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मुस्लमानों को 12% तहफ़्फुज़ात के लिए ठोस लायेहा-ए-अमल ज़रूरी

हैदराबाद 09 अक्टूबर:मुस्लमानों की समाजी-ओ-मआशी तरक़्क़ी के लिए उन्हें 12% तहफ़्फुज़ात नागुज़ीर हैं और तेलंगाना राष्ट्र समीती ने चुनाव मुहिम के दौरान उस का वादा किया था जिसे जल्द अज़ जल्द पूरा करना चाहीए।

इस के साथ साथ टी आर एस हुकूमत को एसा लायेहा-ए-अमल इख़तियार करना ज़रूरी है जिससे तहफ़्फुज़ात के फ़वाइद हक़ीक़ी मइने में मुस्लमानों तक पहुंच सकें, वर्ना ये मस्ला फिर एक-बार लेत-ओ-लाल का शिकार हो जाएगीगा और इस का आसर सिर्फ मुस्लमानों को ही भुगतना पड़ेगा।

ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर रोज़नामा सियासत ने चीफ़ मिनिस्टर तेलंगाना के चन्द्रशेखर राव‌ के नाम खुले मकतूब में ये बात कही। उन्होंने हालात-ओ-वाक़ियात की तफ़सीलात बयान की और दोटूक अंदाज़ में कहा कि चीफ़ मिनिस्टर को अपना वादा पूरा करना चाहीए। ज़ाहिद अली ख़ां ने इस हक़ीक़त की भी निशानदेही की के12% तहफ़्फुज़ात की फ़राहमी में ताख़ीर की वजह से मुस्लमानों का काफ़ी नुक़्सान हो रहा है।

इस ज़िमन में उन्होंने बताया कि टी आर एस इक़तेदार सँभाले 15 माह गुज़र चुके हैं और अब तक मुस्लमान 1,242 जायदादों से महरूम हो चुके हैं। ताहाल ये वाज़िह नहीं हो पाया कि तहफ़्फुज़ात को यक़ीनी बनाने के लिए कितना वक़्त दरकार होगा और मुस्लमानों को किस क़दर नुक़्सान बर्दाश्त करना होगा।

ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि चीफ़ मिनिस्टर चन्द्रशेखर राव‌ अपनी बात को पूरा करने के मआमले में काफ़ी संजीदगी का मुज़ाहरा करते हैं जिसका एक सबूत रियासत तेलंगाना की तशकील के लिए उनकी जद्द-ओ-जहद है और इस का नतीजा हम सब के सामने है।

इसी तरह जब चन्द्रशेखर राव ने मुस्लमानों को 12% तहफ़्फुज़ात का वादा किया है तो उन्हें यक़ीन हैके इस वादे को भी वो पूरा करेंगे लेकिन ये काम जल्द अज़ जल्द होना चाहीए ताके मुस्लमानों को रोज़गार में तहफ़्फुज़ात के फ़वाइद हासिल हो सकें। उन्होंने हुकूमत के इख़तियार करदा तरीका-ए-कार की तरफ़ तवज्जा मबज़ूल कराई और कहा कि इस से ये मसला सिर्फ लेत-ओ-लाल का शिकार होगा।

इस पस-ए-मंज़र में उन्होंने 2004 से मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात और इस ज़िमन में अदालती मुक़द्दमात का तज़किरा किया। उन्होंने तीन अहम उमोर की निशानदेही की जिसमें सबसे पहला ये हैके हुकूमत पसमांदगी के सबूत के तौर पर मुताल्लिक़ा रियासती मर्कज़ी बैकवर्ड क्लासेस कमीशन की सिफ़ारिश पेश करे।

इसी तरह दूसरा नुक्ता ये हैके तमाम रियासतों में तहफ़्फुज़ात के लिए सुप्रीमकोर्ट की मुक़र्ररा हद 50% पूरी हो चुकी है चुनांचे रियासतों से इस मुक़र्ररा हद से ज़्यादा तहफ़्फुज़ात के बारे में वजूहात पूछी जाती हैं और तीसरा नुक्ता ये हैके बी सी कमीशन तशकील दिए बग़ैर इस मस्ले को बी सी कमीशन के ज़रीये रुजू करने से सिर्फ वक़्त ज़ाए होगा और मुस्लमान 15,522 जायदादों पर तक़र्रुत की सूरत में 8% तहफ़्फुज़ात से महरूम होजाएंगे।

उन्होंने कहा कि हुकूमत आम तौर पर इस तरह के मस्ले पर एडवोकेट जनरल की राय तलब करती है लेकिन मौजूदा एडवोकेट जनरल वही हैं जिन्हों ने 2004 के बाद से मुस्लमानों को तहफ़्फुज़ात के ख़िलाफ़ दायर करदा दरख़ास्तों की मुख़्तलिफ़ अदालतों यहां तक कि सुप्रीमकोर्ट में भी पैरवी की लिहाज़ा मौजूदा एडवोकेट जनरल से ये तवक़्क़ो नहीं की जा सकती कि वो हुकूमत को सही मश्ववेरह् देंगे।

इस लिए हुकूमत के पास यही वाहिद रास्ता हैके वो मुस्लमानों की मआशी-ओ-समाजी पसमांदगी को बुनियाद बनाकर ठोस इक़दामात करे और हक़ीक़त पर मबनी सबूत पेश करते हुए 12% तहफ़्फुज़ात यक़ीनी बनाए।

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