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मुलायम के बयान उलझन में मुसलमान

(हिसाम सिद्दीकी) समाजवादी पार्टी के सदर मुलायम सिंह यादव की जानिब से आडवानी और आरएसएस कुन्बे के दीगर लीडरान की तारीफों वाले बयानात बंद होेने का नाम नहीं ले रहे हैं तो उन्हीं पर सबसे ज्यादा भरोसा करने वाले उनके मजबूत हामियों यानी म

(हिसाम सिद्दीकी) समाजवादी पार्टी के सदर मुलायम सिंह यादव की जानिब से आडवानी और आरएसएस कुन्बे के दीगर लीडरान की तारीफों वाले बयानात बंद होेने का नाम नहीं ले रहे हैं तो उन्हीं पर सबसे ज्यादा भरोसा करने वाले उनके मजबूत हामियों यानी मुसलमानों की उलझनों में इजाफा भी होता जा रहा है।

किसी की समझ में नहीं आता कि आखिर मुलायम सिंह यादव की नजर में अचानक लालकृष्ण आडवानी जैसा शख्स बड़ा, कभी झूट ना बोलने वाला और अच्छे काम करने वाला लीडर कैसे बन गया अगर कांग्रेस जराए पर यकीन किया जाए तो मुलायम सिंह यादव की खुद उनकी अपनी लापरवाई के नतीजे में उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चल रहा उनकी आमदनी के मुकाबले ज्यादा जायदाद का मुकदमा खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है।

जिससे मुलायम सिंह यादव बहुत परेशान है लेकिन गुस्सा उतार रहे हैं कांग्रेस पार्टी और मनमोहन सिंह की सरकार पर। कांग्रेस के एक सीनियर लीडर और पेशे से वकील रहे लीडर ने जदीद मरकज़ के साथ बात करते हुए कहा कि आमदनी के मुकाबले ज्यादा जायदाद का मुकदमा मुलायम सिंह यादव और उनके कुन्बे के कुछ दीगर अफराद के खिलाफ दायर हुआ था। शुरू से ही इस मामले की पैरवी में उनकी जानिब से लापरवाई की गई।

अब मुकदमा इस स्टेज पर पहुंच चुका है कि सुप्रीम कोर्ट की जानिब से उसमें कोई भी सख्त से सख्त फैसला आ सकता है। गुजिश्ता दिसम्बर में ही सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने सीबीआई को फटकार लगाते हुए सख्त हिदायत दी थी कि वह मुलायम सिंह यादव, उनके वजीर-ए-आला अखिलेश यादव, उनके दूसरे बेटे और कुन्बे के दीगर लोगों के खिलाफ इस मामले में तहकीकात जारी रखे और स्टेट्स रिपोर्ट सरकार को सौंपने के बजाए सीद्दे सुप्रीम कोर्ट में पेश करें।

अदालत ने इसी मामले में अखिलेश यादव की बीवी और कन्नौज से लोकसभा मेम्बर डिम्पल यादव का नाम इस मुकदमें से निकालने का आर्डर भी दे दिया था। अपना नाम शाया ना करने की शर्त पर कांग्रेस लीडर ने कहा कि गुजिश्ता कुछ दिनों से मुलायम सिंह यादव जिस किस्म की बयानबाजी कर रहे हैं, कांग्रेस उसका सख्त जवाब दे सकती है लेकिन हम नहीं बोल रहे है क्योंकि हमें इस बात का बखूबी एहसास है कि गुजिश्ता नौ सालों से मुलायम सिंह यादव यूनाइटेड प्रोग्रेसिव एलाइंस (यूपीए) के भरोसेमंद साथी और हामी रहे हैं।

वह दो हजार चार से ही यूपीए से बाहर रह कर यूपीए सरकार की हिमायत कर रहे हैं। कांग्रेस के इस लीडर ने कहा कि अब अगर मुलायम सिंह यादव सुप्रीम कोर्ट के किसी फैसले से खौफजदा हैं तो वह अपनी लापरवाइयों की तमाम जिम्मेदारियां कांग्रेस पार्टी और यूपीए सरकार पर क्यों डाल रहे हैं? उन्होंने कहा कि उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि यूपीए सरकार और कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर मुलायम सिंह यादव के खिलाफ सीबीआई का इस्तेमाल नहीं कर सकती इसके बावजूद उन्होंने कह दिया कि सरकार के हजार हाथ होते हैं उससे लड़ना आसान नहीं है वह जेल भेज सकती है। सीबीआई लगा सकती है।

कांग्रेस लीडर का कहना था कि यूपीए सरकार ने तो जुलाई दो हजार आठ में ही सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर की थी कि सरकार मुलायम सिंह के खिलाफ चल रहा मुकदमा वापस लेना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट ने यह अर्जी खारिज करते हुए सीबीआई को हिदायत दी थी कि वह अपनी तहकीकात जारी रखे। ऐसी सूरत में सरकार क्या कर सकती है?

समाजवादी पार्टी चीफ मुलायम सिंह यादव ने तेइस मार्च को कहा कि उत्तर प्रदेश में बेईमानी और बदउनवानी फैली हुई है। यह बात उन्हें देश के एक सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवानी ने बताई है और आडवानी कभी झूट नहीं बोलते, फिर तीन अप्रैल को कह दिया कि आडवानी बड़े लीडर हैं, उन्होंने बहुत अच्छे काम किए हैं, अब अगर हमने उनकी तारीफ कर दी तो शोर क्यों मच रहा है।

वह यहीं नहीं रूके, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी बनाने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी की तारीफ की और साथ में दीन दयाल उपाध्याय की भी तारीफ की, फिर कहा कि वह तो जवाहर लाल नेहरू की भी तारीफ करते हैं। उनके इस बयान ने उनके मजबूत हामियों यानि मुसलमानों की उलझनों में इजाफा कर दिया है। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि आखिर उन्हें अचानक आडवानी एंड कम्पनी से इतनी हमदर्दी क्यों हो गई? श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल उपाध्याय ने तो भारतीय जनसंघ बनाकर मुल्क की फिरकापरस्त ताकतों को अकलियतों खुसूसन मुसलमानों के खिलाफ जहर उगलने का एक प्लेटफार्म फराहम किया था, रही बात देशभक्ति की तो उन जैसे देशभक्तों की तादाद मुल्क में हमेशा करोड़ों की तादाद में रही है।

मुलायम सिंह का यह कहना भी मुसलमानों और सेक्युलर जेहन हिन्दुओं के गले नहीं उतर रहा है कि लालकृष्ण आडवानी मुल्क के बड़े, सच्चे और अच्छे काम करने वाले लीडर हैं। आम मुसलमानों का कहना है कि बड़े लीडर मुलायम सिंह यादव तो है, बड़े लीडर जवाहर लाल नेहरू थे, जय प्रकाश नरायण और डाक्टर लोहिया थे, ऐसे ही सैकड़ों बड़े लीडर थे जो पूरे मुल्क को और मुल्क के हर तबके को साथ लेकर चलते थे। आडवानी बड़े कैसे हो सकते है जो सिर्फ हिन्दुत्व की राह पर चलें और हिन्दुओं में भी सिर्फ कट्टरपंथी हिन्दुओं को अपने साथ रख सकें।

आडवानी तकरीबन डेढ़ साल तक मुल्क के इंफारमेशन ब्राडकास्टिंग मिनिस्टर रहे, फिर छः साल तक मुल्क के होम मिनिस्टर और डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रहे। इन साढ़े सात सालों के दौरान उन्होंने कौन सा अच्छा काम किया कोई नहीं जानता। वह एक इंतहाई नाकाम होम मिनिस्टर साबित हुए। उनकी होम मिनिस्ट्री के दौरान दहशतगर्दों ने लाल किले पर हमला किया, जम्मू के और अहमदाबाद के स्वामी नारायण मंदिर पर हमला किया, इंडियन एयर लाइंस के तैय्यारे को अगवा करके जम्मू जेल में बंद मसूद अजहर जैसे खतरनाक दहशतगर्द और उसके साथियों को आजाद करा लिया। इंतहा तो तब हो गई जब दहशतगर्दों के नापाक कदम मुल्क की पार्लियामेंट तक पहुंच गए। आडवानी और उनके मातहत काम करने वाली खुफिया एजेंसियों को हिन्दुस्तान मुखालिफ दहशतगर्दों की साजिशों की भनक तक नहीं लगी क्या यही आडवानी के अच्छे काम हैं जिनका जिक्र मुलायम सिंह यादव ने किया है।

आडवानी ने सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली और फिर अपने साथियों के साथ अयोध्या में खड़े होकर छः दिसम्बर 1992 ( 06-12-1992) को बाबरी मस्जिद गिरवाई, उसी के बाद मुल्क में दहशतगर्दी का सिलसिला शुरू हुआ। यह बात खुद मुलायम सिंह यादव पहले कई बार कह चुके हैं। इन हकायक (तथ्यों) के बावजूद मुलायम सिंह यादव ने आडवानी को अच्छा काम करने वाला बताकर मुसलमानों को उलझन में डाल दिया है।

कांग्रेस जराए के मुताबिक कांग्रेस पार्टी और बीएसपी ने मुलायम सिंह यादव के इन बयानात की बुनियाद पर ही लोकसभा के एलक्शन के लिए बड़े पैमाने पर उर्दू जुबान (भाषा) में एलक्शन कम्पेन की तैयारी शुरू कर दी है। खबर यह भी है कि जुलाई के बाद कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर मुहिम छेड़कर मुलायम सिंह यादव को आडवानी और दूसरे आरएसएस लीडरान का दोस्त साबित करने की तैयारी में है। इस मुहिम में आडवानी की किताब की उन बातों का भी जिक्र होगा जो बातें आडवानी ने अपने और मुलायम सिंह यादव के दरमियान होना दर्ज किया है। मुलायम के पुराने साथी बेनी प्रसाद वर्मा ने उन बातों की तरफ अपनी प्रेस कांफ्रेंस में गुजिश्ता दिनों इशारा भी कर दिया था।

——-बशुक्रिया: जदीद मरकज़

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