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“मुसलमान छोड़िये मोदी ने हिन्दुवों के लिए भी कुछ नहीं किया”

हालांकि मैंने नरेंद्र मोदी के पक्ष में वोट नहीं डाला था लेकिन मुझे उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद कुछ तो ऐसे काम वो भी करेंगे जिन्हें हम अच्छा मानते आये हैं. फिर उनका तो नारा भी “अच्छे दिन” का था, मोदी की बढ़ रही पॉपुलैरिटी को उस वक़्त हम नज़र अंदाज़ कर रहे थे और सोचते थे कि देश के लोग एक ऐसा प्रधानमंत्री कत्तई नहीं चुनेंगे जो गुजरात दंगों की वजह से बदनाम है और हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात नहीं बल्कि हिन्दूवादी विचारधारा की बात करता है लेकिन देश ने एक पक्ष में फ़ैसला लिया और कांग्रेस के दस साल के शासन से ऊबे लोगों के लिए मोदी एक विकल्प बने.

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मैं सोचता था कि नरेंद्र मोदी मुसलमानों के लिए कोई ख़ास काम नहीं करेंगे लेकिन बहुत ज़्यादा मुसलमानों के ख़िलाफ़ भी काम नहीं करेंगे, हालांकि इस बारे में मैं ग़लत ही साबित हुआ. लेकिन मुझे इसकी हैरानी नहीं है क्यूंकि नरेंद्र मोदी ने हिन्दुवों के लिए भी कोई काम नहीं किया. हम अक्सर सोचते हैं कि मुसलमान नेता मुसलमानों के लिए करेगा लेकिन वो ऐसा नहीं करता कुछ ऐसा ही मोदी के साथ है उन्होंने हिन्दुवों के लिए भी कुछ नहीं किया है.

पिछले दो सालों में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड धाराशाही कर दिए हैं, वो रिकॉर्ड भी जो सुषमा स्वराज ने विपक्ष की नेता के तौर पर लोकसभा में दिखाए थे. वो मीडिया वाले जो शुरू से मोदी का गुणगान करते आये हैं वो महंगाई के मुद्दे पर कहते हैं कि महंगाई की बात नहीं करना चाहिए.

विपक्ष में रहते हुए अरुण जेटली ने कहा था कि “मरते दम तक FDI का विरोध करेंगे,” और सरकार बनते ही FDI को अनुमति दे दी और ऐसे भी नहीं पूरे 100%, लगभग हर क्षेत्र में, रक्षा में भी FDI को अनुमति मिल गयी है. मतलब यही काम जब कांग्रेस कर रही थी तो आप मरने को तय्यार थे और अब उसके बिना ज़िन्दगी अधूरी है.

अभी कल ही की बात है एक और मामला हो गया, अभी परसों तक लग रहा था मतलब मीडिया के ही शब्दों में कि NSG की मेम्बरशिप मिलते ही मोदी की हुकूमत चाँद तक हो जायेगी और देश का नाम रौशन होगा और मोदी की डिप्लोमेसी की तारीफें हो रही थीं लेकिन कल पूरा मामला पलट गया, सरकार जो दावे कर रही थी खोखले निकले. चीन समेत कई देशों ने भारत का रास्ता रोक लिया और इतना ही नहीं पाकिस्तान ने अपनी वाह वाही करना भी शुरू कर दिया. हमें याद है जब अटल बिहारी की सरकार थी तब भी आगरा में एक वार्ता हुई थी और उसके भी बड़े चर्चे हुए थे और वो भी उलटी पड़ी थी. ऐसा लगता है जैसे बीजेपी को विदेशी डिप्लोमेसी आती ही नहीं है.

अब एक ऐसा मुद्दा जिसमें नरेंद्र मोदी ने सीधे तौर पर कोई बात कही ही नहीं है, उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद किसी भी हिन्दू मुस्लिम अलगाव वाले बयान का समर्थन नहीं किया है लेकिन विरोध भी नहीं किया है. साध्वी प्राची, योगी आदित्यनाथ जैसे ज़हर की खेती करने वाले नेता आये दिन कुछ न कुछ मुसलमानों और ईसाईयों के ख़िलाफ़ कहते रहते हैं लेकिन मोदी जी चुप रहते हैं.अभी आदित्यनाथ ने मदर टेरेसा के बारे में कहा कि वो हिन्दुवों को इसाई बना रही थीं. गौर करियेगा कि ये आदित्यनाथ वही हैं जो ईसाईयों, मुसलमानों को हिन्दू बनाने का दावा आये दिन करते रहते हैं. ऐसे नेताओं के ख़िलाफ़ मोदी जी को कभी कुछ नहीं कहना होता. कैराना पलायन का झूठा मुद्दा बीजेपी के एक सांसद हुकुम सिंह ने उठाया तो बीजेपी अध्यक्ष ने चुनावी रोटियाँ सेंकने के लिए विधायक संगीत सोम को आगे कर दिया, प्रदेश सरकार ने इस बार सख्ती से कार्यवाही की और किसी को दंगा कराने नहीं दिया और जांच टीम भेजी, जांच टीम कई मीडिया वालों ने भी भेजी और लगभग सभी जांच टीम में ये बात सामने आई कि ये सिवाय कोरी अफवाह के कुछ नहीं है और माहौल बिगाड़ने की साज़िश है… इतना कुछ हो गया लेकिन मोदी जी ने कुछ नहीं कहा.

योग को त्यौहार के रूप में पोपुलर करना कोई बुरा काम नहीं है लेकिन उसपे बेतहाशा पैसे लुटाना कोई अक्ल का काम नहीं और वो भी ऐसे समय में जब हमारे देश में ग़रीबी के हालात हैं.

पूरे तौर पर देखें तो असहिष्णुता का डंका बजा हुआ है, दादरी जैसी घटनाएं हुई हैं और मोदी के मंत्रियों के बयान इसमें निंदा के पात्र हैं लेकिन मोदी जी के नहीं क्यूंकि उन्होंने तो कुछ कहा ही नहीं. अपनी इसी हनक में सरकार JNU और HCU जैसे महान संस्थानों से लड़ पड़ी है.

खैर, मैं उम्मीद करूंगा कि 2019 से पहले तक मोदी कुछ ऐसा करें कि मैं और मेरे साथी ये सोचने पर मजबूर हो जाएँ कि मोदी अच्छे दिन ले आये हैं. अभी तक जो दिन इस सरकार ने दिखाए हैं इतने बुरे दिन तो हमने अटल बिहारी की सरकार में भी नहीं देखे थे

(अरग़वान रब्बही)
(लेखक के विचार उसके अपने हैं)

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