मुझे इंसाफ़ चाहिए , एक मज़लूम बाप की इल्तिजा

मुझे इंसाफ़ चाहिए , एक मज़लूम बाप की इल्तिजा
मुहल्ला मालापली निज़ामबाद के मुहम्मद अबदुलसत्तार ने एक मकतूब में बताया कि उनके फ़र्ज़ंद अबदूर्रज़्ज़ाक़ मसऊद जिसे 2000 ता 10 अक्टूबर 2012 तक मुख़्तलिफ़ दफ़आत बिशमोल पोटा के तहत दुबई से गिरफ़्तार किया गया और वहां से ईरान लेजाकर 4 साल तक क़ै

मुहल्ला मालापली निज़ामबाद के मुहम्मद अबदुलसत्तार ने एक मकतूब में बताया कि उनके फ़र्ज़ंद अबदूर्रज़्ज़ाक़ मसऊद जिसे 2000 ता 10 अक्टूबर 2012 तक मुख़्तलिफ़ दफ़आत बिशमोल पोटा के तहत दुबई से गिरफ़्तार किया गया और वहां से ईरान लेजाकर 4 साल तक क़ैद वबनद की सऊबतों में रखा गया मुख़्तलिफ़ नुमाइंदगियों के बाद ईरान के सिफ़ारतख़ाना की मदद से 2005 में हिंदुस्तान मुंतक़िल किया गया मेरे फ़र्ज़ंद को हैदराबाद लाने के बजाये दिल्ली में उतारकर 20 दिनों तक शदीद तकालीफ़ पहुंचाई गईं और कोरे काग़ज़ात पर दस्तख़त लेकर चर्लापली जेल में महरूस रखते हुए दिलसुखनगर केस में माख़ूज़ किया गया दो साल की तवील तरीन क़ानूनी कार्रवाइयों के बाद 2 लाख रुपये की ज़मानत पर रिहाई अमल में लाई गई और ये शर्त आइद की गई कि मेरा लड़का अबदूर्रज़्ज़ाक़ मसऊद हैदराबाद में क़ियाम पज़ीर रहे इस शर्त की वजहा से मुझे माहाना 15000 रुये का ख़र्च-ओ-ज़ाइद बर्दाश्त करना पड़ा इस दौरान पुलिस केस की वजहा से मेरे फ़र्ज़ंद को कहीं भी नौकरी करनेका मौक़ा नहीं मिला मुसलसिल आठ साल तक तमाम अख़राजात हम बावजूद ज़ईफ़ी के अदा करते रहे मज़ीद दो साल का अर्सा गुज़र गया इस तरह मुकम्मिल 10 साल का वक़्त गुज़र गया मज़कूरा बाला दस साला अर्सा में मेरे फ़र्ज़ंद अबदूर्रज़्ज़ाक़ मसऊद पर किसी किस्म का जुर्म साबित नहीं हुआ बगै़र मुक़द्दमा चलाते हुए पुलिस की हिरासत में मेरे फ़र्ज़ंद का ख़ुदकुशी के ज़रीये क़त्ल कर दिया गया और इंसाफ़ का ख़ून होगया पुलिस ने ख़ुदकुशी की तशहीर की 10 अक्टूबर 2012 को इत्तेला दी गई कि अबदूर्रज़्ज़ाक़ मसऊद ने फांसी ले ली है पंचनामा के वक़्त भी मुझे इत्तेला नहीं दी गई मेरी अपील है कि मेरे फ़र्ज़ंद के क़त्ल के वाक़िये की CBI से तहक़ीक़ात करवाई जाये या जूडीशल तहक़ीक़ात की जाये।

मेरे फ़र्ज़ंद के मसले में 50 लाख रुपये के अख़राजात हुए हैं जिस को में बावजूद पीरानासाली लोगों से क़र्ज़-ए-हसना हासिल क्या हूँ और मुझे ये क़र्ज़ अदा करना फ़र्ज़ है इन तमाम हालात को मधे नज़र रखते हुए अर्बाब इक़तिदार से नुमाइंदगी करते हुए मेरी मुसीबत को ख़त्म करने के लिए हुकूमत से इमदाद मंज़ूर करवाई जाये तो मेहरबानी होगी।

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