मुसलमानों पर अपना हक़ समझने वाली पार्टियों ने खामियों को समझे बगैर तीन तलाक़ बिल का समर्थन कैसे कर दिया?

मुसलमानों पर अपना हक़ समझने वाली पार्टियों ने खामियों को समझे बगैर तीन तलाक़ बिल का समर्थन कैसे कर दिया?

कानपुर। फौरी तीन तलाक पर संसद में बिल पास होने से मुस्लिम समाज खुद को सियासी उपेक्षित महसूस कर रहा है। मुस्लिम बहुल इलाकों में हर वर्ग के मुस्लिम और बुद्धिजीवी हैरान हैं कि कांग्रेस समेत मुस्लिमों वोटों पर अपना हक समझने वाली पार्टियों ने खामियों को देखे बगैर कैसे बिल का समर्थन कर दिया।

अल आलीजह सोशल रिफार्म एसोसिएशन के निदेशक मास्टर मोहम्मद शाहिद बरकाती ने कहा कि मुस्लिम सियासी उपेक्षित हो चुके हैं। इसलिए उन्हें अपने सियासी विकल्प पर ध्यान देना चाहिए।

कांग्रेस नरम हिंदुत्व के नाम पर धर्म निरपेक्षता का लबादा ओढ़े है। सपा, बसपा, कांग्रेस सभी की भूमिका संदिग्ध है। यह माहौल लोकतांत्रिक परंपराओं और न्याय के खिलाफ है।

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