Wednesday , December 13 2017

मुसलमानों को बैत-उल-मुक़द्दस की बाज़याबी से जज़बाती वाबस्तगी

मुफ़्ती आज़म फ़लस्तीन मुहम्मद ए एम हुसैन ने हिंदूस्तान और आलमी बिरादरी से अपील की के वो फ़लस्तीनी काज़ की ताईद करें और फ़लस्तीनीयों पर इसराईल के मज़ालिम के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाईं।

मुफ़्ती आज़म फ़लस्तीन मुहम्मद ए एम हुसैन ने हिंदूस्तान और आलमी बिरादरी से अपील की के वो फ़लस्तीनी काज़ की ताईद करें और फ़लस्तीनीयों पर इसराईल के मज़ालिम के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाईं।

मुफ़्ती आज़म फ़लस्तीन जो इन दिनों हैदराबाद के दौरे पर हैं, एक प्रेस कांफ्रेंस से ख़िताब कररहे थे। उनके साथ हिंदुस्तान में फ़लस्तीन के सफ़ीर हज़ एक़्सिलेंसी शाबान हुस्न सादिक़ और डिप्टी हाई कमिशनर फ़तह और रुकने पार्लियामेंट फ़लस्तीन अबदुल्लाह मौजूद थे।

इन तीनों फ़लस्तीनी क़ाइदीन ने हिंदुस्तान की नई हुकूमत से उमीद ज़ाहिर की हैके वो फ़लस्तीन के साथ अपने रिवायती दोस्ताना ताल्लुक़ात को बरक़रार रखेगी और जिस तरह हिंदुस्तान ने हमेशा फ़लस्तीनी अवाम की ताईद की है इसी तरह एन डी ए हुकूमत भी आज़ाद फ़लस्तीन ममलकत के क़ियाम के मुतालिबा की ताईद करेगी।

मुफ़्ती-ए-आज़म फ़लस्तीन ने हिंदुस्तान के मौक़िफ़ की सताइश करते हुए कहा कि पिछ्ले कई दहों से हिंदुस्तानी अवाम फ़लस्तीनी काज़ की ताईद कररहे हैं और फ़लस्तीनी अवाम के लिए हिंदुस्तान की ताईद एहमीयत की हामिल है। उन्होंने कहा कि फ़लस्तीनी अवाम आज़ादी के ख़ाहां हैं और वो चाहते हैं कि यरूशलम के सदर मुक़ाम के साथ ममलकत फ़लस्तीन तशकील दी जाये।

मुफ़्ती-ए-आज़म फ़लस्तीन ने कहा कि यरूशलम के बगै़र फ़लस्तीन का तसव्वुर मुकम्मिल नहीं होसकता। उन्होंने कहा कि बैत-उल-मुक़द्दस मुसलमानें के लिए तीसरा मुक़द्दस और मज़हबी मुक़ाम की हैसियत रखता है। मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा के बाद बैत-उल-मुक़द्दस बाइस तकरीम है जो कि मुसलमानों का क़िबला अव्वल भी है।

एकता ए आलम के मुसलमानों को बैत-उल-मुक़द्दस की बाज़याबी से जज़बाती लगाओ है और इस काज़ के सिलसिले में फ़लस्तीनी अवाम को दुनिया भर की ताईद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि मुसीबत की इस घड़ी में हिंदुस्तानी अवाम को फ़लस्तीनी अवाम के साथ शाना बह शाना इज़हार-ए-यगानगत करना चाहीए। उन्होंने कहा कि इसराईल अपनी बरबरीयत के ज़रीये ना सिर्फ़ फ़लस्तीनीयों पर मज़ालिम ढह रहा है बल्कि इंसानी हुक़ूक़ की ख़िलाफ़वरज़ी का मुर्तक़िब है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में इंसानी हुक़ूक़ के अलंबरदारों को चाहीए कि वो इसराईल पर इंसानी हुक़ूक़ के तहफ़्फ़ुज़ के सिलसिले में दबाव‌ डालें। उन्होंने इसराईल के मज़ालिम के सबब फ़लस्तीनी अवाम की सूरत-ए-हाल का तज़किरा किया और कहा कि मसाइब-ओ-आलाम के बावजूद फ़लस्तीनी अवाम आज़ादी की जद्द-ओ-जहद में मसरूफ़ हैं,

उन्होंने कभी भी इसराईल के मज़ालिम की परवाह नहीं की। डिप्टी हाई कमिशनर फ़तह और फ़लस्तीनी पार्लियामेंट के रुकन अबदुल्लाह अबदुल्लाह ने कहा कि 1967 में फ़लस्तीन पर इसराईली जारहीयत और नाजायज़ क़बजे के बाद से आज तक फ़लस्तीनीयों पर मज़ालिम का सिलसिला जारी है। 5300 फ़लस्तीनी अवाम इसराईल की जेलों में क़ैद हैं और इन में से कई पिछ्ले 58 दिन से भूक हड़ताल पर हैं। हुकूमत इसराईल से मुतालिबा किया गया कि वो इन क़ैदीयों को अदालत में पेश करते हुए उनके जुर्म को साबित करे लेकिन इसराईली हुकूमत उन्हें अदालत में पेश करने से गुरेज़ कररही है जो इंसानी हुक़ूक़ और इंसाफ़ की ख़िलाफ़वरज़ी है।

उन्होंने कहा कि दुनिया भर की इंसानी हुक़ूक़ और क़ियाम अमन में दिलचस्पी रखने वाली ताक़तों को चाहीए कि वो इसराईल की जारहीयत के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करें।

उन्होंने कहा कि इसराईली हुक्काम मक़बूज़ा इलाक़ों के नामों को यहूदी तर्ज़ पर रखने की कोशिश कररहे हैं और कई इलाक़ों के नाम तबदील करदिए गए। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान ग़ैर जांबदार तहरीक के बानीयों में शामिल है और इस एतेबार से इस पर भारी ज़िम्मेदारी आइद होती है कि वो फ़लस्तीनी अवाम को इंसाफ़ की फ़राहमी की जद्द-ओ-जहद करे।

एक सवाल के जवाब में अबदुल्लाह अबदुल्लाह ने कहा कि हिंदुस्तान में बी जे पी की कामयाबी के बाद फ़लस्तीन के सदर महमूद अब्बास ने नरेंद्र मोदी को मुबारकबाद पेश की और एक पयाम भी रवाना किया। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान और फ़लस्तीन के ताल्लुक़ात काफ़ी मुस्तहकम हैं और उन्हें उम्मीद है कि मौजूदा नरेंद्र मोदी हुकूमत भी इस रिवायत को बरक़रार रखेगी।

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन सिर्फ़ मुसलमानों या आलम अरब का मसला नहीं है बल्कि ये एक आलमी मसला है। अमरीका के बिशमोल आलमी ताक़तों को चाहीए कि वो इसराईली मुफ़ादात के तहफ़्फ़ुज़ के बजाये उसूल और इंसाफ़ पर मबनी फ़लस्तीनी जद्द-ओ-जहद की ताईद करें। सूडान के सफ़ीर हज़ एक़्सिलेंसी शाबान हुस्न सादिक़ ने फ़लस्तीनी काज़ की ताईद का एलान करते हुए कहा कि फ़लस्तीन फ़िलवक़्त दुनिया भर में एक संगीन मसला बन चुका है और आलमी ताक़तों को इस मसले की यकसूई पर तवज्जा दीनी होगी।

उन्होंने कहा कि ना वाबस्ता तहरीक के वक़्त हिंदुस्तान के साथ साथ सूडान ने भी अहम रोल अदा किया। उन्होंने कहा कि इसराईली मज़ालिम की रोक थाम और मक़बूज़ा इलाक़ों से तख़लिया के सिलसिले में फ़ौरी इक़दामात की ज़रूरत है।

सदर नशीन इंडो अरब लेग सय्यद विक़ारुद्दीन कादरी ऐडीटर रहनमाए दक्कन ने बताया कि इंडो अरब लेग 1967 से फ़लस्तीनी काज़ की ताईद में जद्द-ओ-जहद कररही है।

उन्होंने बताया कि जारीया साल नवंबर में हैदराबाद में अल-क़ूदस आलमी कांफ्रेंस मुनाक़िद की जाएगी जिस में वज़ीर-ए-आज़म नरेंद्र मोदी के अलावा दुनिया भर की अहम शख़्सियतों को मदऊ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन के सदर महमूद अब्बास से भी उन्होंने ख़ाहिश की हैके वो हैदराबाद का दौरा करें। तवक़्क़ो की जा रही हैके वो अपने आइन्दा दौरा हिंद में हैदराबाद को भी शामिल करेंगे। प्रोफेसर मीर अकबर अली ख़ां आर्गेनाईज़िंग सेक्रेटरी इंडो अरब लेग ने तंज़ीम की सरगर्मीयों की तफ़सीलात बयान की।

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