Thursday , December 14 2017

मुस्लमान , अज़मत रफ़्ता की बहाली के लिए शादीयों में इस्लामी तर्ज़ इख़तियार करें

ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर रोज़नामा सियासत ने उल्मा-ओ-मशाइख़ीन और दानिश्वरों से अपील की के वो एसी तमाम मुस्लिम शादीयों का बाईकॉट करें जिन में बेजा रसूमात , जहेज़ के मुतालिबात और इसराफ़ किया जाता है।

ज़ाहिद अली ख़ां एडीटर रोज़नामा सियासत ने उल्मा-ओ-मशाइख़ीन और दानिश्वरों से अपील की के वो एसी तमाम मुस्लिम शादीयों का बाईकॉट करें जिन में बेजा रसूमात , जहेज़ के मुतालिबात और इसराफ़ किया जाता है।

उन्होंने कहा कि इन तमाम ग़ैर इस्लामी रस्म-ओ-रिवाज और फ़र्सूदा रवायात के ख़िलाफ़ एक मुनज़्ज़म तहरीक चलाने की ज़रूरत है क्युंकि मुस्लिम दुश्मन ताक़तें चाहती हैंके इस तरह की तक़ारीब में हमारी मईशत बर्बाद होजाए।

उन्होंने मुसलमानों को ख़बरदार किया कि अगर वो अपनी अज़मत रफ़्ता को वापिस लाना चाहते हूँ तो उन्हें अपनी शादीयों को इस्लामी तर्ज़ की बनाना होगा।

ज़ाहिद अली ख़ां कल करीमनगर शहर के एसबी एस फंक्शन हाल , कश्मीर गड्डा करीमनगर में इदारा सियासत और माइनॉरिटीज़ डेवलपमेंट फ़ोरम के तआवुन से मुस्लिम बहबूद कमेटी ज़िला करीमनगर के ज़ेरे एहतेमाम मुनाक़िदा दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम में मुसलमानों के एक बड़े इजतेमा को बहैसीयत मेहमान ख़ुसूसी मुख़ातब कररहे थे।

उन्होंने कहा कि मुआशरा में इन्क़िलाब लाना कोई आसान काम नहीं है। लेकिन अज़ाइम पुख़्ता और इरादे मज़बूत हूँ तो इस तहरीक को रूबा अमल लाया जा सकता है।ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि रस्म-ओ-रिवाज को मिटाने और इसराफ़-ओ-फुज़ूलखर्ची को ख़त्म करने में मुस्लिम ख़वातीन अपना तारीख़ साज़ और नुमायां किरदार अदा करसकती हैं क्युंकि 80 फ़ीसद रसूमात लड़कों की माओं के नाम निहाद अरमानों पर मुनहसिर होती हैं।

इस लिए ख़वातीन को चाहीए कि वो अपने बच्चों की ख़ुशहाल ज़िंदगी के लिए अपने नाम निहाद अरमानों को क़ुर्बान करदें। ज़ाहिद अली ख़ां ने कहा कि पुलिस एक्शण के बाद मुसलमानों की जायदादें छीन ली गईं और मुलाज़िमत के दरवाज़े बंद करदिए गए और कारोबार के इमकानात ख़त्म होगए। इस लिए तालीम ही वो दौलत है जिसे कोई छीन नहीं सकता और ज़ेवर तालीम से आरास्ता हो कर ही वो अपना खोया हुआ मुक़ाम हासिल करसकते हैं।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम मुआशरे में आज लड़कीयों की शादियां करना वालिदैन के लिए इंतिहाई मुश्किल होचुका है। कई ख़ानदान एसे हैं जो लड़के वालों की शराइत और उनके मुतालिबात को पूरा नहीं करसकते जिस के नतीजे में सिर्फ़ पुराने शहर हैदराबाद में 30 हज़ार से ज़ाइद मुस्लिम लड़कीयों की शादियां अभी तक तए पा ना सकी।

उन्होंने कहा कि इदारा सियासत की तरफ से मुस्तहिक़ तलबा-ए-ओ- तालिबात को हर साल स्कालरशिप दीए जा रहे हैं इसी तरह दु बा दु मुलाक़ात प्रोग्राम के ज़रीये रिश्ता तए करने का वसीअ-ओ-जामि प्रोग्राम ना सिर्फ़ शहर बल्कि अज़ला में भी मुनाक़िद होरहा है और अल्लाह के फ़ज़ल-ओ-करम से हमारे ज़रीये अब तक तक़रीबन 5000 रिश्ते तए पा चुके हैं।

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