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मुस्लमानों को सेयासी दबाव की हिक्मत-ए-अमली इख़तियार करने का मश्वरा

हैदराबाद 14 फरवरी (सियासत न्यूज़) मुस्लमान जब तक अपने हुक़ूक़ के मुताल्लिक़ जद्द-ओ-जहद का रास्ता इख़तियार नहीं करते, उस वक़्त तक उन की फ़लाह-ओ-बहबूद नामुमकिन है। मुस्लमानों को चाहीए कि वो अपने मुफ़ादात के तहफ़्फ़ुज़ केलिए सयासी ज

हैदराबाद 14 फरवरी (सियासत न्यूज़) मुस्लमान जब तक अपने हुक़ूक़ के मुताल्लिक़ जद्द-ओ-जहद का रास्ता इख़तियार नहीं करते, उस वक़्त तक उन की फ़लाह-ओ-बहबूद नामुमकिन है। मुस्लमानों को चाहीए कि वो अपने मुफ़ादात के तहफ़्फ़ुज़ केलिए सयासी जमातों को मजबूर करने की पालिसी इख़तियार करें चूँकि जब तक मुस्लमान तौके गु़लामी पहने रहेंगे, उस वक़्त तक उन की तरक़्क़ी के कोई इमकानात नहीं हैं। मुस्लमानों को चाहीए कि वो बजट में अज़ाफ़ा और दीगर मुराआत केलिए मंसूबा बंद हिक्मत-ए-अमली इख़तियार करते हुए सयासी जमातों को अपने मसाइल इंतिख़ाबी मौज़ूआत बनाने पर मजबूर करें।

ऑल इंडिया मुस्लिम माइनारीटी आर्गेनाईज़ेशन की जानिब से मुनाक़िदा गोलमेज़ कान्फ़्रैंस बउनवान मुस्लमानों की तरक़्क़ी, रंगा नाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी रिपोर्टस पर अमल आवरी से ख़िताब के दौरान मुख़्तलिफ़ क़ाइदीन ने इन ख़्यालात का इज़हार किया। जनाब ज़हीरउद्दीन अली ख़ां मैनेजिंग ऐडीटर रोज़नामा सियासत ने इस मौक़ा पर ख़िताब के दौरान बताया कि हर रियासत में मुस्लमानों की लॉलीपॉप लीडरशिप हर पाँच साल में मुस्लमानों का होलसेल सौदा कररही है। उन्हों ने हिंदूस्तानी मुस्लमानों और सैकूलर हिन्दू पसमांदा तबक़ात के माबैन इत्तिहाद को वक़्त की अहम ज़रूरत क़रार देते हुए कहा कि मुस्लमानों में फ़रोग़ पा रही मायूसी को दूर करने की ज़रूरत है। इस मायूसी को दूर करने केलिए हमें सैकूलर हिन्दू ताक़तों के साथ मुत्तहिद होकर काम करना चाहीए। जनाब ज़हीरउद्दीन अली ख़ां ने बताया कि मुस्लमानों की तरक़्क़ी के बगै़र मुलक तरक़्क़ी नहीं करसकता क्योंकि तमाम तबक़ात की तरक़्क़ी ही मुल़्क की तरक़्क़ी की ज़ामिन साबित होसकती है।

जनाब ज़हीरउद्दीन अली ख़ां ने मुस्लमानों पर मुस्लमान अपनी एहमीयत को समझने केलिए ज़ोर देते हुए कहा कि हिंदूस्तानी जमहूरी निज़ाम में वो अपनी अददी ताक़तके ज़रीया अपने वजूद का एहसास दिलवा सकते हैं। उन्हों ने बताया कि हिंदूस्तानी जमहूरी निज़ाम में भी शहंशाहियत नज़र आरही है चूँकि हर सयासी जमात एक ख़ानदान की जागीरबनती जा रही है। उन्हों ने बताया कि ग्यारहवीं पंच साला मंसूबा में मुस्लमानों को 2750 करोड़ रुपय का बजट गुज़श्ता बरस फ़राहम किया गया था जबकि मुस्लमानों की तादाद हिंदूस्तान में तक़रीबन 30 करोड़ से तजावुज़ कररही है।

2,750 करोड़ रुपय में भी सिर्फ एक तिहाई रक़म ख़र्च की गई जबकि 16 करोड़ आबादी वाले पसमांदा तबक़ात केलिए मर्कज़ी हुकूमत ने 20 हज़ार करोड़ रुपय की तख़सीस अमल में लाई थी जोकि सद फ़ीसद ख़र्च किया गया है। शैडो लड टराईब एसटी जिन की आबादी सिर्फ 8 करोड़ है, उन केलिए 12 हज़ार करोड़ रुपय मुख़तस किए गए हैं। मुस्लमानों को इन हालात पर ग़ौर करते हुए अपनी फ़लाह-ओ-बहबूद पर तवज्जा देने की ज़रूरत है। जनाब अबदुलग़नी ऐम एलए तेलगू देशम पार्टी ने इस मौक़ा पर ख़िताब करते हुए कहा कि रियासत में अक़ल्लीयतों की हालत दिन बदिन अबतर होती जा रही है। महिकमा अक़ल्लीयती बहबूद के तहत चार इदारा जात बरसर ख़िदमत है जिन में आंधरा प्रदेश रियास्ती अक़ल्लीयती मालीयाती कारपोरेशन , आंधरा प्रदेश रियास्ती वक़्फ़ बोर्ड, आंधरा प्रदेश रियास्ती हज कमेटी , आंधरा प्रदेश रियास्ती उर्दू एकेडेमी शामिल हैं। इन चार इदारों में सिर्फ एक इदारा ऐसा है जहां पर ओहदेदार मौजूद है लेकिन अमले की कमी है

। उन्हों ने बताया कि तेलगू देशम पार्टी मुम्किना कोशिश करते हुए अक़ल्लीयतों के बजट में अज़ाफ़ा केलिए हुकूमत से नुमाइंदगी करेगी।रुकन असम्बली तेलगू देशम ने बताया कि रियासत में मुस्लमानों की तरक़्क़ी , फ़लाह-ओ-बहबूद केलिए तेलगू देशम पार्टी हर तरह से अक़ल्लीयतों की मदद केलिए तैय्यार है। प्रोफ़ैसर कांचा ईलिया ने इस मौक़ा पर अपने ख़िताब के दौरान बताया कि आंधरा प्रदेश के बजट का बड़ा हिस्सा रेड्डी और कमा केलिए मुख़तस होता है। उन्हों ने बताया कि जिस वक़्त कांग्रेस हुकूमत में होती है, वो रेड्डी बजट पेश करती है और जब तेलगू देशम पार्टी इक़तिदार सँभालती है तो कमा बजट पेश किया जाता है। ऐसे में अक़ल्लीयतों के मसाइल पर तवज्जा देना तमाम सैकूलर ताक़तों की ज़िम्मेदारी है। प्रोफ़ैसर कांचा ईलिया ने रियासत के बजट में 3 हज़ार करोड़ रुपय अक़ल्लीयती बहबूद केलिए मुख़तस करने का मुतालिबा करते हुए कहा कि इस सिलसिले में चीफ़ मिनिस्टर से नुमाइंदगी भी की जा चुकी है।

उन्हों ने बताया कि मौलाना आज़ाद नैशनल उर्दू यूनीवर्सिटी की जानिब से अक़्वाम की तरक़्क़ी के लिए मंसूबा बंदी पर तहक़ीक़ की जा रही है ताकि अक़्वाम को तरक़्क़ी फ़राहम के मंसूबे पेश किए जा सके। उन्हों ने मुस्लमानों से अपना हक़ मांगने की अपील करते हुए कहा कि जब तक मुस्लमान अपना हक़ मांगने केलिए आगे नहीं आते, उस वक़्त तक हमें बजट में हिस्सा मिलने के कोई इमकानात नहीं हैं। उन्हों ने मुस्लिम अरकान असम्बली से अपील की कि बजट में ख़ातिर ख़वाह अज़ाफ़ा ना होने की सूरत में वो बजट का बाईकॉट करें। उन्हों ने बताया कि जब तक मुस्लमानों को मवाक़े फ़राहम नहीं किए जाते, उस वक़्त तक उन की तरक़्क़ी नामुमकिन है। जनाब महमूद अली रुकन पोलीट ब्यूरो तेलंगाना राष़्ट्रा समीती ने इस मौक़ा पर अपने ख़िताब में कहा कि उन्हें के सी आर से ज़्यादा क़ौम अज़ीज़ है और मुस्लिम मसाइल के हल के लिए हरवक़त तैय्यार हैं।

उन्हों ने बताया कि बजट में ख़ातिर ख़वाह अज़ाफ़ा ना होने के सबब टी आर ऐस अरकान असम्बली बड़े पैमाने पर एहतिजाज करेंगे। जनाब महमूद अली ने मुस्लिम मसाइल पर मुत्तहिद होने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब तक मुस्लिम मसाइल के हल केलिए हम मुत्तहिद नहीं होते, उस वक़्त तक हमारे मसाइल हल होना मुम्किन नहीं। इस मौक़ा पर प्रोफ़ैसर मुहम्मद अंसारी , डाक्टर फ़रीदा सिद्दीक़ी , मुहम्मद नवाब, ज़हीरउद्दीन समर, अबदुल्लाह, सिंह-ए-अल्लाह ख़ां , अबदालरब अंसारी, अबदुलसत्तार मुजाहिद , इला-ए-उद्दीन अंसारी ऐडवोकेट , शेख़ अबदुलसत्तार ,सलीम ख़ान के इलावा कन्वीनर इजलास-ओ-सदर नशीन ऑल इंडिया मुस्लिम माइनारीटीज़ आर्गेनाईज़ेशन सय्यद मुख़तार हुसैन मौजूद थे। जनाब मुहम्मद नवाब ने इजलास की कार्रवाई चलाई।

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