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मुसलमानों की ईमानी ताक़त के आगे हर फ़ित्ना ज़ाइल होगा

हैदराबाद 18 जनवरी: क़ियामत के क़रीब एसे एसे फ़ित्ने रोनुमा होंगे जिसको सुनकर और वो अफ़राद जो इन फ़ित्नों को जन्म दे रहे हैं उन्हें देखकर मासूम मुस्लमान हैरान-ओ-परेशान हो जाऐंगे। और उन मासूम मुसलमानों को वो हर तरह से अपने शिकंजे मैं किस लेंगे। वो बज़ाहिर देखने में मासूम नज़र आएँगे। लेकिन वही उन फ़ित्नों से महफ़ूज़ रह सकेंगे जिनका ईमान-ओ-यक़ीन अल्लाह और इस के आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद(सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)पर होगा।

कादयानी से ज़्यादा ताक़तवर एक और फ़ित्ना शकील बिन हनीफ़ के नाम पर मंज़र-ए-आम पर आया है। जिसमें शामिल अफ़राद नौजवानों को गुमराह कर रहे हैं दीन इस्लाम से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। बज़ाहिर देखने उनके चेहरे बड़े मासूम नज़र आते हैं और वो अपना निशाना देहातों और अज़ला के शहरों को बनाते और बाद में उन्होंने शहर के नवाही इलाक़ों और अंदरून शहर में बनाना शुरू किया है। उनके सरगर्मीयों से मुस्लमान होशयार रहें और नज़र रखें। एसा महसूस होता है कि फ़ित्ना क़ादियानियत से ज़्यादा शकील बिन हनीफ़ का फ़ित्ना बड़ा ताक़तवर है। ये बात तए है कि मुस्लमान सब कुछ बर्दाश्त करसकता है लेकिन वो दीन पर वर पैग़ंबर इस्लाम और अनबया अलैहिस्सलाम की शान में किसी किस्म की गुस्ताख़ी बर्दाश्त नहीं करता।

इन ख़्यालात का इज़हार मुक़र्ररीन ने मस्जिदे अज़ीज़िया (मह्दी पटनम)में रद्द फ़ित्ना शकील बिन हनीफ़ के मौज़ू पर मुसलमानों के एक बड़े इजतेमा से ख़िताब करते हुए किया।जलसे में इस बात का फ़ैसला किया गया कि नौजवान क़ुरआन हदीस और नबी करीम करीम (सल्लललाहु अलैहि वसल्लम)की सीरत का मुताला करें और इस को अपनी ज़िंदगी में अपनाते हुए तै करें हमारा मरना और जीना

मौलाना अरशद अली क़ासिमी मोतमिद मजलिस तहफ़्फ़ुज़ ख़त्म नबुव्वत ने रद्द फ़ित्ना शकील बिन हनीफ़ और क़ादियानियत और दुसरे फ़ित्नों पर तफ़सीली रोशनी डाली और कहा कि एसे फ़ित्ने हरवक़त-ओ-हर ज़माने में ज़ोर पकड़ते रहते हैं अब एक और फ़ित्ना शकील बिन हनीफ़ नाम का सर उठा रहा है।

इस को दबा दिया जाना चाहीए। इस के मक़ासिद नापाक हैं लेकिन हमें अल्लाह की ज़ात से उम्मीद है कि जब तक मुस्लमान इत्तेहाद का मुज़ाहरा करेंगे तो ये फ़ित्ना क्या एसी कई साज़िशें मुसलमानों का कुछ बिगाड़ ना सकेंगी।

इस्लाम पर होगा तो तब एसे फ़ित्नों को मलियामेट किया जा सकता है।

 

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