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मुसलमान सूदखोर नहीं होता इसलिए नोटबंदी से ये कौम ज्यादा परेशान है- कपिल सिब्बल

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले के बाद समाज एक बड़े तबको पर इसका असर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा इस फैसले का असर गरीब तबके पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विपक्ष को बैठे- बिठाये एक मुद्दा मिल गया है। बीएसपी से समाजवादी पार्टी तक बयानबाजी कर इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में कांग्रेस ने नोटबंदी बड़ा बयान दिया है। लखनऊ में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा है नोटबंदी सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों को हो रहा है क्योंकि वे सूद उनके धर्म में हराम है इसलिए मुस्लिमों का एक बड़ा तबका बैंको में अकाउंट रखने के बजाय कैश अपने पास ही रखना पसंद करते हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा कोई मुस्लिम छोटा व्यापारी हो या बड़ा वो ज्यादातर धंधा कैश में करते हैं। क्योंकि वो सूद नहीं खाते इसलिए बैंक अकाउंट भी नहीं रखते। सिब्बल ने कहा कि वो चांदनी चौक इलाके से आते हैं और उनसे बड़ी तादात मे मुसलमान जुड़े रहे हैं इसलिए उन्हें ये बात मालूम है।

अगर सियासत से परे कपिल सिब्बल की बात तथ्यों से परखे तो इसमें सच्चाई है। देश में ऐसे लोगों की एक बड़ी आबादी है जो धार्मिक वजहों से बैंकों से दूरी रखते हैं। हाल ही में रिजर्व बैंक ने समाज के ऐसे लोगों को इस तरह की बैंक सुविधाएं पेश करने की संभावनाओं पर विचार किया है जो धार्मिक कारणों से बैंकों से दूर हैं। इसी को देखते हुए आरबीआई ने पारंपरिक बैंकों में ‘इस्लामिक विंडो’ खोलने का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव इसलिए रखा है ताकि देश में धीरे-धीरे शरीयत के अनुकूल या ब्याज मुक्त बैंकिंग लागू की जा सके। जाहिर है रिजर्व बैंक ये आकड़ा तो जरुर रहा होगा।

मुस्लिम उल्लेमाओं के मुताबिक इस्लाम में सुदखोरी हराम है। सूद से जुड़े कारोबार और मुनाफे को लेन-देन की सख्त मनाही है। हालांकि मुस्लिम समाज में एक बहुत बड़ा तबका ऐसा जो इन इस्लामिक नियम कायदे को नजरअंदाज करता है। बैंको से कारोबारी लेनदेन और रकम भी जमा करता है।

कपिल सिब्बल शनिवार को लखनऊ में कांग्रेस दफ्तर में कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की बैठक को संबोधित कर रहे थे। सिब्बल ने नोटबंदी से आंतक का खात्मे के तर्क को खारिज किया।

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