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मुंबई केस : पाकिस्तानी अदालत का कशती फ़रोख़त कुनुन्दगान को समन

ईस्लामाबाद, 31 मार्च (पी टी आई) एक पाकिस्तानी इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी अदालत ने जो मुंबई हमलों में मुलव्विस होने के इल्ज़ाम के हामिल सात अफ़राद का ट्रायल मुनाक़िद कर रही है, आज छः गवाहों को समन जारी किए कि उन्होंने मुल्ज़िमीन को एक कश्ती औ

ईस्लामाबाद, 31 मार्च (पी टी आई) एक पाकिस्तानी इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी अदालत ने जो मुंबई हमलों में मुलव्विस होने के इल्ज़ाम के हामिल सात अफ़राद का ट्रायल मुनाक़िद कर रही है, आज छः गवाहों को समन जारी किए कि उन्होंने मुल्ज़िमीन को एक कश्ती और दीगर साज़-ओ-सामान फ़रोख़त किए।

जज चौधरी हबीब अलरहमान‌ जो इस ट्रायल को स्कियोरटी वजूहात की बिना रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद दरवाज़ों के पीछे मुनाक़िद कर रहे हैं, उन्होंने हमज़ा बिन तारिक़, मुहम्मद अली, मुहम्मद सैफ़-उल्लाह, उमरदराज़, साक़िब इक़बाल और अतीक़ अहमद को समन जारी किए, प्रॉसिक्यूटरस ने ये बात कही।

चीफ़ प्रॉसिक्यूटर चौधरी ज़ुल्फ़क़ार अली ने समाअत के बाद पी टी आई को बताया कि मुल्ज़िमीन ने कुश्ती, इंजन और मुताल्लिक़ा सामान इन आम गवाहों से ख़रीदे थे। उन्होंने कहा कि चूँकि हिन्दुस्तानी हुक्काम ने अभी तक पाकिस्तान की इस दरख़ास्त पर जवाब नहीं दिया कि पाकिस्तानी अदालती कमीशन को मुंबई में चार गवाहों पर जरह करने और बयानात कलमबंद करने की इजाज़त दी जाये, इस लिए इस्तिग़ासा ने आज जज से ये ट्रायल आगे बढ़ाने की गुज़ारिश की।

अली ने जज को समाअत के दौरान बताया कि इस केस में पहले ही काफ़ी ताख़ीर होचुकी है और अदालत को सुमावती कार्रवाई जारी रखना चाहीए। प्रॉसिक्यूटरस ने अदालत से ये दरख़ास्त भी की कि समाअतों को रोज़ाना मुनाक़िद करने उनकी इस्तिदा क़बूल की जाये। जज ने बादअज़ां इस केस को 6 एप्रैल तक मुल्तवी कर दिया। पाकिस्तानी जूडीशल कमीशन का दौरा-ए‍हिन्दुस्तान पहले ही इस मसले पर कई हफ़्ते की ताख़ीर का शिकार होचुका है कि ईस्लामाबाद ने पियानल के अरकान को गवाहों पर जरह की इजाज़त देने का तीक़न तलब किया है।

ये कमीशन चार गवाहों के बयानात कलमबंद करने के लिए मुंबई को दूसरा दौरा करने वाला है क्योंकि इन्सिदाद-ए-दहशत गर्दी अदालत ने इस के पहले दौरे के बाद पेश करदा रिपोर्ट को इस बुनियाद पर मुस्तर्द कर दिया था कि इस पियानल को कोई जरह की इजाज़त नहीं दी गई।

सात मुश्तबा मुल्ज़िमीन बिशमोल लश्कर-ए-तयेबा कमांडर ज़की अलरहमान लखवी का ट्रायल बार बार अलतवा और मुख़्तलिफ़ नौईयत की फ़न्नी ताख़ीर के सबब निहायत सुस्त रफ़्तारी से आगे बढ़ा है। इन मुल्ज़िमीन पर नवंबर 2008 में पेश आए हमलों की मंसूबा बंदी, उन के लिए फ़ंडज़ की फ़राहमी और उन पर अंजाम दही के इल्ज़ामात आइद किए गए हैं जबकि इस के नतीजे में 166 अफ़राद मारे गए, और मुतअद्दिद दीगर ज़ख़मी हुए।

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