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मुजफ्फरनगर दंगा: ‘आजम ने कहा था- जो हो रहा है, होने दो’

मुजफ्फरनगर फिर्कावाराना दंगे तो खत्म हो गये, लेकिन इसे लेकर अब चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। भले ही यूपी हुकूमत दंगे भड़काने का इल्ज़ाम अपोजिशन पार्टियों पर मढ़ रही हो, मगर एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि समाजवादी पार्

मुजफ्फरनगर फिर्कावाराना दंगे तो खत्म हो गये, लेकिन इसे लेकर अब चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। भले ही यूपी हुकूमत दंगे भड़काने का इल्ज़ाम अपोजिशन पार्टियों पर मढ़ रही हो, मगर एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ है कि समाजवादी पार्टी के लीडरों के दबाव की वजह से ही हालात और खराब हुए थे। तशद्दुद के शिकार इलाके में तैनात रहे आफीसरों ने खुलासा किया है कि कवाल में हुई शुरुआती तशद्दुद के बाद डबल मर्डर के 7 मुल्ज़िमों को अरेस्ट कर लिया गया था, मगर लखनऊ से आजम नाम के लीडर के फोन के बाद उन लोगों को छोड़ना पड़ा था।

जिस वक्त दंगे जारी थे वज़ीर ए आला अखिलेश यादव ने कहा था कि हुकूमत ने पुलिस और इंतेज़ामिया को काम करने की पूरी छूट दी है और किसी तरह का दबाव नहीं है। मगर इलाके के कुछ पुलिस ऑफिसर्स की मानें तो दंगों के दौरान हुक्मरान पार्टी के लीडरों ने पुलिस के काम में रोड़े अटकाए और कई थानों से पकड़े गए मुश्तबा अफराद को छुड़ाने का काम किया।

न्यूज चैनल आज तक ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए खुलासा किया है कि फुगाना थाने पर लखनऊ से आजम नाम के लीडर ने फोन कर कहा था कि जो हो रहा है होने दो।

आज तक के स्टिंग ऑपरेशन में जानसठ के सर्कल ऑफिसर जे. आर. जोशी को कैमरे पर कहते हुए दिखाया गया है कि ‘ऊपर’ के दबाव में सात‍ आठ मुश्तबा अफराद लोगों को छोड़ना पड़ा। जोशी ने बताया, ‘ऊपर से लीडर ने कहा, इनके खिलाफ एफआईआर किसी ने नहीं कराई है, इसलिए इन्हें छोड़ दो, जबकि ऐनी शाहिदीन का कहना था कि ये लोग दंगे में शामिल थे।’ जानसठ के एसडीएम आर.सी. त्रिपाठी ने भी सियासी दखल को कुबूल करते हुए कहा, लीडर सियासी फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

फुगाना थाने के ऑफिसर आर.एस. भगौर छिपे हुए कैमरे से रिकॉर्ड किए गए विडियो में यह कुबूल करते दिखे कि आजम ने फोन कर कोई दखलअंदाजी नहीं करने को कहा था। भगौर ने यह भी कहा कि दंगाइयों के मुकाबले फोर्स काफी कम थी, कई हथियार मौके पर नहीं चले, बड़े अफसरों से राबिता नहीं हो पाया और सेक्युरिटी फोर्स देर से पहुंचे। फुगाना मे 8 सितंबर को सोलह कत्ल हुए थे।

एसएचओ मीरापुर ने कहा कि डीएम और एसएसपी को समाजवादी पार्टी के लीडर ने हटवाया, जबकि वे दोनों अच्छा काम कर रहे थे। एसएचओ भोपा समरपाल ने भी यही बात कही। उन्होंने कहा कि कवाल कांड के बाद डीएम-एसएसपी का तबादला गलत हुआ। अगर वे तीन-चार दिन तक और यहां पर तैनात रहते तो दंगा होता ही नहीं।

जिस वक्त न्यूज चैनल पर स्टिंग ऑपरेशन टेलिकास्ट हो रहा था, एक-एक करके ऑफिसर्स को लाइन हाजिर किया जा रहा था। सबसे पहले फुगाना के एसओ आर.एस. भगौर लाइन हाजिर किए गए। इस स्टिंग ऑपरेशन में एसओ भगौर, सीओ जोशी और एसडीएम त्रिपाठी के इलावा एसपी क्राइम कल्पना सक्सेना, एसएचओ भोपा समरपाल सिंह, एसओ शाहपुर सत्यप्रकाश सिंह, एसएचओ मीरापुर एके गौतम और बुढ़ाना से हटाए गए इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह भी नजर आए थे।

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