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मिस्र में इंतिख़ाबात

मिस्र में हुसनी मुबारक के इक़तिदार को ख़तम करदेने के बाद मग़रिबी ताक़तें अपने अज़ाइम को बरुए कार लाने की कोशिश कररही हैं। मिस्र में जिस सोच और कल्चर कीतबदीली पैदा करके अपने कल्चर को फ़रोग़ देने में कोशां मग़रिब को इस वक़्त धक्क

मिस्र में हुसनी मुबारक के इक़तिदार को ख़तम करदेने के बाद मग़रिबी ताक़तें अपने अज़ाइम को बरुए कार लाने की कोशिश कररही हैं। मिस्र में जिस सोच और कल्चर कीतबदीली पैदा करके अपने कल्चर को फ़रोग़ देने में कोशां मग़रिब को इस वक़्त धक्का लगा जब मिस्र के शहरीयों ने तशद्दुद और अबतर हालात के बावजूद अपने मुल्क में एक जमहूरी हुकूमत लाने के लिए तवील क़तारों में खड़े होकर वोट दिया।

फ़ौज की उबूरी हुक्मरानी के ख़िलाफ़ तहरीर स्कोवाएर पर उठने वाले ताज़ा एहतिजाज और तशद्दुद के दौरान 41 अफ़राद की हलाकत के बावजूद मिस्र के शहरीयों ने साबिक़ सदर हुसनी मुबारक की बेदखली के बाद पहले पारलीमानी इंतिख़ाबात में हिस्सा लिया अगर ये इंतिख़ाबात यूं ही पुरअमन तौर पर मुकम्मल होते हैं तो एक उबूरी फ़ौजी हुकूमत को कामयाबी के साथ हक़ीक़ी जमहूरी हुक्मरानी में तबदील किया जाएगा। ये जमहूरीयत बिलाशुबा एक मक़बूलआम बग़ावत के बाद क़ायम होगी। पिर के दिन हुई राय दही में अवाम ने 498 रुकनी पार्लीमैंट के मिनजुमला 168 अरकान के लिए वोट डाला है। इंतिख़ाबात में ज़ाइद अज़ 50 पार्टीयां और हज़ारों आज़ाद उम्मीदवार हिस्सा ले रहे हैं।

3 मरहलों में होने वाली इस राय दही में 50 मिलय्यन राय दहनदे अपने हक़ वोट का इस्तिमाल करेंगे। मुतनाज़ा सुप्रीम कौंसल मुसल्लह अफ़्वाज के तहत फ़ौजी हुक्मरानी को ख़तम करने के लिए अवाम में काफ़ी जोश-ओ-ख़ुरोश देखा जा रहा है। उबूरी फ़ौजी हुक्मरानी को ख़तम करने के लिए एहितजाजियों ने अरब दुनिया की कसीर आबादी वाले इस मुल्क में जमहूरीयत के क़ियाम की उम्मीद पैदा करली है। मुल्क में सीवीलीन हुकूमत के क़ियाम की सिम्त उठने वाला ये क़दम अगर अपने मक़ासिद पर पूरा उतरे तो अवाम की देरीना आरज़ू की तकमील होगी। हुसनी मुबारक के इक़तिदार से हटाए जाने के बाद फरवरी में फ़ील्ड मार्शल हुसैन तनतावी की ज़ेर क़ियादत फ़ौजी कौंसल ने मुल़्क की बागडोर सँभाली है।

मिस्र को सयासी, मआशीऔर समाजी तौर पर मज़बूत बनाने की कोशिशें कामयाब होती हैं तो अवाम को एक ख़ुसूसी राहत नसीब होगी। 9 माह तक तशद्दुद की आग में लिपटा मिस्र एक अमन पसंद मुलक है इस की हालिया सूरत-ए-हाल के पीछे बैरूनी हाथ पर शुबा किया जा रहा है। मगर मिस्र के एहितजाजी अवाम ने तहरीर स्कोवाएर से ये पयाम दिया कि अब वो किसी उबूरी फ़ौजी हुकूमत को ज़्यादा देर तक बर्दाश्त नहीं करेंगे। ख़ासकर फ़ील्ड मार्शल हुसैन मुहम्मद तनतावी के ख़िलाफ़ ये राय क़ायम हो रही है कि वो हुसनी मुबारक से अपनी बरसों पुरानीवफ़ादारी के बाद मिस्र के दूसरे आमिरीयत पसंद फ़ौजी हुक्मराँ बनने की आरज़ू रखते हैं।

अगर उन के ख़िलाफ़ पैदा होने वाला ये शुबा दरुस्त है तो मिस्र के अवाम की जमहूरीयत की फ़िज़ा-ए-में सांस लेने की तमन्ना ज़्यादा देर तक क़ायम नहीं रह सकेगी। ऐसे मिस्र में इस्लाम पसंद पार्टीयों ने ख़ासकर इख़वान अलमुस्लिमीन ने अपना ग़लबा बढ़ा लिया है तो अब यहां माज़ी के तरह हालात बरक़रार रहने की कम गुंजाइश पाई जाती है। इस्लाम पसंद पार्टीयों के ग़लबा में इज़ाफ़ा से बैरूनी ताक़तों की नींद में ख़लल पैदा हो जाएगा। मग़रिबीममालिक आलिम अरब में इन्क़िलाब को हुआ दे कर जो मंसूबे बनाए थे उन के ये मंसूबे इस्लाम पसंद ताक़तों के मज़बूत होजाने पर मिस्र जैसे मुल्कों की सूरत-ए-हाल मुख़ालिफ़ मग़रिब बन जाएगी मिस्र में इंतिख़ाबात में ताख़ीर ना करते हुए फ़ौजी जमहूरी हुकूमत ने इन इंतिख़ाबात को यक़ीनी बनाने की इस लिए कोशिश की ताकि इस्लाम पसंद पार्टीयों के इमकानात को कम किया जा सके।

अगर इंतिख़ाबात में ताख़ीर से काम लिया जाता या उबूरी फ़ौजी हुक्मरानी के दौर को मज़ीद वक़्त दिया जाता तो इस से मिस्र में अवाम कीज़हन साज़ी के लिए इस्लाम पसंदों को वक़्त हासिल होता। अब भी इस्लाम पसंद पार्टीयों को इन इंतिख़ाबात में अपना असर दिखाने का मौक़ा मिल रहा है इख़वान अलमुस्लिमीन केइलावा क़दामत पसंद उल-नूर पार्टी भी इंतिख़ाबात में हिस्सा ले रही है। क़ाहिरा के पड़ोसीग़रीब इलाक़ों में इख़वान अलमुस्लिमीन का सब से ज़्यादा असर होने से इस को पार्लीमैंट में नुमायां मुक़ाम मिल सकता है। मिस्र में जितना जल्द अमन बहाल हो जाय और एक बाक़ायदा हुकूमत का क़ियाम अमल में लाया जाय मिस्री अवाम के इलावा पड़ोसी मुल्कों और दीगर ममालिक के लिए भी ज़रूरी है।

ख़ासकर पाइपलाइन के ज़रीया ग़ियास हासिल करने वाले मुल्कों इसराईल और अरदन को मिस्र के हालात में बेहतरी का बेचैनी से इंतिज़ार है। जमहूरीयत को सब से बेहतर तर्ज़ हुक्मरानी माना जाता है। लेकिन मिस्र में इस तरह की जमहूरीयत की बहाली की उम्मीद उस वक़्त की जा सकती है जब जमहूरीतर्ज़ के इंतिख़ाबात के बाद मुंतख़ब होने वाली हुकूमत अवाम के मुफ़ादात के लिए काम करे। अगर जमहूरी तौर पर मुंतख़ब हुकूमत अपने ज़ाती मुफ़ादात केलिए काम करे तो फिर ये चंद लोगों की ज़ालिमाना तर्ज़ हुक्मरानी कहिलायगी। मिस्र के अमन पसंद और जमहूरीयत के ख़ाहां अवाम ने अपने वोट के ज़रीया पार्टी नमानदों के हक़ में वोट दिया है।

आइन्दा मरहलों के दौरान भी राय दही मुकम्मल होगा तो नई हुकूमत के क़ियाम की राह हमवार होगी। जमहूरी तर्ज़ के इंतिख़ाबात लिए मिस्र पर अगर इस्लाम पसंद पार्टीयों काग़लबा हो जाय तो मग़रिब के लिए ये नताइज नाक़ाबिल-ए-क़बूल होंगे और इस के बाद इन का तर्ज़ अमल एक मुंतख़ब हुकूमत के ख़िलाफ़ जिस तरह का भी होगा वो अवाम के हक़ में ग़ैर मुफ़ीद साबित हो तो फिर तहरीर स्कोवाएर पर सुलगते हुए इन्क़िलाब का मसला यूं ही बरक़रार रहेगा ।

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