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मुसन्निफ़ीन के एवार्ड्स की वापसी पर एहतेजाज

नई दिल्ली: मुल्क में अदम तहम्मुल के माहौल पर मुसन्निफ़ीन की जानिब से एवार्ड्स की वापसी के ऐलान के ख़िलाफ़ बरहमी का इज़हार करते हुए सिख़‌ एहतेजाजियों के एक ग्रुप ने 1984 में मुख़ालिफ़ सिख फ़सादाद पर अदीबों की ख़ामोशी पर सवालात उठाते हुए किताबों को जला दिया।

इस एहतेजाज की क़ियादत गुरूचरण सिंह बाबर ने की थी जिन्होंने 1984 के फ़सादात‌ पर बउनवान सरकारी क़त्ल-ए-आम एक किताब कलमबंद की थी ने आज यहां जंतर मंतर पर इस किताब की 50कापियां जला दें ताकि 1984 के फ़सादात‌ केसेस में इन्साफ़ की फ़राहमी में ताख़ीर के ख़िलाफ़ अपना एहतेजाज दर्ज करवाया जाये।

इस मौक़े पर गुरूचरण सिंह बाबर ने कहा कि मुल्क भर में अदम रवादारी की फ़िज़ा के ख़िलाफ़ जन अदीबों ने एवार्ड्स वापिस किए हैं उनसे मेनिया पूछना चाहता हूँ कि गुज़िशता 2साल से कहाँ थे और 1984 के फ़सादात‌ के वक़्त इस तरह का एहतेजाज और ग़म-ओ-ग़ुस्सा क्यों नहीं किया गया जबकि आज तक फ़सादात‌ के मुतास्सिरीन इन्साफ़ से महरूम हैं।

1984 के फ़सादात पर मिस्टर बाबर की तसनीफ़ 4ज़बानों हिन्दी, अंग्रेज़ी, पंजाबी और उर्दू में शाय की गई ने कहा कि फ़राहमी इन्साफ़ में ताख़ीर ने अदालत का वक़ार मजरूह होगा। हम आज के प्रोग्राम के पेश-ए-नज़र हुकूमत से बैन-उल-अक़वामी ख़ातियों का जायज़ा लिया जाएगा।

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