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मुस्लिम आबादी वाले पुलिस स्टेशनों में मुस्लिम इन्सपेक्टर्स का तक़र्रुर किया जाए: मर्कज़

सचर कमेटी की सिफ़ारिशात को मद्द-ए-नज़र रखते हुए मर्कज़ी हुकूमत ( केंद्र सरकार) ने रियास्तों ( राज्यों) से अपील की है कि वो उन इलाक़ों के पुलिस स्टेशनों में जो मुस्लिम अक्सरीयत ( बहुसंख्यक) वाली आबादी में वाक़्य ( मौजूद) हैं, कम से कम एक मुसलम

सचर कमेटी की सिफ़ारिशात को मद्द-ए-नज़र रखते हुए मर्कज़ी हुकूमत ( केंद्र सरकार) ने रियास्तों ( राज्यों) से अपील की है कि वो उन इलाक़ों के पुलिस स्टेशनों में जो मुस्लिम अक्सरीयत ( बहुसंख्यक) वाली आबादी में वाक़्य ( मौजूद) हैं, कम से कम एक मुसलमान पुलिस आफीसर ( अधीकारी) को ज़रूर ताय्युनात (नियुक़्त) करें।

मर्कज़ी मोतमिद दाख़िला (Home Secretary) आर के सिंह ने तमाम रियास्तों ( राज्यों) के चीफ़ सेक्रेटरीज़ को मकतूब तहरीर करते हुए ये ख़ाहिश ज़ाहिर की है कि इस मुआमला (मामला) पर मौजूदा मौक़िफ़ की रिपोर्ट जारीया माह के अवाख़िर तक रवाना की जाए।

मुक्तो बात रवाना करने की वजह दरअसल वज़ारत-ए-दाख़िला ( गृह मंत्रालय) की जानिब से उन हक़ायक़ का मालूम होना है जहां अब तक सचर कमेटी की सिफ़ारिशात पर अमल आवरी नहीं की गई है। याद रहे कि सचर कमेटी की तशकील 9 मार्च 2005 को की गई थी जिसके सदर नशीन जस्टिस राजिंदर सचर थे।

कमेटी का मक़सद ये था कि वो हिंदूस्तानी मुसलमानों के तालीमी, मआशी ( आर्थिक) और समाजी मौक़िफ़ की सूरत-ए-हाल से वाक़िफ़ करवाए 2006 में सचर कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मुसलमानों में एतिमाद ( यकीन/भरोसा) साज़ी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था। रिपोर्ट ही तजवीज़ पेश की गई थी कि मुसलमानों की अक्सरीयत( बहुसंख्यक) वाले इलाक़ों में वाक़्य ( मौजूद) पुलिस स्टेशनों में कम से कम एक इन्सपेक्टर या सब इन्सपेक्टर का तक़र्रुर ( नियुक़्त) किया जाए।

इस सिफ़ारिश का मक़सद मुसलमानों के साथ तास्सुबाना रवैय्या ( नियम) का ख़ातमा नहीं बल्कि मुसलमानों के एतिमाद( भरोसा/ विश्वास) को मुस्तहकम करना था। दरीं असना मोतमिद दाख़िला (Home Secretary) ने रियास्तों ( यराज्यों) को चार साल क़बल ( पहले) रवाना किए गए मुक्तो बात का भी हवाला दिया और याददेहानी करवाई गई कि सचर कमेटी की रिपोर्ट ने जो तजावीज़ पेश की हैं उन पर अमल आवरी करते हुए मर्कज़ को भी ला इल्म ना रखा जाए।

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