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मुस्लिम महिलायें शरीयत में न बदलाव चाहती हैं और न ही हस्तक्षेप: शमशाद बागबान

बेंगलुरु: बेंगलुरु में सैयदा ज़ैनब ट्रस्ट के तहत आयोजित मुस्लिम महिलाओं के सम्मेलन में महिलाओं ने अपने विचार का व्यक्त किया। इस अवसर पर मुंबई की आलिमा शमशाद बागबान ने कहा कि मुस्लिम महिलायें शरियत के क़ानून में न ही बदलाव चाहती हैं और न ही किसी का हस्तक्षेप।

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बागबान ने कहा कि मौजूदा दौर में कुछ पुरुषों की गलत हरकतों के कारण तीन तलाक और अन्य सिद्धांतों पर बहस हो रही है।बैठक के आयोजकों ने कहा कि न केवल मुसलमान बल्कि हिंदू, सिख और इसाई भी समान नागरिक संहिता का विरोध करें।
न्यूज़ नेटवर्क समूह प्रदेश 18 के अनुसार ‘सम्मेलन’ खास महिलाओं के लिए था जिस में महिलाओं ने कहा कि मुस्लिम समाज में चाहे पुरुष हो या महिला, दोनों एक दूसरे के अधिकार को पहचानें और इसको बखूबी निभाएँ, मौजूदा दौर में कुछ पुरुषों की सरगर्मी की वजह से शरई कानून पर बहस हो रही है जबकि तथ्य यह है कि भारत की मुस्लिम महिलायें न तो शरीयत में कोई परिवर्तन चाहती हैं और न ही किसी तरह का कोई हस्तक्षेप।
इस अवसर पर महिलाओं ने तीन तलाक पर देश भर में जारी बहस की आलोचना भी की। सम्मेलन में अज़मत अहले बैत के विषय पर मुस्लिम समुदाय की औरतों ने विस्तार से प्रकाश डाला।
इस दो दिवसीय अज़मत अहले बैत सम्मेलन बेंगलुरु के शीवाजी नगर के छोटे मैदान में आयोजित किया गया। सम्मेलन का पहला दिन केवल महिलाओं के लिए था। देश के विभिन्न राज्यों की आलिमा, कारिया, और हाफिज़ा से ख़िताब किया।
उल्लेखनीय है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर इस सम्मेलन पर भी नजर आया। पाकिस्तान की नात खांहुरिया रफीक़ को आमंत्रित किया गया था, लेकिन सीमा पर जारी तनाव के मद्देनजर हुरिया ने सम्मेलन में भाग लेने से परहेज किया। हालांकि आयोजकों ने स्काइप के जरिए हुरिया रफीक को जनता के सामने पेश किया।

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