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मुस्लिम अक़्वाम इख़तिलाफ़ात तर्क करके मुत्तहिद होजाएं

तहरान में बैन-उल-अक़वामी इस्लामी शऊर कान्फ़्रैंस का आग़ाज़ । आयत-ए-अल्लाह ख़ा मुँह ई का ख़िताब

तहरान में बैन-उल-अक़वामी इस्लामी शऊर कान्फ़्रैंस का आग़ाज़ । आयत-ए-अल्लाह ख़ा मुँह ई का ख़िताब
तहरान 17 सितंबर ( एजैंसीज़ ) ईरान के सुप्रीम रहनुमा आयत-ए-अल्लाह सय्यद अली ख़ा मुँह ई ने मुस्लिम अक़्वाम को नफ़ाक़ के तबाहकुन अवाक़िब से ख़बरदार करते हुए सारी मुलक बिरादरी के माबैन इत्तिहाद की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है । तहरान में इस्लामी शऊर की पहली बैन-उल-अक़वामी कान्फ़्रैंस से ख़िताब करते हुए आयत-ए-अल्लाह ख़ा मुँह ई ने कहा कि नसली फ़िर्कावारी और सरहदी इख़तिलाफ़ात को दूर करना ज़रूरी है और तमाम इस्लामी ममालिक के माबैन बाहमी समझौता तमाम अक़्वाम की फ़लाह केलिए ज़रूरी है । उन्हों ने वाज़िह किया कि इन सारी कोशिशों का मक़सद एक ही होना चाहीए कि एक मुत्तहदा इस्लामी उम्मत उभरे जो मज़हब अख़लाक़ीयात और साईंस पर मुश्तमिल हो। आयत-ए-अल्लाह ख़ा मुँह ई ने फ़लस्तीन की आज़ादी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि सीहोनी ममलकत इसराईल से फ़लस्तीन की आज़ादी एक अज़ीम मक़सद है और इस को यक़ीनी बनाया जाना चाहीए । उन्हों ने कहा कि अगर इस्लामी और मुस्लिम ममालिक बाहमी नफ़ाक़ की पालिसी पर ही अमल पैरा रहें तो उन्हें ज़बरदस्त तबाही का सामना करना पड़ेगा । उन्हें इस सूरत-ए-हाल से बचने की ज़रूरत है और का रास्ता यही है कि वो आपस में इत्तिहाद-ओ-इत्तिफ़ाक़ पैदा करें । यही उन केलिए बेहतरीन रास्ता है । ख़ा मुँह ई ने इन अरब ममालिक को भी ख़बरदार किया जहां अवामी एहतिजाज और बेचैनी की लहर पैदा होगई है । उन्हों ने इन ममालिक और यहां के अवाम पर ज़ोर दिया कि वो अपने इन्क़िलाब या तहरीक केलिए मग़रिब पर भरोसा ना करें। उन्हों ने इन ममालिक में क़ायम होने वाली नई हुकूमतों से कहा कि वो अमरीका या नाटो पर भरोसा ना करें क्योंकि ये लोग नई हुकूमतों को अपने हाथों की कठपुतली बनाना चाहते हैं। उन्हों ने कहा कि अमरीका इस बात की कोशिश करेगा कि मिस्र और तीवनस में क़ायम होने वाली नई हुकूमतें इस के इशारों पर काम करें। ऐसे हालात में इस्लामी शऊर की बेदारी और भी ज़रूरी होजाती है । ईरान के इस्लामी इन्क़िलाब के सुप्रीम रहनुमा की सदारत में इस्लामी शऊर की बेदारी पर पहली इंटरनैशनल कान्फ़्रैंस का आज तहरान में आग़ाज़ हुआ । इस कान्फ़्रैंस में ईरान के आली सयासी-ओ-मज़हबी क़ाइदीन-ओ-ओहदेदारों भी शिरकत कर रहे हैं जिन में सदर महमूद अहमदी नज़ाद ईरानी पार्लीमैंट के स्पीकर मिस्टर अली लारी जानी और अदलिया के सरबराह आयत-ए-अल्लाह सादिक़ अमोली लारी जानी भी शामिल हैं। ईरान की माहिरीन असैंबली के सदर नशीन मुहम्मद रज़ा महदवी ख़वानी गार्जियन कौंसल के सैक्रेटरी आयत-ए-अल्लाह अहमद जन्नती एन्टुली जिन्स के वज़ीर हैदर मसलही सुप्रीम नैशनल सीकीवरीटी कौंसल के सैक्रेटरी सईद जलाली वज़ीर-ए-दिफ़ा ब्रिगेडीयर जनरल अहमद वहीदी बैन-उल-अक़वामी उमूर के मुशीर अली अकबर वलाएती ईरानी मुसल्लह अफ़्वाज के चीफ़ आफ़ स्टाफ़ मेजर जनरल हुस्न फ़िरोज़ आबादी और दूसरे भी शामिल हैं। इस कान्फ़्रैंस में तक़रीबन 600 बैरूनी मंदूबीन और दानिश्वर इन शिरकत कर रहे हैं जो 80 ममालिक से आए हैं

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