मुसलमानों के हक़ की लड़ाई के लिए पूरी दुनिया में मिसाल बनी मुनीरा अहमद

मुसलमानों के हक़ की लड़ाई के लिए पूरी दुनिया में मिसाल बनी मुनीरा अहमद
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अमेरिका में बांग्लादेश मूल की लड़की मुनीरा अहमद मुसलमानों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए पूरी दुनिया में मिसाल बन चुकी है। डोनाल्ड ट्रंप के विरोध में जो रैली निकाली गई उसकी सबसे चर्चित हस्ती मुनीरा ही थी। उनकी तस्वीर की भी सबसे ज्यादा चर्चा हुई। मुनीरा की इस तस्वीर को पूरी दुनिया के मुसलमान शेयर कर रहे हैं। अमेरिका के कई समाचार पत्रों ने इस तस्वीर को प्रकाशित किया है। दस साल पहले मुनीरा जब हाई स्कूल की छात्रा थी तब उसने न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के समक्ष फोटो खिंचवाई थी जो आज चर्चा में है। फोटोग्राफर रिद्वान अधामि ने इस फोटो को अपने कैमरे में कैद किया था।

 

आज 32 वर्षीय बांग्लादेशी मूल के अमेरिकी इंटरप्रेटर मुनीरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का विरोध कर रहे लोगों के लिए पोस्टर बॉय बन गई है। अमेरिकी मुस्लिम मुद्दों को कवर करने वाली एक स्वतंत्र पत्रिका के लिए फोटो शूट के दौरान उन्होंने अपने उसी फोटो के साथ पोज़ दिया। इस तस्वीर में मुनीरा ने अमरीका के झंडे स्टार और स्ट्राइप को हिजाब के रूप में पहन रखा है और वे एक अमरीकी मुस्लिम दिख रही हैं।

 

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अमरीका में रहने वाले लाखों अप्रवासी लोग डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का विरोध कर रहे हैं। 32 साल की मुनीरा अहमद ट्रंप की सरकार और नीतियों का विरोध करने वाली सबसे लोकप्रिय महिला हैं। मुनीरा कहती हैं मैं एक अमरीकी हूं और सच्ची मुसलमान भी हूं। मुझे इन दोनों ही बातों पर गर्व है। एक गैर लाभ वाले एम्पलीफायर फाउंडेशन के लोग नए पोस्टर को लेकर अभियान चलाएंगे।

 

मुनीरा अहमद ने सीएनएन को बताया कि उसके इस चेहरे के बारे में मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं जो आंदोलन का पर्याय बन रहा है। उद्घाटन दिवस पर मुनीरा भी अहमद वाशिंगटन डीसी में प्रदर्शन किया। यह पहली बार हकीकत में देखने को मिला कि लोग उसकी फोटो के साथ तख्तियों को ले जा रहे थे। मेरी ओर आने वाली महिलाओं के समूह को देखा जो इस फोटो को लिए आ रहे थे, यह ख़ुशी का पल था।

 

इस तस्वीर को शेपर्ड फैरे ने बनाया है जिन्होंने अमरीका के 44वें राष्ट्रपति बराक ओबामा का पोट्रेट बनाया था। तस्वीर का एक दूसरा पहलू यह है कि यह तस्वीर एक दशक पुरानी है। इसे अमरीका में हुए 9/11 के आतंकी हमले के बाद खींचा गया था। इसका मकसद था अमरीका में मुसलमानों को एक मार्मिक संदेश देना। मुनीरा बताती हैं कि ट्रंप के खिलाफ रैली में इसका बड़ा पोर्टेट बनाया गया जिसे सभी ने पसंद किया और अब इसका पोर्टेट सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है।

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