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मुस्लमानों को इक़तिदार में भी तहफ़्फुज़ात चाहिए

औरंगाबाद 09 जनवरी (फ़याकस) मुस्लमानों केलिए तालीमी-ओ-सरकारी मुलाज़मतों में मुस्लिम विकास परिषद औरंगाबाद ने भी दस फ़ीसद तहफ़्फुज़ात का मुतालिबा कोई तेरह साल से करते आरही थी चुनांचे हुकूमत ने 4.5 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात देने की मंज़ूरी दे

औरंगाबाद 09 जनवरी (फ़याकस) मुस्लमानों केलिए तालीमी-ओ-सरकारी मुलाज़मतों में मुस्लिम विकास परिषद औरंगाबाद ने भी दस फ़ीसद तहफ़्फुज़ात का मुतालिबा कोई तेरह साल से करते आरही थी चुनांचे हुकूमत ने 4.5 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात देने की मंज़ूरी दे दी है । इन ख़्यालात का इज़हार मुस्लिम विकास परिषद के क़ौमी सदर हारून मलिक ने औरंगाबाद में अपने सहाफ़ती ब्यान में किया । उन्हों ने बतलाया कि आज़ादी के 60 साल बाद भी इस मुल्क में अक़ल्लीयत ख़सूसन मुस्लमानों को सिर्फ अझाया जाता रहा और उन को वोट बैंक के तौर पर इस्तिमाल किया जाता रहा है ।

इस तवील मुद्दत में मुस्लिम अक़ल्लीयत की तरक़्क़ी केलिए हुकूमत ने कोई क़दम नहीं उठाया । मुस्लिम विकास परिषद मुस्लिम तहफ़्फुज़ात के मुतालिबा को तक़रीबन 13 साल से जारी रखी । इस असना धरना ,रास्ता रो को और रेल रोको वग़ैरा एहतिजाज किए गए ।

अब मुलाज़मतों और तालीम में जिस तरह 4.5 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की मंज़ूरी दी गई है इसी तरह हुकूमत को चाहीए कि ग्राम पंचायत ,राज्य सभा और लोक सभा के इंतिख़ाबात में भी आबादी के तनासुब से मुस्लमानों को क़ानूनी तहफ़्फ़ुज़ मिलना चाहिए ।

हारून मलिक ने पर ज़ोर अलफ़ाज़ में मुतालिबा किया कि हुकूमती इक़तिदार में तनासुब आबादी के लिहाज़ से अक़ल्लीयतों को भी तहफ़्फुज़ात फ़राहम करना चाहीए और ये हुकूमत के लिए उस वक़्त आसान काम है । अगर ऐसा ना होतो आने वाले इंतिख़ाबात में इस का रद्द-ए-अमल मुस्लमानों की तरफ़ से हुकूमत ख़सूसन कांग्रेस के लिए मनफ़ी होगा।

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