Friday , December 15 2017

मुस्तहक़ीन में स्कालरशिपस चेक्स और राशन किट्स की तक़सीम

हहुक़ूक़ अल्लाह के मुताल्लिक़ तो मिल्लत का हर फ़र्द सोचता है और इस पर अमल भी करता है लेकिन मिल्लत-ए-इस्लामीया में ऐसे लोग बहुत कम हैं जिन की नज़र हुक़ूक़ उल-ईबाद की तरफ़ भी जाती है।

हहुक़ूक़ अल्लाह के मुताल्लिक़ तो मिल्लत का हर फ़र्द सोचता है और इस पर अमल भी करता है लेकिन मिल्लत-ए-इस्लामीया में ऐसे लोग बहुत कम हैं जिन की नज़र हुक़ूक़ उल-ईबाद की तरफ़ भी जाती है।

मुस्तहिक़, ग़रीब, नादार और ज़रूरतमंदों की इमदाद करना निहायत ही काबिल-ए-सिताइश-ओ-क़ाबिल तक़लीद अमल है। इन ख़्यालात का इज़हार मौलाना कलीम सिद्दीक़ी ने किया।

मौलाना आज दक्कन ज़कात ऐंड चैरि टेबल ट्रस्ट के एक मीटिंग से मुख़ातब थे। मौलाना ने कहा कि इंसानियत की ख़िदमत एक अज़ीम इबादत है। मीटिंग में तक़रीबन एक सौ मुस्तहक़्क़ीन में स्कालरशिप के चेक्स, नक़द वज़ाइफ़ और राशन किट्स की तक़सीम अमल में आई।

मीटिंग की सदारत मौलाना क़ुतुब उद्दीन अली चिशती ने की। उन्हों ने कहा के शहर में यूं तो बहुत सी तंज़ीमें और ट्रस्ट काम कररहे हैं लेकिन दक्कन ज़कात ऐंड चैरि टेबल ट्रस्ट के अराकीन को देख कर यूं लगता है केए उन की ज़िंदगी का मक़सद ही ख़िदमत-ए-ख़लक़ है। इफ़्तिख़ार शरीफ़ ने ख़िदमत-ए-ख़लक़ को अज़ीम इबादत से ताबीर करते हुए कहा केदुसरे इबादात, इंसान ख़ुद अपनी ज़ात के फ़ायदे के लिए करता है लेकिन ख़िदमत-ए-ख़लक़ से दुसरे अब्ना-ए-वतन मुस्तफ़ीद( फ़ायदा ) होते हैं

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