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मिस्र के पहले इस्लाम पसंद राष्ट्रपती की शपथ‌

* इख़वान उल मुस्लिमीन को 84 साल की मेहनत‌ के बाद इक़तिदार , फ़ौज भी मोरचा बंद

* इख़वान उल मुस्लिमीन को 84 साल की मेहनत‌ के बाद इक़तिदार , फ़ौज भी मोरचा बंद
क़ाहिरा । मिस्र के पहले इस्लाम पसंद राष्ट्रपती मुहम्मद मर्सी ने आज शपथ‌ लिया । फ़ौजी हुकमरानों के दौर में मिस्र पर हुकूमत करने का ख़ाब देखने वाली इख़वान उल मुस्लिमीन को 84 साल की मेहनत‌ के बाद बहरहाल कामयाबी मिली है । अगरचे कि फ़ौज मुल‌क को अपनी निगरानी में रखने के इरादे के साथ मोरचा बंद है । शपथ‌ के तुरंत‌ बाद मुहम्मद मर्सी ने कहा कि आज मिस्र में एक सिविल , क़ौमी , दस्तूरी और असरी ममलकत का जन्म हुआ है ।

अमेरीका में तरबियत पाने वाले इंजिनियर‌ ने 1952 में शाही हुक्मरानी की बेदखली के बाद इस मुल्क पर फ़ौजी ओहदेदारों के इक़तिदार को छीन लिया है । वो मिस्र के पहले गैर फ़ौजी सदर होंगे । इख़वान उल मुस्लिमीन पर हुसनी मुबारक के दौर-ए-सदारत में पाबंदी थी इस के इलावा माज़ूल सदर ने इस तंज़ीम को महदूद रखा था अब उस की क़िस्मत खुल गई है ।

अल्लाह के फ़ज़ल‍ और करम से में ये हलफ़ लेता हूँ कि मैं जमहूरी निज़ाम कि संजीदगी से हिफाजत करुंगा । दस्तूर और क़ानून की हुक्मरानी का भी एहतिराम करूंगा । मुहम्मद मर्सी ने सुप्रीम दस्तूरी अदालत के जजों से बातचित‌ करते हुए कहा कि वो लोगों के फाइदों कि हिफाजत‌ करेंगे और क़ौम की आज़ादी को भी सलामती बख़्शेंगे ।

इस कि सरहदों की निगहबानी की जाएगी । 60 साला मर्सी ने दस्तूरी अदालत में शपथ‌ लिया । आम तौर पर पार्लीमेंट में शपथ‌ लिया जाता है इस के बजाए अदालत में जजों के सामने हलफ़ इस लिये लिया गया है कि क्यों कि मिस्र की सुप्रीम कोर्ट ने इस माह के शुरु में इस्लाम पसंदों कि क़ियादत में बनाई गइ पार्लीमेंट‌ को खत्म‌ कर दिया था ।

उन्हों ने तहरीर स्क्वाय‌र पर मुख़ालिफ़ हसनी मुबारक तहरीक से हौसला पाकर इसी मुक़ाम को अपनी शपथ‌ के लिये मुंतख़ब किया । यहां जमा लोगों से ख़िताब करते हुए उन्हों ने कहा कि लोग‌ ही उन की ताक़त की सरचश्मा हैं । उन्हों ने फ़ौजी जनरलों पर आलोचना की और कहा कि ये लोग मुल‌क को दाव‌ पर लगा कर ख़ुदग़रज़ी की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं ।

हलफ़ लेने के बाद मर्सी क़ाहिरा यूनीवर्सिटी पहूंचे इस पोडियम का इस्तिमाल यहां 2009 में अमेरीकी सदर बारिक‌ ओबामा ने आलम इस्लाम से ख़िताब किया था । बारक ओबामा ने अपनी पहली मीयाद के शुरु दिनों में क़ाहिरा का दौरा किया था ।

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