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मुस्लमानों को सिर्फ वोट बैंक तस्लीम किया जाता है: रिपोर्ट

लखनाव 26 सितंबर (एजैंसीज़) सयासी पार्टीयां मुस्लमानों के मसाइल सिर्फ उन का वोट पाने के लिए उठाते हैं। और उन की नज़र में ये बड़ा अक़ल्लीयती तबक़ा सिर्फ वोट बैंक ही है। रियास्ती हुकूमत के इदारे गेरी इंस्टीटियूट आफ़ डीवलपमेनट असनडीज़ (जी आई आर ई डी ऐस) ने हाल ही में शहरों और देहातों में मुस्लमानों के समाजी, इक़तिसादी और तालीमी मसाइल के बारे में सर्वे किया और इसी बुनियाद पर इस का तक़ाबुल हिनदोवों से भी किया। बी जे पी के सिवा तमाम सयासी जमातें मुस्लमानों की तरक़्क़ी केलिए उन की तादाद की बुनियाद पर रिज़र्वेशन (तहफ़्फुज़ात) दिए जाने का मुतालिबा कररहे हैं। लेकिन उन की समाजी, इक़तिसादी और तालीमी मसाइल को हल करने केलिए कुछ भी नहीं किया गया। बी जे पी ने मुस्लमानों के मसाइल पर बात तक नहीं करती है। गैरी इदारे के डायरैक्टर ए के सिंह ने यहां ये बताया कि हिन्दू और मुस्लमानों के दरमयान लगातार दूरी बढ़ती ही जा रही है। मुस्लमान लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। गावं में रहने वाले दर्जा फ़हरिस्त ज़ात के लोगों को अगर अलग अलग कर दिया जाय तो दोनों तबक़ात के दरमयान ज़राअत तालीम और सरकारी मुलाज़मतों में फ़ासिला काफ़ी लंबा हो जाता है। मिस्टर सिंह ने कहा कि मर्कज़ और रियास्ती हुकूमत के मंसूबों के फ़ायदे मुस्लमानों को नहीं पहुंच पाते हैं। रीलीटीव सोशीवा का नौ सक कंडीशन आफ़ मुस्लमान रूरल यूपी, नाम से किए गए सर्वे में ये बात पाई गई कि कुछ ख़ास गाॶं में सरकारी मंसूबों के फ़ायदे हिनदोवो तक ही पहुंचे लेकिन मुस्लमान इस में पीछे रह गए। इस सर्वे को मर्कज़ी फ़लाह वज़ारत ने अक़ल्लीयती फ़लाह ने मंज़ूरी दी थी। रियासत में कल ऐसे 21 अज़ला हैं सर्वे किराया गया जिस में मुस्लमानों की आबादी अच्छी ख़ासी है। सर्वे केलिए हर ज़िला के तीन गाॶं को मुंतख़ब किया गया। उन्हों ने कहाकि 21 अज़ला में कुल 17 हज़ार 76 घरों में जाकर पूरी मालूमात हासिल की गई। इन में 11 हज़ार 493 हिनदोवों के इलावा 191 मुस्लमानों के घर थे सर्वे में ये बात सामने आई कि ज़्यादा तर मुस्लिम ख़ानदानों के पास खेती नहीं है और कई मुस्लमानों के पास तो रहने को अपनी झोंपड़ी भी नहीं है।

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