Wednesday , September 26 2018

मुसलमानों की एकजुटता से कांग्रेस में आ रही है जान, पार्टी लगातार हो रही है मजबूत!

कभी गिरिडीह में कोंग्रेस की तूती बोलती थी, लेकिन पिछले 2 दशक से कांग्रेस चुनावी मैदान में पिटते-पिटते कोमा में चली गयी। भगवाधारियों ने गिरिडीह को कांग्रेस मुक्त बना दिया था, लेकिन इस बार नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने खूब दम खम से चुनाव लड़ा। मुस्लिम गोलबंदी ने कांग्रेस में जान फूंक दी। इसका असर धरातल पर देखने को मिला।

दरअसल इस बार कांग्रेस ने मुस्लिम समाज में दबंग छवि के मो. इश्तियाक उर्फ लालो को डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव मैदान में उतारा था।लालो ने पूर्व में भी नगर निगम का चुनाव लड़ कर सम्मानजनक वोट बटोरा था। इस बार कांग्रेस ने उस पर दांव खेला तो मामला जम गया।

अन्य प्रत्याशियों भृकुटि तन गई। खास कर मुस्लिम वोट पर अपना अधिकार जताने वाला राजद, जेएमएम, जेवीएम सरीखे दलों को इससे बड़ा झटका लगा। चुनाव पूर्व लालो को मुस्लिम समाज का भरपूर समर्थन मिला।

हालांकि कई आपराधिक कांडों के आरोपी रहने की वजह से मुसलमानों में भी बुद्धिजीवी तबका इनसे अलग थलग रहा। फिर भी जिस तादाद में इनके साथ भीड़ निकली उससे निश्चित रूप से कांग्रेस को नयी ऊर्जा मिली है। खोई हुई जमीन को पुनः पाने की आस भी साथ ही जगी है।

गौरतलब है कि पूर्व में लंबे समय तक गिरिडीह की अधिकांश विधानसभा व दोनों लोकसभा सीटों पर कोंग्रेस का कब्जा था। लेकिन बदलते वक्त और हालात नें कांग्रेस को हाशिये पर ला खड़ा कर दिया था।

लेकिन इस बार यहां के कॉंग्रेसियों में उत्साह का संचार हुआ है।उम्मीद की किरण दिखी है।बहरहाल,जीत हार तो अपनी जगह है।लेकिन इस चुनाव के बहाने कांग्रेस ने फिर से एक नई पारी की शुरूआत कर दी है।

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