Wednesday , December 13 2017

मुबय्यना मुस्लिम दहश्तगरदों की रिहाई मुआमला पर अखिलेश हुकूमत की क़ानूनी मदद‌

रियासती एसेंबली के सामने 19 मई से गैर मुऐय‌ना मुद्दत धरने पर बैठे रियासती बंच के अरकान ने अखिलेश यादव हुकूमत की जानिब से मुबय्यना मुस्लिम दहश्तगरदों पर से मुक़द्दमात वापिस लेने के फैसले के ख़िलाफ़ इलहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बंच से हुक्म-

रियासती एसेंबली के सामने 19 मई से गैर मुऐय‌ना मुद्दत धरने पर बैठे रियासती बंच के अरकान ने अखिलेश यादव हुकूमत की जानिब से मुबय्यना मुस्लिम दहश्तगरदों पर से मुक़द्दमात वापिस लेने के फैसले के ख़िलाफ़ इलहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ बंच से हुक्म-ए-इमतिनाई ख़त्म कराने की क़ानूनी जंग अपनी शदीद बे इत्मीनानी का इज़हार किया है और कहा है कि इस से मुबय्यना मुस्लिम दहश्त गर्दूं की रिहाई के आसार तो बहुत कम और मुक़द्दमा मज़ीद पेचीदा होने का ख़तरा है।

रिहाई बंच के पेशर्फ्त‌ मुहम्मद शुऐब ऐडवोकेट ने कहा कि इस का बेहतरीन हल ये है कि हुकूमत निमेश कमीशन की सिफ़ारिशात को बुनियाद बनाकर उनके मुक़द्दमात की शुरू से जांच कराने की हिदायत की अदालत में दरख़ास्त गुज़ारे। याद रहे कि हाईकोर्ट ने 7 मार्च को अखिलेश यादव हुकूमत के मुबय्यना मुस्लिम दहश्तगरदों पर मुक़द्दमात वापिस उठाने के फैसले करना जायज़ गैर आईनी क़रार देते हुए इस फैसले पर अमल दरआमद पर रोक लगादी थी और मआमा हाईकोर्ट की कुल बंच को मुश्तइल(गुस्से में) करदिया था।

इलहाबाद हाईकोर्ट की सह रुकनी बंच जो जस्टिस डी पी सिंह और जस्टिस अश्वनी कुमार और जस्टिस अजय‌ लाम्बा पर मुश्तमिल थी ने जुमेरात को समाअत की और इस मुआमले पर मज़ीद समाअत केलिए 29 अगस्त मुक़र्रर की है। हाईकोर्ट ने रियासती हुकूमत से इस मुआमले में हल्फनामा दाख़िल करने मुल्ज़िमान की फेहरिस्त और निचली अदालत में चल रहे उन पर मुक़द्दमात की पेशरफ़्त की रिपोर्ट मांग‌ की है।

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