मुस्लमानों के लिए लम्ह-ए- फ़िक्र

मुस्लमानों के लिए लम्ह-ए- फ़िक्र

क़दीम मस्जिद फिसल बंडा ग़ैर आबाद क़दीम निहायत ही ख़ूबसूरत छोटी मस्जिद फ़न तामीर की शाहकार , रूबरू अकबर यार जंग मक़बरा में ग़ैर आबाद है । महिकमा बलदिया के 1913 के नक़्शे में जब इस मस्जिद का ज़िक्र देखा । मस्जिद को तलाश करने बड़ी जद्द-ओ-जहद कर

क़दीम मस्जिद फिसल बंडा ग़ैर आबाद क़दीम निहायत ही ख़ूबसूरत छोटी मस्जिद फ़न तामीर की शाहकार , रूबरू अकबर यार जंग मक़बरा में ग़ैर आबाद है । महिकमा बलदिया के 1913 के नक़्शे में जब इस मस्जिद का ज़िक्र देखा । मस्जिद को तलाश करने बड़ी जद्द-ओ-जहद करनी पड़ी क्यों कि मुकम्मल झाड़ीयों में ये ख़ूबसूरत मस्जिद है अतराफ़ में कुछ क़ब्रें भी हैं । ये वार्ड 18 में मस्जिद है । इस का रिकार्ड महिकमा बलदिया और वक़्फ़ बोर्ड में मौजूद रहने के बावजूद इस मस्जिद को नज़रअंदाज किया गया है । लेकिन अफ़सोस मुकम्मल 100 फ़ीसद मुस्लिम आबादी में ये मस्जिद ग़ैर आबाद है । मुक़ामी बुज़ुर्गों का कहना है छोटी मोती मस्जिद के नाम से मशहूर है ।।

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