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मुस्लमानों की बहबूद के लिए सच्चर कमेटी सिफ़ारिशात अहम एजेंडा

नई दिल्ली १४ दिसमबर: (सियासत न्यूज़) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने वस्त मुद्दती जायज़ा के बाद आम इंतिख़ाबात से क़बल अपनी हुकूमत को मज़बूत बनाने के लिए एक दर्जन से ज़्यादा अहम शोबों की निशानदेही करते हुए इक़दामात पर तवज्जा देने का फ़ैसला क

नई दिल्ली १४ दिसमबर: (सियासत न्यूज़) वज़ीर-ए-आज़म मनमोहन सिंह ने वस्त मुद्दती जायज़ा के बाद आम इंतिख़ाबात से क़बल अपनी हुकूमत को मज़बूत बनाने के लिए एक दर्जन से ज़्यादा अहम शोबों की निशानदेही करते हुए इक़दामात पर तवज्जा देने का फ़ैसला किया है।

मुस्तक़बिल क़रीब में यू पी ए हुकूमत की हुक्मरानी के ये शोबे एजंडा का क़लब बनेंगे वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर से रवाना करदा ई मेल में बताया गया है कि वज़ीर-ए-आज़म का दफ़्तर मुस्लमानों की बहबूद और तरक़्क़ी के लिए सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशात पर अमल आवरी के इक़दामात पर भी ग़ौर किया है। इन के इलावा दीगर 12 अहम शोबा जात को भी शामिल किया गया है।

इन शोबों में सरकारी और पब्लिक सेक्टर के माहाना प्रोग्राम का जायज़ा लेने का एक तरीका-ए-कार वज़ा किया गया है।

मुताल्लिक़ा वज़ारतों और दफ़ातिर से ख़ाहिश की गई है कि वो मुक़र्ररा एहदाफ़, दुशवारीयों और किसी दूसरे वाक़िया के बारे में जिस में वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर की राबिता कारी की ज़रूरत हो सूरत-ए-हाल, मनाज़िल और मुक़र्ररा मुद्दत के बारे में इत्तिलाआत फ़राहम करते रहें। वज़ीर-ए-आज़म के प्रिंसिपल सैक्रेटरी प्लोक चटर्जी ने बताया कि जिन वज़ारतों को रिपोर्ट पेश करना है उन के लिए हर माह की 5 तारीख़ मुक़र्रर की गई है।

शोबा जाती सूरत-ए-हाल और तफ़सीलात का जायज़ा हर माह की 9 तारीख़ को लिया जाएगा। निगरान यूनिटों की जानिब से हर माह एक जामि रिपोर्ट जिस में तबसरे भी शामिल होंगे 12 तारीख़ तक वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर में पेश किए जाएंगे। वज़ारतों के ज़रीया रिपोर्ट पेश करने और दीगर इक़दामात की मजमूई माहाना रिपोर्ट पी ऐम ओ के इंटरनैट पर पेश किया जाएगा।

वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर ने जिन अहम शोबों की निशानदेही की है इन में लोक पाल बिल, इंतिख़ाबी इस्लाहात, ग्राम नया यालियों को कारकरद करना, मुजव्वज़ा सरकारी ख़रीदारी क़ानून, हुसूल आराज़ी (तरमीमी) बिल, आब‍ ओ‍ हवा की तबदीली के आठ मिशनों पर अमल दरआमद, दूसरे ए आर सी की सिफ़ारिशात पर आगे कार्रवाई, तग़ज़िया की कमी का तदारुक, हुनरमंदी की तर्बीयत, सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशात पर आगे की कार्रवाई, राष्ट्रीय स्वास्थ के इलावा बीमा योजना के तहत सेहत के बीमे का अहाता के इलावा दीगर अहम शोबे शामिल हैं।

वज़ीर-ए-आज़म के प्रिंसिपल सैक्रेटरी को वज़ीर-ए-आज़म ने हिदायत दी है कि वो हर महीने इन अहम शोबों में होने वाली पेशरफ़त के बारे में इन को रिपोर्ट पेश करें। इस के बाद इन में से हर अहम शोबे में वज़ीर-ए-आज़म की हिदायात वज़ारतों, मुताल्लिक़ा दफ़ातिर को बताएं जायेंगे और उन पर बाद की कार्रवाई वज़ीर-ए-आज़म के दफ़्तर के सेक्टोरल ऑफीसर करेंगें।

इसी दौरान वज़ीर-ए-आज़म ने ग़रीबों को क़र्ज़ा जात की फ़राहमी के लिए बैंकों की हौसला अफ़्ज़ाई करने एक हज़ार करोड़ के क़र्ज़ जोखिम ज़ामिन फ़ंड क़ायम करने का फ़ैसला किया है। जवाहर लाल नहरू नैशनल अर्बन रीनीवल मिशन के तहत डसमबर 2005-ए-से शुरू करदा पालिसीयों और प्रोग्रामों के तजुर्बा की रोशनी में बड़े और छोटे शहरों तक इस स्कीम को रूबा अमल लाया जाएगा। वज़ीर-ए-आज़म ने कहा बैंकों को ग़रीब और कम आमदनी वाले लोगों को बड़ी तादाद में क़र्ज़ देने की तरग़ीब देने की ख़ातिर हम एक हज़ार करोड़ रुपये से शुरू करके एक क़र्ज़ जोखिम गारंटी फ़ंड क़ायम करने पर ग़ौर कर रहे हैं।

उन्हों ने कि शहरी हिंदुस्तान कल घरेलू पैदावार का दो तिहाई पैदा करता है । इस से तरक़्क़ी और आगे बढ़ने के मवाक़े बहुत बढ़ गए हैं।इस के इलावा क्योंकि हमारे यहां नौजवानों की बड़ी आबादी है । ये रोज़गार और नौकरीयों के लिए शहरों का रुख करते हैं इस लिए हमें ये भी बहुत बड़ा फ़ायदा है।

उन्हों ने सनअत और ख़िदमात के सैक्टर में रोज़गार के मवाक़े बढ़ाने और ज़रई शोबा में पैदावार बढ़ाने पर तवज्जा देने की अपील की ताकि ग़ुर्बत का बोझ कम हो और ज़्यादा खुला और जमहूरी समाज बन सके।

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