी एक बहुत बड़ा धचका होता। इस लिए अगर अमरीका चाहता तो सूरत-ए-हाल बेहतर कर सकता था। (एजेंसी)

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