Friday , May 25 2018

मुस्लिम इलाक़े के सिगोड़ी में एक ही मुद्दा, कौन रोकेगा मोदी को

अंसारी मुसलमानों की सबसे बड़ी बस्ती सिगोड़ी। यूपी के मऊ से भी बड़ी है। रियासत में सबसे ज्यादा बुनकर यही हैं। कभी बिजली से चलने वाले पावर लूम की घरघराहट सिगोड़ी की पहचान हुआ करती थी। अब हाथकरघा का खट-खट। मसायलें और भी हैं। सिगोड़ी

अंसारी मुसलमानों की सबसे बड़ी बस्ती सिगोड़ी। यूपी के मऊ से भी बड़ी है। रियासत में सबसे ज्यादा बुनकर यही हैं। कभी बिजली से चलने वाले पावर लूम की घरघराहट सिगोड़ी की पहचान हुआ करती थी। अब हाथकरघा का खट-खट। मसायलें और भी हैं। सिगोड़ी को ब्लॉक का दर्जा देने से लेकर बुनकरों को इक़्तेसादी मदद के साथ बाजार दस्तयाब कराने की मांग। हालांकि लोकसभा इंतिख़ाब की तपिश में पाटलिपुत्र के इस मुस्लिम इलाक़े के सिगोड़ी में बुनकरों की बदहाली या तरक़्क़ी का मुद्दा पीछे छूट गया है। फिलहाल सबकी जुबान पर एक ही बात है कि कौन रोकेगा मोदी की लहर को…। जो काबिल दिखेगा, उसी को यहां मिलेगा वोट।
अब्दुल समद, मो शहजाद, मो रिजवान, अमरूल्ला मियां, मो सलाम अंसारी और अब्दुल सलाम जैसे सिगोड़ी रिहाईशियों की बातों में यह साफ-साफ दिख रहा है कि लोग इस बार वोट बर्बाद नहीं करेंगे…।

तब बाइरून मुल्क जाते थे कपड़े

जब पावरलूम था, तब सिगोड़ी से खादी के कपड़े मुल्क के मुखतलिफ़ हिस्सों में ही नहीं, बाइरून मुल्क भी जाते थे। खासतौर से अरब मुल्कों, यूरोप, अमेरिका वगैरह मुल्कों में। बुजुर्ग मो इलियास बताते हैं 1976-77 में पावर लूम लगा। तादाद करीब एक सौ रही होगी। तब धोती-साड़ी भी बनती थी। 1985-86 तक सबकुछ ठीक रहा। उस वक़्त चोरों ने इलाके के बिजली तार काट लिए। बिजली क्या गई, लोगों की किस्मत ही रूठ गई। पावरलूम बंद हो गए। तब बुनकरों ने हस्तकरघा लगाया। करीब दो हजार करघे चलने लगे। लेकिन, महंगाई और मार्केट नहीं मिलने की वजह बंद होने लगे। 1990 से 2000 के दरमियान हालत इतनी खराब हुई कि सिगोड़ी का करघा सानाअत बंद होने के कगार पर पहुंच गया। आधा से ज़्यादा बुनकर महाराष्ट्र की भेवड़ी चले गए। वहां पावरलूम चलाने लगे। यानी मजदूर बन गए।

अभी डेढ़ हजार करघे चलते हैं

शाहिर शुरुवाती बुनकर समिति सिगोड़ी के सदर मो फैयाज अहमद की देखरेख में 50 करघे चलते हैं। जबकि पूरे सिगोड़ी में करीब 1500 करघा। फैयाज ने बताया कि नीतीश कुमार के कोशिश से बुनकरों की हालत सुधरी है। वजीरे आला समेकित बुनकर तरक़्क़ी मंसूबा मंसूबा से सिगोड़ी के 553 बुनकरों को 20-20 हजार की रकम मिली। रियासत भर में सेहत महकमा के सतरंगी चादर मंसूबा के तहत अस्पतालों में सप्लाई होने वाली चादर सिगोड़ी में बनती है। हालांकि इसकी सप्लाई मिसाली बुनकर तरक़्क़ी कमेटी पटना की तरफ से होता है। यह अदारा सिगोड़ी के बुनकरों से चादर बनवाती है।

मेहनत के बावजूद मार्केट नहीं मिलता

बुनकर फखरुद्दीन अहमद कहते हैं, मेहनत के हिसाब से आमदनी नहीं है। सूत महंगा हो गया है। ऐसे में ज्यादा वक़्त तक इस धंधे में टिके रहना मुश्किल होगा। मोईन अंसारी ने कहा कि लुंगी-गमछा के लिए मार्केट नहीं है, इसलिए लोकल सतह पर इसे बेचना पड़ता है। असगर अली ने बताया कि मौका दिया जाए, तो वे बिहार ही नहीं मुल्क के कई रियासतों चादर वगैरह की सप्लाई कर सकते हैं। मो शोएब कहते हैं अस्पताल ही नहीं, रेलवे, जेल, सचिवालय समेत सरकारी दफ्तरों में चादर सप्लाई का आर्डर मिलना चाहिए।

TOPPOPULARRECENT