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मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक अगर थोड़े बहुत सुरक्षित हैं तो यह अम्बेडकर की वजह से : मायावती

लखनऊ : मायावती ने बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के 61वें परिनिर्वाण दिवस पर यहां आयोजित कार्यक्रम में कहा कि भाजपा और संघ पर संविधान का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप समाप्त करने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ये शक्तियां संविधान को बदलकर हिन्दुत्व पर आधारित जातिवादी वर्ण व्यवस्था स्थापित करने में जुटी हैं। आज मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक अगर थोड़े बहुत सुरक्षित हैं तो यह अम्बेडकर की ही वजह से है।

उन्होंने कहा कि अम्बेडकर द्वारा संविधान में दिये गये अधिकारों की रक्षा और अपनी सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति में सुधार के लिये दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को ‘सत्ता की मास्टर चाबी’ अपने हाथ में लेनी होगी। यह आपके हाथ में नहीं आये इसके लिये इन सभी वर्गों के शोषणकर्ता लोग साम, दाम, दण्ड भेद करके उन्हें आपस में बांटने की कोशिश में लगे हैं। मायावती ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि आजादी के बाद लम्बे अर्से तक केंद्र और राज्यों की सत्ता में रही कांग्रेस ने संविधान के तहत दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को दिये गये अधिकारों का पूरा लाभ उन्हें नहीं दिया। साथ ही अम्बेडकर को देश के सर्वोच्च असैन्य सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नहीं नवाजा। बसपा अध्यक्ष ने कहा कि विरोधी पार्टियां अक्सर यह कहकर दलितों और पिछड़ों में फूट पैदा करने की कोशिश करती हैं, कि अम्बेडकर ने सिर्फ दलितों का ही ध्यान रखा था, जबकि यह सचाई नहीं है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के शासनकाल में अन्य पिछड़े वर्गों को शूद्र और दलितों को अति शूद्र कहा जाता था। उस समय अंग्रेजी शासकों ने इनकी पहचान के लिये सूची मांगी थी। इस बात से अम्बेडकर सहमत हो गये थे। जब सूची तैयार हो रही थी, तब उनके शोषणकर्ताओं, जिनके हाथों में विरोधी पार्टियों का नेतृत्व है, उन्होंने साजिश करके उनमें से अनेक लोगों को जबरन नकली ब्राह्मण, वैश्य और क्षत्रिय बनाकर उन्हें सूची में शामिल नहीं होने दिया था।

बसपा मुखिया ने कहा कि अम्बेडकर ने ऐसे गुमराह किये गये लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिये संविधान में अनुच्छेद 340 की व्यवस्था की, जिसमें स्पष्ट किया कि देश में जो जातियां अनुसूचित जाति एवं जनजाति में शामिल नहीं हुई हैं, उनकी शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति के मद्देनजर चुनी गयी सरकार आयोग बनाये और उनके आरक्षण की व्यवस्था करे। मण्डल आयोग की सिफारिशों के आधार पर अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण की सुविधा मिली।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1989 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह ने बसपा के समर्थन के एवज में उसकी तीन प्रमुख मांगों यानी अम्बेडकर को भारत रत्न की उपाधि देने, मण्डल आयोग की सिफारिशें लागू करने और भाजपा का अयोध्या एजेंडा लागू नहीं होने देने की बातें मान लीं तो भाजपा ने उनकी सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इससे साबित हो जाता है कि कांग्रेस की ही तरह भाजपा भी देश में दलित, अन्य पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समेत धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ है। मायावती ने प्रधानमंत्री मोदी पर वोटों की खातिर अपनी मोद धाती जाति को पिछड़े वर्ग में शामिल कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसा करके मोदी ने इन कमजोर वर्गों का हक मारा। अन्य पिछड़ा वर्गों के लोगों को भाजपा और प्रधानमंत्री के बहकावे में नहीं आना चाहिये, क्योंकि उनकी यह भावना आगे भी बदलने वाली नहीं है।

उन्होंने कहा ‘‘ऐसे हालात में अगर कांग्रेस और भाजपा और उनकी सहयोगी पार्टियों के लोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यक लोगों को अपनी पार्टी में बड़े से बड़ा पद भी क्यों ना दे दें, किसी प्रदेश का मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री क्यों ना बना दें लेकिन इसके बावजूद वे लोग इन पार्टियों में अपने आकाओं के बंधुआ मजदूर नजर आएंगे।’ बसपा अध्यक्ष ने दलितों और पिछड़ों को भाजपा के बहकावे में ना आने के लिये आगाह करते हुए कहा कि भाजपा के लोगों ने पिछड़े वर्गों को कमजोर करने के लिये तरह-तरह के हथकंडे अपनाने शुरू कर दिये हैं और वे आरक्षण की समीक्षा की बात करने लगे हैं। भाजपा एण्ड कम्पनी अम्बेडकर के नाम पर कितने ही स्मारक बनवायें, दलितों के घर जाकर क्यों ना खाना खायें, मगर दलित लोग रोहित वेमुला काण्ड, उच्च्ना काण्ड और दयाशंकर काण्ड को नहीं भुला सकते।
मायावती ने जनता को यकीन दिलाने की कोशिश की कि अगर प्रदेश में अगली सरकार बसपा की बनी तो ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की तर्ज पर ही काम किया जाएगा और गुंडों तथा माफियाओं को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। मौजूदा सरकार में जिन दुखी लोगों का मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, उनके मामले विशेष अभियान चलाकर पंजीकृत कराये जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा सपा सरकार ने सरकारी नियुक्तियों में जो गड़बड़ी की है, उसमें जांच करके सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा बड़े-बड़े कार्यक्रमों और मीडिया के विज्ञापनों पर हुए खर्च की भी जरूर जांच की जाएगी। मायावती ने गत नौ नवम्बर को लखनउच्च् में हुई जनसभा में भगदड़ में तीन लोगों की मौत का ठीकरा राज्य की सपा सरकार पर फोड़ा।

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