मुस्लमानों के साथ इंसाफ़ के लिए हुकूमत से मोअस्सिर नुमाइंदगी ज़रूरी

मुस्लमानों के साथ इंसाफ़ के लिए हुकूमत से मोअस्सिर  नुमाइंदगी ज़रूरी
करीमनगर। 09 जनवरी, ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ )मुफ़्ती नदीम उद्दीन सिद्दीक़ी तर्जुमान अहलसन्नत अलजमाअत ज़िला करीमनगर ने ग़ुलाम नबी आज़ाद के ब्यान पर तबसरा करते हुए कहा कि मुस्लमानों को हुकूमत से अपने हुक़ूक़ के लिए मांग करनी चा

करीमनगर। 09 जनवरी, ( सियासत डिस्ट्रिक्ट न्यूज़ )मुफ़्ती नदीम उद्दीन सिद्दीक़ी तर्जुमान अहलसन्नत अलजमाअत ज़िला करीमनगर ने ग़ुलाम नबी आज़ाद के ब्यान पर तबसरा करते हुए कहा कि मुस्लमानों को हुकूमत से अपने हुक़ूक़ के लिए मांग करनी चाहिये, और हुकूमत को चाहैए कि वो मुस्लमानों के हुक़ूक़ उन की जानिब से मुतालिबा करने से पहले है दीदी।आज़ाद के इस ब्यान से तो ज़ाहिर होगया है कि हुकूमत मुस्लमानों पर ज़ुलम कररहै है और नाइंसाफ़ी के साथ पेश आरहै है।

मौलाना नदीम उद्दीन सिद्दीक़ी ने आज़ाद से मुतालिबा किया है कि उन्हें इस तरह हुकूमत की नाइंसाफ़ी-ओ-ज़ुलम के ताल्लुक़ से वाक़िफ़ करवाने के बजाय उन्हें इंसाफ़ की राह तलाश करनी चाहैए क्योंकि वो ख़ुद आंधरा प्रदेश के इंचार्ज हैं मगर आज तक कभी उन्हों ने मुस्लमानों के जायज़ हुक़ूक़ मुतालिबात के ताल्लुक़ से मर्कज़ी हुकूमत ,कांग्रेस सदर सोनीया गांधी से किसी मसला पर गुफ़्तगु नहीं की है।

अक़ल्लीयती कारपोरेशन, उर्दू एकेडेमी के सदूर नशीन का ओहदा मख़लवा है, काबीना में सिर्फ एक मुस्लिम वज़ीर है और इस वज़ीर के पास भी कोई अहम क़लमदान नहीं है। तलंगाना से कोई मुस्लिम वज़ीर है है नहीं जबकि डी सरीनवास को जो कि दो मर्तबा अवाम के एतिमाद के हुसूल से महरूम रह चुके हैं इंतिख़ाबात में उन्हें नजरअंदाज़ करदिया उन्हें ऐम अलसी बनादिया गया।

मुहम्मद अली शब्बीर को महरूम करदिया गया वो पसमांदा तबक़ात के क़ाइद हैं और सब से बड़ी अक्सरीयत के नुमाइंदा हैं, क्या ये नाइंसाफ़ी नहीं है।मौलाना ने कहा कि हिंदूस्तान में सैंकड़ों फ़िर्कावाराना फ़सादाद में मुस्लमानों की लाखों जायदादें तबाह हुई और लाखों बेगुनाह अफ़राद शहैद हुई। भैंसा के फ़सादाद के दौरान पाँच मुस्लमानों को ज़िंदा जला दिया गया था और इस बहैमाना दरिंदगी का इल्ज़ाम बरसर-ए-इक्तदार कांग्रेस के क़ाइद रुकन असैंबली पर था।

मुस्लिम तंज़ीमों के ज़बरदस्त एहतिजाज के बावजूद उस शख़्स को टिकट दिया गया, क्या ये ज़ुलम नहीं है। इस पर मुस्लिम क़ियादत और दीगर क़ाइदीन क्यों ख़ामोश थी। मौलाना नदीम उद्दीन सिद्दीक़ी ने ग़ुलाम नबी आज़ाद से ख़ाहिश की है कि वो मुस्लमानों से होरहै नाइंसाफ़ी का एतराफ़ करने के बजाय सोनीया गांधी के सामने अपनी ज़बान खोलीं रंगा नाथ कमीशन की रिपोर्ट पर अमल आवरी पर ज़ोर दें।

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