Wednesday , December 13 2017

मुस्लिम बच्चों को मॉडर्न तालीम के साथ साथ दीनी तालीम देना ज़रूरी

दुनिया में तरक़्क़ी कामयाबी और कामरानी के लिए मुसलमान लड़के लड़कियों का दीनी और असरी तालीम से आरास्ता होना बहुत ज़रूरी है। ख़ासकर दुख़्तराने मिल्लत का तालीमयाफ्ता होना इस लिए भी ज़रूरी है क्यों कि माँ की गोद औलाद की पहली दरसगाह होती ह

दुनिया में तरक़्क़ी कामयाबी और कामरानी के लिए मुसलमान लड़के लड़कियों का दीनी और असरी तालीम से आरास्ता होना बहुत ज़रूरी है। ख़ासकर दुख़्तराने मिल्लत का तालीमयाफ्ता होना इस लिए भी ज़रूरी है क्यों कि माँ की गोद औलाद की पहली दरसगाह होती है इस तरह माँ एक मुअल्लिमा एक रहबर और रहनुमा की हैसियत से अपने बच्चों को अख़्लाक़ किरदार के ज़ेवर से आरास्ता करने उन में अख़्लाक़ी इक़दार को प्रवान चढ़ाने में अहम रोल अदा करती है।

ग़र्ज़ तालीमयाफ्ता लड़कियां मुहज़्ज़ब मुआशरा की अलामत होती हैं ताहम दीनी तालीम के बिना असरी तालीम हलाकत ख़ेज़ साबित होती है और हो रही है इसे में बेटियों और बेटों को असरी तालीम के साथ साथ दीनी तालीम दिलाना बेहद ज़रूरी है। इस दौर में हम तालीम के ज़रीए ही नांसाफ़ी , ज़ुल्म और बरबरीयत , तास्सुब और जानिबदारी और फ़िर्कापरस्ती का मुक़ाबला कर सकते हैं।

अच्छी बात ये है कि हैदराबाद में मुसलमानों को तालीमी मैदान में आगे बढ़ाने के लिए बहुत काम हो रहा है। इन ख़्यालात का इज़हार एडीटर सियासत जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने जामिआ आईशा निस्वां दाराब जंग कॉलोनी मादन्ना पेट की तीसरी मंज़िल की तकमील और इफ़्तिताह के मौक़ा पर मुनाक़िदा जल्सा से अपने ख़ुसूसी ख़िताब में किया।

हज़रत मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी की ज़ेरे सरपरस्ती और नाज़िम मदर्रसा हाफ़िज़ मुहम्मद ख़्वाजा नज़ीर उद्दीन की निगरानी में चलाए जाने वाले इस अज़ीमुस्शान मदर्रसा में 1600 तालिबात इल्मे दीन हासिल कर रही हैं जहां उन्हें इल्म दीन के साथ साथ अंग्रेज़ी , साईंस , रयाज़ी की तालीम भी दी जाती है।

रियासत बल्कि सारे मुल्क में अपनी तर्ज़ के इस मुनफ़रद दीनी मदर्रसा की 32 शाख़ें सारे मुल्क में काम कर रही हैं। इस तरह जामिआ आईशा निसवां और उस की शाख़ों में तालीम हासिल कर रही तालिबात की तादाद 7000 से मुतजाविज़ हो चुकी है।

जनाब ज़ाहिद अली ख़ान ने अपना सिलसिला ख़िताब जारी रखते हुए कहा कि उन्हें इस मदर्रसा में तालिबात की कसीर तादाद के तालीम हासिल करने के बारे में जान कर बहुत मुसर्रत हुई है और उन की मुसर्रत उस वक़्त दोबाला हो गई जब उन्हें बताया गया कि तालिबात को असरी उलूम से भी आरास्ता किया जा रहा है।

एडीटर सियासत ने कहा कि मुसलमानों को 4 फ़ीसद तहफ़्फुज़ात की ज़रूरत नहीं बल्कि हमें हमारी आबादी के लिहाज़ से तहफ़्फुज़ात फ़राहम किए जाने चाहीए। उन्हों ने जनाब ज़ाहिद अली ख़ान की ख़िदमात को भरपूर ख़राज तहसीन पेश करते हुए बारगाहे रब्बुल इज्ज़त में ये भी दुआ की कि अल्लाह ताला एडीटर सियासत को दुश्मनों के शर से महफ़ूज़ रखे।

मौलाना ख़ालिद सैफुल्लाह रहमानी ने पुरज़ोर अंदाज़ में ये भी कहा कि मुल्क का तालीमी निज़ाम नाक़ुस है। इस से अख़्लाक़ी इक़दार को निकाल दिया गया है और ऐसा निज़ाम तालीम पेश किया गया जिस ने रिश्वतखोरी और बदउनवानी को फ़रोग़ दिया है। चुनांचे जराइम बिलख़ुसूस करप्शन में तालीमयाफ्ता अफ़राद ही ज़्यादा मुलव्विस पाए जाते हैं।

उन्हों ने मदर्रसा की तरक़्क़ी के लिए दुआ भी की। मौलाना मुहम्मद आरिफ़ बिल्लाह अल क़ासमी ने जल्सा की कार्रवाई चलाई और मीर मक़बूल अली हाश्मी ने शुक्रिया अदा किया।

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