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मुस्लिम पर्सनल लॉ खत्म हुआ तो मुकदमों के फैसले 40 बरसों में होंगे : कोन्सिल

ऑल इंडिया अमास कोन्सिल की जानिब से जारी बयान में कहा गया की अब मुकदमों के फैसले 40 साल में होंगे। यूं तो अक्सर मुकदमों के फैसले 10 से 15 साल से पहले नहीं आए। फ़ौजदारी, ज़मीन जायदाद के झगड़े के सिलसिले में ये बात राइज़ है की मदई के क़ब्र पर जाकर

ऑल इंडिया अमास कोन्सिल की जानिब से जारी बयान में कहा गया की अब मुकदमों के फैसले 40 साल में होंगे। यूं तो अक्सर मुकदमों के फैसले 10 से 15 साल से पहले नहीं आए। फ़ौजदारी, ज़मीन जायदाद के झगड़े के सिलसिले में ये बात राइज़ है की मदई के क़ब्र पर जाकर उनका वकील फैसला सुनाता है। ऐसी सुरते हाल में हुकूमत की तरफ से बार-बार यकसां सूल कोड का मामला उठाया जाता है। इससे मुसलमान क्या नतीजा समझे के क्या हुकूमत सिर्फ मुसलमानों के पर्सनल लॉ बोर्ड को खत्म करने की बात करती है, क्या इसकी जद में हिन्दू पर्सनल लॉ ईसाई और दीगर मजहबों का पर्सनल भी आता है? अगर इस का जवाब नहीं है तो गौर करने का मुकाम है के लाखों मुक़दमे जो मुस्लिम पर्सनल बोर्ड की तरफ से हल किए जाते हैं उन्हें अगर अदालतों की तरफ मोड दिया जाये तो अदालतों में मुकदमों की तादाद बढ़ जाएगी जिसका बोझ उठाने की सलाहियत उन अदालतों में नहीं है।

हिंदुस्तान में मुसलमानों की तादाद 35 करोड़ से कम नहीं है ऐसे में सरकारी अदालतों पर जो इजाफ़ी बोझ बढ़ेगा इस वजह से अदालतों के फैसलों की रफ्तार और घट जाएगी और इस तरह मुकदमों के फैसले 15-20 साल के बजाय 30-40 साल में हुआ करेंगे।

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