Friday , December 15 2017

मुस्लिम तंज़ीम की अर्जी से 12 हजार बैलों की कुर्बानी रुकी

मुंबई. बकरीद से ठीक पहले बांबे हाईकोर्ट ने 12 हजार बैलों की कुर्बानी पर रोक लगा दी है. खास बात यह है कि अदालत ने यह निज़ाम मुस्लिम तंज़ीम Muslim National Forum की इंटरवेंशन अपील (दखल दरखास्त) पर दी है. यह पहला मौका है, जब ईद उल अज़हा पर बड़े जानवर की कुर्बानी के खिलाफ मुस्लिम समाज सामने आया है. आपको मालूम हो, Muslim National Forum की ही अपील पर बांबे हाई की गोवा बेंच ने 15 दिन पहले पुलिस को गैर कानूनी तौर पर बड़े जानवर ( Illegal progeny) की कुर्बानी रोकने कि हिदायत जारी किए थे.

महाराष्ट्र कि हुकूमत के एग्रीकल्चर एंड एनिमल हसबेंडरी डिपार्टमेंट ने गुजश्ता 31 जुलाई को मुंबई के देवनार बूचड़खाने (कमेले) में छह से आठ अक्टूबर के बीच 12 हजार बैलों का ज़िबहा के इलावा कोटे को मंजूरी दी थी. ईद उल अज़हा के मद्देनजर दी गई इस मंजूरी के खिलाफ डॉ. विनोद कोठारी ने हाईकोर्ट में दरखास्त दायर की. Muslim National Forum ने भी बैलों की कुर्बानी पर रोक लगवाने के लिए कोर्ट में दखल अंदाजी की अर्जी दाखिल की.

जस्टिस वी.एम.कानाडे एवं पी.डी.कोदे की बेंच ने दरखास्तगुजारों की तरफ से पेश दलाएल को सही मानते हुए बड़े जानवर (बैलों) की कुर्बानी पर रोक लगा दी. मुंबई महानगर पालिका के हुक्म को इंतेबाह दिए जाने पर बेंच ने उसे फटकारते हुए साफ कर दिया है कि 30 सितंबर को दिए स्टे आर्डर में बदलाव नहीं होगा और बैलों की कुर्बानी पर रोक लगी रहेगी.

इससे पहले डॉ. विनोद कोठारी, Muslim National Forum के मोहम्मद फैज खान और इरफान अली की ओर से कोर्ट में कहा गया कि इस्लाम में बड़े जानवर की कुर्बानी लाज़मी नहीं है. एडवोकेट शिराज कुरैशी ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के 1995 में दिए फैसले (मगरिबी बंगाल बनाम आशुतोष लहरी) में साफ है कि ईद ऊल अज़हा के मौके पर बड़े जानवर की कुर्बानी लाज़मी नहीं मुतबादिल है.

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