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‘मीडिया ट्रायल’ को लेकर फिक्रमंद

पटना, 24 फरवरी: हिंदुस्तान के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ‘मीडिया ट्रायल’ के बढ़ते मामलों से फिक्रमंद हैं और उनका मानना है कि इससे मुल्ज़िम के खिलाफ तासुब की हालात पैदा होती है।

पटना, 24 फरवरी: हिंदुस्तान के चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर ‘मीडिया ट्रायल’ के बढ़ते मामलों से फिक्रमंद हैं और उनका मानना है कि इससे मुल्ज़िम के खिलाफ तासुब की हालात पैदा होती है।

यहां एक तीन दिन की जोडिशील कांफ्रेंस से खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल इस वक्त सबसे ज्यादा फिक्र का मौजू है। इसे नहीं होना चाहिए। किसी भी मामले पर फैसला करने का काम कोर्ट पर छोड़ देना चाहिए।

दिल्ली गैंगरेप में नाबालिग के शामिल होने के बाद मांग उठने लगी है कि नाबालिग की उम्र 18 से घटाकर 16 कर दी जाए। इस बारे में कबीर ने कहा, ‘इस पर फैसला सिर्फ पार्लियामेंट ही ले सकती है और किसी दूसर को यह हक नहीं है।’ गवाहों की हिफाज़त के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसके लिए मुनासिब इंतेज़ाम होने चाहिए। मौजूदा इंतेज़ाम से नाखुश चीफ जस्टिस ने कहा कि इसमें काफी सुधार होने की गुंजाइश है।

उन्होंने अपने तकरीर में कहा कि मुल्क में गवाह की सेक्युरिटी जैसी कोई इख्तेयारात ही दस्तयाब नहीं है। अदालतों में गवाहों के लिए बैठने का इंतेज़ाम भी नही है।

कई मामलों में सजा न मिल पाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि गवाहों को बंधक बना लिया जाता है। मुनासिब सुबूतों की कमी और गवाहों के पेश नहीं होने के वजह से कई केस में सजा नहीं हो पाती है।

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