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मुसलमानों का लंदन गूगल हेडक्वार्टर के रूबरू एहतिजाज

गुस्ताखाना ( इस्लाम विरोधी) फ़िल्म के ख़िलाफ़ हज़ारों मुसलमानों ने गूगल के लंदन में वाक़्य ( स्थित/ मौजूद) हेडक्वार्टर के रूबरू ( सामने) ज़बरदस्त एहतिजाजी मुज़ाहिरा करते हुए इस फ़िल्म को यू ट्यूब से हज़फ़ ( अलग) करने का मुतालिबा ( मांग) किय

गुस्ताखाना ( इस्लाम विरोधी) फ़िल्म के ख़िलाफ़ हज़ारों मुसलमानों ने गूगल के लंदन में वाक़्य ( स्थित/ मौजूद) हेडक्वार्टर के रूबरू ( सामने) ज़बरदस्त एहतिजाजी मुज़ाहिरा करते हुए इस फ़िल्म को यू ट्यूब से हज़फ़ ( अलग) करने का मुतालिबा ( मांग) किया ।

उन्होंने कहा कि मुसलमानों के मज़हबी जज़बात (धार्मिक भावनाओं) को मजरूह ( जख्मी/ ठेस पहुँचाने वाली) करने वाली इस फ़िल्म के क्लिप फ़ौरी ( फौरन) इंटरनेट और मरबूत ( इससे जुड़ी हुई) साईट्स से हटा दीए जाएं । मुसलमानों की कसीर ( ज्यादा) तादाद जैसे ही गूगल हेडक्वार्टर दफ़्तर के रूबरू ( सामने) जमा हो गई सिक्योरिटी हुक्काम भी वहां पहुँच गए ।

एहितजाजी बैनर्स थामे हुए थे जिस में वाज़िह तौर पर ये लिखा था कि रसूल अकरम ( स०अ०व०) की मुहब्बत में हम अपनी जान निछावर ( न्योछावर) करने तैयार हैंऔर रसूल ( स०अ०व०) ही इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी के बानी (शुरूआत करने वाला) हैं । इस प्रोग्राम के मुंतज़िम (प्रबंधक/ इंतेज़ाम करने वाले) मसऊद आलम ने कहा कि हमारा आइन्दा लायेहा-ए-अमल ये होगा कि दुनिया भर में गूगल और यू ट्यूब के दफ़ातिर ( दफ्तरों) के रूबरू ( सामने) एहतिजाज ( प्रदर्शन) मुनज़्ज़म ( आयोजित) किया जाय ।

उन्होंने कहा कि इस फ़िल्म पर इमतिना आइद (प्रतिबंध लगाने के लिए) किए जाने तक मुनज़्ज़म ( क्रमबद्व/बातर्तीब) अंदाज़ में एहतिजाज जारी रहेगा क्योंकि ये फ़िल्म इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी नहीं हो सकती । उन्होंने कहा कि इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी की भी एक हद होती है और हम पैग़ंबर स०अ०व० की शान में गुस्ताख़ी को क़तई ( हर्गिज़) बर्दाश्त नहीं कर सकते ।

बर्तानिया के मुख़्तलिफ़ ( अलग अलग) हिस्सों से हज़ारों की तादाद में मुसलमानों ने इस एहतिजाजी प्रोग्राम में हिस्सा लिया । इस मौक़ा पर अइम्मा इकराम ( सम्मानित लोगो) ने अरबी उर्दू और अंग्रेज़ी में ख़िताब किया और कहा कि हुब नबवीए के बगै़र ईमान मुकम्मल नहीं हो सकता ।
आप ( स०अ०व०) की शान में गुस्ताख़ी किसी सूरत हमारे लिए नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त हैं। शेख़ फ़ैज़ अल ख़तब सिद्दीक़ी ने कहा कि दहशतगर्दी सिर्फ इंसानों को हलाक करना नहीं बल्कि इंसानी जज़बात (भावनाओं) को मजरूह ( ठेस पहुँचाने) और उसे हलाक करना भी दहशतगर्दी है ।

इस गुस्ताख ने इहानत अंगेज़ (अपमान और पीड़ाजनक) फ़िल्म तैयार करते हुए 1.6बिलीयन अवाम के जज़बात को ठेस पहुंचाई है । उन्होंने कहा कि गूगल जैसे इदारे ( संस्थान) को भी ज़िम्मा दाराना रोल अदा करना चाहीए और वो उसे महिज़ ( सिर्फ) इज़हार-ए-ख़्याल की आज़ादी क़रार देते हुए अपनी ज़िम्मेदारीयों से फ़रार इख़तियार नहीं कर सकता ।

उन्होंने कहा कि इस मुहिम ( योजना) में चर्च आफ़ इंगलैंड कैथोलिक यहूदी ग्रुप्स ट्रेड यूनियनों यहां तक कि क़दामत पसंदों को भी शामिल किया जाएगा । हम चाहते हैं कि ये वाज़िह ( स्पष्ट) किया जाय कि बाअज़ लोग आलमी ( दुनियावी) समाज को मुंतशिर ( अलग) करना चाहते हैं ।

ऐसे लोगों की शनाख़्त करते हुए उन्हें क़रार-ए-वाक़ई ( जरूर) सज़ा दी जानी चाहीए । इस दौरान यू ट्यूब के तर्जुमान ( Spokesperson) ने कहा कि हम एक ऐसी कम्यूनिटी तैयार करने के लिए सख़्त मेहनत कर रहे हैं जहां हर शख़्स को अपनी राय के इज़हार की आज़ादी मिले।

ये एक चैलेंज है क्योंकि एक मुल्क में जिस बात की इजाज़त है वही बात किसी दूसरे मुल्क में जुर्म बन जाती है । तर्जुमान ने अपनी हट धर्मी बरक़रार रखते हुए कहा कि ये फ़िल्म हमारी रहनुमा ( मार्गदर्शक) या ना ख़ुतूत के दायरे कार में आती है और यू ट्यूब पर बरक़रार रहेगी ।

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