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मुल्क् मआशी बोहरान के दहाना पर ? सनअती पैदावार मनफ़ी हो गई

नई दिल्ली, १३ दिसम्बर: ( पी टी आई ) एक दोहरी मुश्किल में मनफ़ी सनअती पैदावार और रुपय की क़दर में मुसलसल गिरावट के नतीजा में पहले ही सुस्त रवी का शिकार होती हिंदूस्तानी मईशत के लिए मुश्किलात पैदा होगई है और वज़ीर फ़ीनानस मिस्टर परनब मुक

नई दिल्ली, १३ दिसम्बर: ( पी टी आई ) एक दोहरी मुश्किल में मनफ़ी सनअती पैदावार और रुपय की क़दर में मुसलसल गिरावट के नतीजा में पहले ही सुस्त रवी का शिकार होती हिंदूस्तानी मईशत के लिए मुश्किलात पैदा होगई है और वज़ीर फ़ीनानस मिस्टर परनब मुकर्जी का कहना है कि इक़तिसादी ख़सारा को जुमला घरेलू पैदावार का 4.6 फ़ीसद तक महिदूद रखना एक संगीन चैलेंज होगा।

सनई पैदावार माह अक्टूर मैं मनफ़ी 5.1 फ़ीसद की शरह पर रही है जिस के नतीजा में स्टाक मार्केट्स में भी काफ़ी उथल पुथल रही और बंबई स्टाक एक्सचेंज के 30 शईरस 340 प्वाईंटस तक गिर गए । स्टाक मार्केट में इस गिरावट के नतीजा में सरमाया कारों के तक़रीबन 3 तीन लाख करोड़ रुपय का नुक़्सान हो गया है ।

रुपय की क़दर अब तक की सब से ज़्यादा कमी तक पहूंच गई है और अब एक डालर 52.84 रुपय का होगया है । अमेरीकी करंसी की तलब में भी इज़ाफ़ा होगया है क्योंकि ये अंदेशे लाहक़ होगए हैं कि सनअती हलक़ा की मनफ़ी तरक़्क़ी के पेशे नज़र बैरूनी कंपनीयां अपना सरमाया कम करने पर ग़ौर करसकती हैं।

रुपय की क़दर में कमी के नतीजा में दरआमदात की क़ीमत बढ़ जाएगी जिस के नतीजा में सनअती पैदावार मुतास्सिर हो सकती है ताहम ये सूरत-ए-हाल बरामदात करने वालों केलिए फ़ाइदाबख्श होसकती है क्योंकि रुपय की क़दर कम हो गई है ।

इस तरह की तशवीश के साथ मर्कज़ी वज़ीर फ़ीनानस मिस्टर परनब मुकर्जी ने आज राज्य सभा में कहा कि हुकूमत केलिए ये एक चलनज होगा कि वो इक़तिसादी ख़सारा को जुमला घरेलू पैदावार के 4.6 फ़ीसद तक महिदूद रखी।

मिस्टर मुकर्जी ने राज्य सभा में तसर्रुफ़ बिल पेश करते हुए कहा कि हुकूमत को 53,000 करोड़ के इज़ाफ़ी क़र्ज़ा जात हासिल करने पड़े ताकि रुकमी बहाव् को बरक़रार रखा जा सके ताहम इस का दबाॶ ज़रूर होगा और इस के आइन्दा वक़्तों में असरात भी मुरत्तिब हो सकते हैं अगर सूरत-ए-हाल को बेहतर बनाने के इक़दामात ना किए गए ।

सनअती पैदावार की मनफ़ी तरक़्क़ी और ग़िज़ाई अश्या की क़ीमतों में क़दरे कमी के बाद रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया की जानिब से अहम पालिसी शरहों में कमी भी की जा सकती है । इन शरहों में मार्च 2010 के बाद 13 मर्तबा इज़ाफ़ा किया गया था । माहिरीन का ख़्याल है कि 16 डसमबर को इक़तिसादी पालिसी के जायज़ा में ये तबदीलीयां होसकती हैं।

सनअती पैदावार के आदाद-ओ-शुमार को मायूसकुन क़रार देते हुए वज़ीर-ए-आज़म की मआशी मुशावरती कौंसल के सदर नशीन मिस्टर सी रंगा राजन ने कहा कि सनअती पैदावार में कम शरह से तरक़्क़ी की उम्मीद तो थी ताहम मनफ़ी तरक़्क़ी की उम्मीद क़तई नहीं थी ।

हुकूमत ने पहले ही सनअती पैदावार् की शरह तरक़्क़ी को साल 2011 – 12 के लिए कम करते हुए 7.25 – 7.75 फ़ीसद कर दिया है । साल गुज़शता ये शरह 8.5 फ़ीसद रही थी । मिस्टर रंगा राजन ने कहा कि हमें यक़ीनी तौर पर ऐसी सूरत-ए-हाल पैदा करने केलिए इक़दामात करने चाहिऐं जिस में सनअती तकरी ना सिर्फ मुसबत रहे बल्कि आली शरह से तरक़्क़ी करें।

मालीयाती पालिसी के ताल्लुक़ से मिस्टर रंगा राजन का कहना है कि रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया को चाहीए कि वो इफ़रात-ए-ज़र की शरह पर होने वाले असरात पर नज़ड़ रखे । अगर इफ़रात-ए-ज़र की शरहों में मुसलसल यक़ीनी गिरावट के इशारे मिलते हैं तो फिर पालिसी इक़दामात में तबदीली के ताल्लुक़ से ग़ौर किया जा सकता है ।

मौजूदा हालात और बिगड़ते हुए आदाद-ओ-शुमार को देखते हुए हुकूमत 19 दिसम्बर् को सनअती क़ाइदीन के साथ तबादला-ए-ख़्याल करेगी । मर्कज़ी वज़ीर बराए तिजारत-ओ-सनअत मिस्टर आनंद शर्मा हुकूमत । सनअत मुशावरत को यक़ीनी बनाईंगी। आज के आदाद-ओ-शुमार के बमूजब कानकनी शोबा में पैदावार में 7.2 फ़ीसद गिरावट अक्टूबर में आई में पैदावार 6 फ़ीसद कम हुई है ।

डाटा के मुताबिक़ सनईत पैदावार की शरह अप्रैल से अक्टूबर के दरमयान 3.5 फ़ीसद तक महिदूद होगई है जबकि गुज़शता साल इसी अर्सा में ये तनासुब 8.7 फ़ीसद रहा था। माह अक्टूबर में कैपीटल अश्या की पैदावार में 25.5 फ़ीसद गिरावट आई है । इस शोबा ने गुज़शता साल उस वक़्त में 21.1 फ़ीसद शरह से तरक़्क़ी की थी ।

मुल्क् के सनअती हलक़ों ने भी इस सूरत-ए-हाल पर अफ़सोस का इज़हार कर तिरे हुए उसे सनअती हलक़ों केलिए संगीन मायूसी क़रार दिया है । कन्फेडरेशन आफ़ इंडियन इंडस्ट्री ने शरह सूद में नरमी पैदा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है ।

सी आई आई के डायरैक्टर जनरल चन्द्र जीत बनर्जी ने कहा कि अगर इस मनफ़ी रुजहान को जारी रहने की इजाज़त दी जाय तो फिर इस के अवाम की ज़िंदगीयों और रोज़गार पर असरात मुरत्तिब होसकते हैं। उन्हों ने कहा कि रिज़र्व बैंक आफ़ इंडिया को चाहीए कि वो शरह सूद में कमी का अमल शुरू करी। कन्फेडरेशन का कहना है कि ये सूरत-ए-हाल सरमाया की कमी को ज़ाहिर करती है ।

एक और सनअती तंज़ीम फ़िक्की ने कहा कि ये वक़्त है कि हुकूमत सनअती हलक़ों में होने वाली सरमाया कारी केलिए मुराआत का ऐलान करे और इक़तिसादी इमदाद को बहाल करे । फ़िक्की का कहना है की शरह अब बोहरान की सतह तक गिर गई है और यही अंदेशे हैं कि आइन्दा वक़्तों में सूरत-ए-हाल मज़ीद अबतर हो जाएगी।

असोचम का कहना है गिरावट एक तशवीशनाक अमर है और वक़्त आगया है कि पालिसी को बेहतर बनाने के लिए इक़दामात किए जाएं।

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