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मुतवफ़्फ़ी अफ़राद के नाम पर ज़ामिन रोज़गार स्कीम के फंड्स की इजराई

ओडिशा: मुतवफ़्फ़ी अफ़राद भी बक़ैद हयात हैं और ज़िले के बाज़ इलाक़ों में क़ौमी ज़ामिन रोज़गार स्कीम के तहत उजरतें हासिल कर रहे हैं। ज़िला ओहदेदारों ने बताया कि बाज़ अफ़राद जो कि इस दुनिया में नहीं रहे। उनके नाम सरकारी रजिस्टर में मौजूद हैं कि बैंक अकाउंटस से बाक़ायदा अपनी मज़दूरी की उजरतें हासिल कर रहे हैं।

ज़िला कलेक्टर धेरत सेनापति ने बताया कि ज़िला इंतेज़ामीया को ये रिपोर्ट मौसूल हुई है। मुतवफ़्फ़ी 3 अफ़राद भी क़ौमी ज़ामिन रोज़गार स्कीम से इस्तिफ़ादा कर रहे हैं जिस के बाद तहकीकात का हुक्म देदिया गया है। सरकारी ज़राए ने बताया कि बेनकशोर गाँव‌ का एक शख़्स ओपदर नाथ बहीरना के अकाउंट में एक माह की मज़दूरी 3000 रुपये जमा करवाई गई है जबकि उसकी मौत 12 अगस्त 2006 में होगई थी। इस्तिफ़ादा कुनुन्दगान में सिर्फ़ बहीरा का नाम ही नहीं बल्कि सैंकड़ों अफ़राद भी शामिल हैं जो इस दुनिया से चल बसे हैं।

ज़िला कलेक्टर ने बताया कि जिन लोगों ने सरकारी फ़ंड का ग़बन किया है, बाद तहकीकात ये रक़म बाज़याब करली जाएगी।

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