Friday , November 24 2017
Home / Delhi News / मुल्क की ख़वातीन के लिए योम-ए-स्याह

मुल्क की ख़वातीन के लिए योम-ए-स्याह

नई दिल्ली: दिल्ली ख़वातीन कमीशन की सरबराह स्वाति मलीवाल ने आज 16 दिसम्ब‌र इजतिमाई इस्मत रेज़ि मुक़द्दमे के नाबालिग़ मुजरिम की रिहाई को नाकाम बनाने की लम्हा आख़िर तक की गई कोशिश में मायूसी को ख़वातीन के लिए योम-ए-स्याह से ताबीर किया।

उन्होंने कहा कि मुल्क को धोका दिया गया है और ये तास्सुर देने की कोशिश की गई कि एक नए क़ानून के ज़रिये सख़्त तरीन सज़ा-ए-को यक़ीनी बनाया जाये। लेकिन ये क़ानून अब भी राज्य सभा में ज़ेरे तसफ़ीया है। उन्होंने कहा कि ये मुल्क की तारीख़ में ख़वातीन के लिए योम-ए-स्याह है।

उन्हें यक़ीन है कि राज्य सभा ने इस क़ानून को मंज़ूर ना करते हुए मुल्क को धोका दिया है। अगर ऐसा ना किया जाता तो संगीन जराइम का इर्तिकाब करने वाले नाबालिग़ अफ़राद को भी सख़्त से सख़्त यक़ीनी हो सकती थी। दिल्ली कमीशन बराए ख़वातीन की सरबराह ने सुप्रीमकोर्ट के बाहर ज़राए अबलाग़ के नुमाइंदों से बातचीत करते हुए इन ख़्यालात का इज़हार किया।

उन्होंने जस्टिस ऐक्ट में तरमीमी बिल का हवाला दिया जो अभी तक राज्य सभा में ज़ेरे तसफ़ीया है। इस मुजव्वज़ा तरमीमी बिल के ज़रिये 16 ता 18 साल की उम्र के बच्चों को जो इंतेहाई संगीन जराइम में मुलव्विस हो सख़्त सज़ा-ए-यक़ीनी बनाई गई है। मलीवाल ने कहा कि जजस ने उनसे कहा कि वो उनकी तशवीश से ताल्लुक़-ए-ख़ातिर का इज़हार करते हैं लेकिन मौजूदा क़ानून में तबदीली की फ़िलहाल कोई गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने कहा अब वक़्त आ चुका है कि मोम-बत्तियों का जुलूस ख़त्म किया जाये और ख़वातीन को इन्साफ़ का मुतालिबा करते हुए मशाल उठा लेनी चाहिए। 16 दिसम्ब‌र इजतिमाई इस्मत रेज़ि मुक़द्दमे में मुलव्विस नाबालिग़ के तीन साल पूरे होते ही कल उसे रिहा किया जा रहा था और आख़िरी लम्हा में मलीवाल ने सुप्रीमकोर्ट से रुजू हो कर रिहाई पर हुक्म हासिल करने की कोशिश की लेकिन उन्हें नाकामी हुई थी।

TOPPOPULARRECENT