मुसलमानों की हर हरकत पर आर एस एस की नज़र, मुस्लिम मुआशरा खटक रहा है

मुसलमानों की हर हरकत पर आर एस एस की नज़र, मुस्लिम मुआशरा खटक रहा है
आर एस ऐस मुस्लिम समाज को तरक़्क़ी से हमकनार करने वाले और उन्हें तरक़्क़ी की राह पर गामज़न करने वाले इदारों पर नज़र रखे हुए है। इस ख़सूस में आर एस एस के नज़रियात के फ़रोग़ के लिए सरगर्म तंज़ीम ने इदारा सियासत पर ख़ुसूसी नज़र रखी हुई है अज़ीमु

आर एस ऐस मुस्लिम समाज को तरक़्क़ी से हमकनार करने वाले और उन्हें तरक़्क़ी की राह पर गामज़न करने वाले इदारों पर नज़र रखे हुए है। इस ख़सूस में आर एस एस के नज़रियात के फ़रोग़ के लिए सरगर्म तंज़ीम ने इदारा सियासत पर ख़ुसूसी नज़र रखी हुई है अज़ीमुलक भर के 15 उर्दू रोज़नामे भी उसकी फ़हरिस्त में शामिल हैं।

हिंदुस्तान भर में हर तबक़ा इस बात से वाक़िफ़ हैके आर एस एस अपने नज़रिये के फ़रोग़ और मुस्लिम दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी सतह पर काम करती है और इस बात को मुस्लिम क़ाइदीन बारहा दुहराते रहते हैं लेकिन इस के बावजूद चौकसी इख़तियार करने से क़ासिर रहे और अब आर एस एस की ज़हनीयत हिंदुस्तान की नज़रिया साज़ तंज़ीम-ओ-पालिसी फ़ैसलों पर असरअंदाज़ होने वाली तंज़ीम के तौर पर फ़रोग़ हासिल करने की कोशिश कररही है।

इंडिया पालिसी फाउंडेशन (www.indiapolicyfoundation.org) के नाम से दिल्ली से चलाई जा रही एक ग़ैर सरकारी तंज़ीम की नज़रें मुसलमानों की हर हरकत पर है और उन्हें फ़ायदा पहुंचाने वाले स्कीमात , मुसलमानों की आवाज़ उठाने वाले उर्दू अख़बारात भी अब इन का निशाना बने हुए हैं।

ज़ाफ़रानी क़ुव्वतें सिर्फ़ सियासी क़ुव्वत की बिना पर इस मुक़ाम पर नहीं हैं बल्कि आर एस एस का ये नज़रिया हर महाज़ पर काम कररहा है और ग़ैर सरकारी तंज़ीमों, सियासी तंज़ीम और दुसरे तंज़ीमों को साथ लेते हुए अपने नज़रियात को फ़रोग़ देने के लिए मुनाफ़िरत भी फैला रहा है और हम सिर्फ़ सियासी मुफ़ादात के लिए मुनाफ़िरत के ज़रीये ताक़त में इज़ाफ़ा कररहे हैं मगर अंदरूनी एतेबार से हम खोखले होते जा रहे हैं इस बात पर ग़ौर करने की ज़रूरत है।

हिंदुस्तान में इसराईली तर्ज़ कारकर्दगी और मुस्लिम दुश्मनी के ज़रीये अपने मुफ़ादात की तकमील का ख़ाब देखने वाले मुट्ठी भर अफ़राद जो कि दरहक़ीक़त मुल्क के मुफ़ादात के हक़ीक़ी दुश्मन हैं वो अब मुल्क को नज़रिया देने की बात करने लगे हैं। हिंदुस्तान में ज़ाफ़रानी ताक़त को इक़तिदार हासिल होने के बाद पैदा शूदा सूरत-ए-हाल में इस तरह की तंज़ीमों की सरगर्मीयों में इज़ाफ़ा मुल्क के मुफ़ाद में नहीं है बल्कि ये तंज़ीमें मुनाफ़िरत फैलाने का सबब बन सकती हैं।

इंडिया पालिसी फाउंडेशन की तरफ से मुस्लिम मुआशरे की तरक़्क़ी के लिए किए जाने वाले तमाम उमूर-ओ-इक़दामात पर नज़र रखी जा रही है। इतना ही नहीं ये तंज़ीम उर्दू अख़बारात में शाय होने वाले ईदारीए और ख़बरों के ज़रीये अख़बार की तरफ से उठाए जाने वाले मुस्लिम मसाइल के तर्जुमा अपने 15 रोज़ा शुमारे में शाय करते हुए ये तास्सुर देने की कोशिश कररही हैके उर्दू ज़बान के अख़बारात-ओ-जराइद मुल्क से ज़्यादा मुसलमानों के मसाइल के मुताल्लिक़ आवाज़ उठाते हैं।

इस तंज़ीम के सदर नशीन प्रोफेसर कपिल कपूर हैं जबकि डायरेक्टर प्रोफेसर राकेश सिन्हा हैं और उनके आर एस एस नज़रियात सब पर वाज़िह हैं। तंज़ीम की तरफ से नज़रियात के फ़रोग़ के लिए वर्कशॉप, सेमीनार और बातचीत की नशिस्तें रखी जाती हैं इन नशिस्तों में इस बात का जायज़ा लिया जाता हैके मुल्क में मुस्लिम तबक़ा कैसे तरक़्क़ी कररहा है और हुकूमत की तरफ से मुस्लिम तबक़ा के लिए मख़सूस स्कीमात के नुक़्सान क्या हैं।

इस तंज़ीम के 15 रोज़ा शुमारे में रोज़नामा सियासत में शाय मुसलमानों से मुताल्लिक़ ख़बरें और हुकूमत की तरफ से सलवा फ़ातिमा को पायलट बनने के लिए ख़ुसूसी तौर पर 35 लाख रुपये की रक़म मंज़ूर किए जाने की ख़बरों का तर्जुमा शामिल है।

इतना ही नहीं इस तंज़ीम के पैनल स्पीकरस में मुरली मनोहर जोशी , राजनाथ सिंह, प्रोफेसर एस एन बाला गंगा धर, डॉ कृष्णा गोपाल के अलावा दुसरे शामिल रह चुके हैं।

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